PM Modi US Visit: दौरे का सारा खर्चा उठा रहा अमेरिका, जानिए स्टेट विजिट में क्यों होती है इतनी खातिरदारी?
पीएम मोदी की इस यात्रा की खास बात ये है कि वो दूसरी बार अमेरिकी संसद के निचले सदन-अमेरिकी कांग्रेस की एक संयुक्त बैठक को संबोधित करेंगे। पीएम मोदी ऐसा करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री होंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन दिवसीय दौरे पर मंगलवार को अमेरिका पहुंच गए हैं। पीएम मोदी अब तक नरेंद्र मोदी 8 बार अमेरिका की यात्रा कर चुके हैं, लेकिन ये उनकी पहली स्टेट विजिट है।
स्टेट विजिट एक देश के राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री का सबसे अव्वल दर्जे का दौरा होता है। अमेरिका, स्टेट विजिट के तहत जिस देश के राष्ट्राध्यक्ष या सरकार के मुखिया को आमंत्रित करता है, इसका मतलब यह है कि उस देश को अपना महत्वपूर्ण सहयोगी और दोस्त मानता है।

आइए जानते हैं कि स्टेट विजिट में ऐसा क्या स्पेशल होता है कि अमेरिका गिने-चुने राष्ट्र प्रमुखों को ही इसके लिए आमंत्रित करता है।
अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक, स्टेट विजिट को हाई रैंकिंग वाला दौरा कहा जाता है। इसकी अहमियत इसलिए बढ़ जाती है क्योंकि इसका न्योता खुद अमेरिकी राष्ट्रपति की कलम से लिखा जाता है।
अमेरिकी राष्ट्रपति के आधिकारिक गेस्ट हाउस का नाम है 'ब्लेयर हाउस'। ये आलिशान बंगला व्हाइट हाउस के बिलकुल समीप में बनाया गया है। स्टेट विजिट पर आए अतिथि इसी बंगले में ठहरते हैं।

स्टेट विजिट के दौरान कई तरह के कार्यक्रमों का आयोजन होता है। इन आयोजनों में अमेरिका के राष्ट्रपति के साथ एक बैठक, व्हाइट हाउस में राजकीय लंच, 21 तोपों की सलामी, व्हाइट हाउस के साउथ ग्राउंड पर अतिथि के आने और वापस जाने पर सम्मान समारोह का आयोजन शामिल है। इस दौरान स्वयं अमेरिकी राष्ट्रपति मेहमान देश के नेता की मेजबानी करते हैं। इतना ही नहीं, इस यात्रा पर होने वाला सारा खर्चा अमेरिका खुद उठाता है।
स्टेट विजिट के दौरान डिनर की पूरी व्यवस्था का जिम्मा अमेरिका की फर्स्ट लेडी यानी राष्ट्रपति की पत्नी और उनके स्टाफ संभालते हैं। डिनर में खाने का मेन्यू क्या होगा, मेहमान का स्वागत किस तरह के फूलों से होगा, टेबल की सेटिंग कैसी होगी और सीटिंग अरेंजमेंट क्या होगा, मनोरंजन की क्या व्यवस्था होगी, यह सब कुछ फर्स्ट लेडी ही तय करती हैं।
अमेरिकी विदेश विभाग की गाइडलाइंस के मुताबिक अमेरिका में 5 प्रकार के दौरे होते हैं, जिनके तहत दूसरे देश के नेता और अधिकारी अमेरिका आते हैं। अब तक तो आपको पता चल ही गया होगा कि इनमें नंबर 1 की पोजिशन स्टेट विजिट को क्यों हासिल है।
इसके बाद ऑफिशियल विजिट का नंबर आता है। इसमें अतिथि को 19 तोपों की सलामी दी जाती है। इसमें अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ उनकी बैठक भी होती है। स्टेट विजिट के बाद ये दूसरी बड़ी हाई रैंकिंग यात्रा है।
तीसरे नंबर पर ऑफिशियल वर्क विजिट आता है। इन यात्रा में भी अतिथि नेता के साथ अमेरिकी राष्ट्रपति की बैठक होती है। हालांकि अतिथि के आने और जाने पर कोई विशेष कार्यक्रम का आयोजन नहीं होता है।
चौथा नंबर वर्क विजिट का है। इस यात्रा में व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ बैठक जरूर होती है। लेकिन किसी तरह का लंच या डिनर नहीं होता है।
पांचवें नंबर पर निजी यात्रा आती है। इसमें किसी देश के मुखिया, नेता, विदेश मंत्री, मंत्री या कोई भी सरकारी अफसर आ सकता है। इसके लिए अमेरिकी राष्ट्रपति की अनुमति की जरूरत नहीं होती है। निजी यात्रा कितने भी समय के लिए हो सकती है।
पीएम मोदी भारत के ऐसे तीसरे नेता हैं, जो अमेरिका के स्टेट विजिट पर गए हैं। उनसे पहले साल 1963 में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन और साल 2009 में तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह अमेरिका की राजकीय यात्रा यानी स्टेट विजिट पर जा चुके हैं।
अमेरिका के मौजूदा राष्ट्रपति जो बाइडेन के कार्यकाल में यह किसी दूसरे देश के नेता का तीसरा स्टेट विजिट है। इससे पहले फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति यून सुक योल अमेरिका के स्टेट विटिज पर जा चुके हैं।
स्टेट विजिट का इतिहास
अमेरिका में स्टेट विजिट की शुरुआत साल 1800 के आसपास हुई थी। तब अमेरिकी राष्ट्रपति अपने कैबिनेट के सदस्यों, कांग्रेस मेंबर्स और वरिष्ठ अफसरो को भोज पर आमंत्रित किया करते थे।
बाद स्टेट विजिट की परिभाषा बदल दी गई और यह विदेशी राष्ट्राध्यक्ष या सरकार प्रमुख तक सिमट गई। अमेरिका में पहली बार तत्कालीन राष्ट्रपति उलसेस ग्रैंट ने हवाई के राजा कालाकुआ साल 1874 में स्टेट विजिट का आयोजन किया था।
इसके बाद तो स्टेट विजिट पर दूसरे देश के राष्ट्राध्यक्ष- राष्ट्रपति या राजा-रानी को बुलाने की परंपरा कायम हो गई। लेकिन हाल के सालों में इसमें बदलाव आया है, अब प्रधानमंत्री भी स्टेट विजिट पर अमेरिका जाने लगे हैं।
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