PM Modi WHO के मंच से बोले- कोरोना संकट के दौरान भारत अंतरराष्ट्रीय सहयोग के प्रति प्रतिबद्ध रहा
World Health Assembly के 76वें सत्र में पीएम मोदी ने कहा, महामारी के कारण हमें स्वास्थ्य सेवा में अधिक सहयोग की जरूरत का अंदाजा हुआ। इस अवधि में वैश्विक स्वास्थ्य समानता को बढ़ावा देने की जरूरत भी स्पष्ट हुई।

PM Modi WHOPM Modi WHO के मंच पर भारत की भूमिका के बारे में बात करते दिखे। विश्व स्वास्थ्य सभा के 76 वें सत्र में प्रधानमंत्री ने कहा, कोरोना संकट और महामारी ने हमें स्वास्थ्य सेवा में अधिक सहयोग का एहसास कराया।
उन्होंने कहा कि वैश्विक सहयोग की आवश्यकता और वैश्विक स्वास्थ्य समानता को बढ़ावा देने की जरूरत भी कोरोना संकट के दौरान स्पष्ट रूप से सामने आई।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिनेवा, स्विट्जरलैंड में आयोजित विश्व स्वास्थ्य सभा के 76 वें सत्र में कहा, "जिनेवा में विश्व स्वास्थ्य सभा के 76वें सत्र में सभी को हार्दिक बधाई।"
उन्होंने कहा, मैं 75 वर्षों तक दुनिया की सेवा करने के ऐतिहासिक मील के पत्थर को पूरा करने पर WHO को बधाई देता हूं। मैं मुझे विश्वास है कि WHO अगले 25 वर्षों के लिए लक्ष्य निर्धारित करेगा जब यह सेवा के 100 वर्षों तक पहुंच जाएगा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने संकट के समय अपनी प्रतिबद्धता दिखाते हुए 100 से अधिक देशों को कोरोना टीकों की 300 मिलियन डोज भेजी। महामारी ने वैश्विक स्वास्थ्य संरचना में कई खामियों को उजागर किया है। वैश्विक प्रणालियों में और लचीलापन हो, इसके लिए सामूहिक प्रयास की जरूरत है।
पीएम मोदी ने कहा, "महामारी ने वैश्विक स्वास्थ्य इक्विटी को बढ़ावा देने की जररूत पर भी प्रकाश डाला। भारत से जहां कोरोना वैक्सीन भेजी गई इनमें से कई देश ग्लोबल साउथ से थे।" उन्होंने कहा, मुझे विश्वास है कि आने वाले वर्षों में संसाधनों तक सभी देशों की समान पहुंच हो, WHO की ये सर्वोच्च प्राथमिकता होगी।"
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प्रधानमंत्री ने भारत के 'पारंपरिक ज्ञान' पर जोर देते हुए कहा कि बीमारी से मुक्त होने के बाद स्वस्थ्य की ओर भी बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा, "भारत का पारंपरिक ज्ञान कहता है कि बीमारी की अनुपस्थिति अच्छे स्वास्थ्य के समान नहीं है। हमें न केवल बीमारी से मुक्त होना चाहिए बल्कि कल्याण की ओर एक कदम आगे बढ़ना चाहिए।
बकौल पीएम मोदी, योग, आयुर्वेद और ध्यान जैसी पारंपरिक प्रणालियां शारीरिक, मानसिक और स्वास्थ्य के सामाजिक पहलू हैं। उन्होंने कहा, "मुझे खुशी है कि WHO का पहला वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा केंद्र भारत में स्थापित किया जा रहा है। मुझे इस बात की भी खुशी है कि दुनिया मोटे अनाज (Millets) के अंतरराष्ट्रीय वर्ष के माध्यम से बाजरा के महत्व को पहचान रही है।
बकौल पीएम मोदी, "भारत के प्राचीन शास्त्र 'वसुधैव कुटुम्बकम' के तहत दुनिया को एक परिवार के रूप में देखने की शिक्षा देते हैं। इस वर्ष हमारी जी20 अध्यक्षता के दौरान, हम 'एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य' की थीम के साथ काम कर रहे हैं। अच्छे स्वास्थ्य के लिए हमारा दृष्टिकोण 'एक पृथ्वी एक स्वास्थ्य' है। हम तभी स्वस्थ रह सकते हैं जब हमारा पूरा पारिस्थितिकी तंत्र स्वस्थ हो। इसलिए, हमारी दृष्टि केवल मनुष्यों तक ही सीमित नहीं है। यह जानवरों, पौधों और पर्यावरण सहित पूरे पारिस्थितिकी तंत्र तक फैली हुई है।
प्रधानमंत्री ने कहा, भारत ने पिछले कुछ वर्षों में स्वास्थ्य सेवा की उपलब्धता, पहुंच और सामर्थ्य पर काम किया है। उन्होंने कहा, "चाहे वह दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना - आयुष्मान भारत हो, या स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे में बड़े पैमाने पर सुधार हो, या लाखों परिवारों को स्वच्छता और पेयजल उपलब्ध कराने का अभियान हो; हमारे कई प्रयासों का उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य को बढ़ावा देना है।
उन्होंने कहा, एक दृष्टिकोण जो भारत की विविधता के पैमाने के साथ काम करता है, वह दूसरों के लिए भी एक रूपरेखा हो सकती है। भारत कम और मध्यम आय वाले देशों में इसी तरह के प्रयासों के लिए डब्ल्यूएचओ का समर्थन करने के इच्छुक हैं।"
प्रधानमंत्री ने 75 वर्षों के प्रयासों पर डब्ल्यूएचओ की सराहना भी की। अतीत में वैश्विक संस्थानों के महत्व का जिक्र पर पीएम मोदी ने कहा, WHO की भूमिका निश्चित रूप से अतीत में महत्वपूर्ण थी, लेकिन यह चुनौतियों से भरे भविष्य में भूमिका और भी महत्वपूर्ण होगी। भारत हर प्रयास में मदद करने के लिए प्रतिबद्ध है।












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