भारत और ऑस्ट्रेलिया का संयुक्त 'मिशन चीन' कार्यक्रम शुरू, इसी महीने राष्ट्रपति बाइडेन से मिलेंगे पीएम मोदी
भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच टू प्सस टू की कामयाब बैठक होने के बाद अब भारत की नजर इस महीने होने वाली क्वाड की बैठक पर है। जहां मुख्य एजेंडा चीन होने वाला है।
नई दिल्ली, सितंबर 12: भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच अफगानिस्तान और इंडो-पैसिफिक पर अहम बैठक होने के बाद अब दोनों देशों ने मिशन चीन कार्यक्रन की शुरूआत कर दी है और इसी महीने क्वाड की अहम बैठक अमेरिका में होने वाली है। और माना जा रहा है कि क्वाड के जरिए चीन को काफी सख्त मैसेज दिया जाएगा। दिल्ली में भारत और ऑस्ट्रेलिया के टू प्लस टू की बैठक में अफगानिसस्तान के साथ साथ इंडो-पैसिफिक के लिए भी रणनीति तैयार की गई है, लेकिन दोनों देशों का मुख्य मिशन चीन है।

पीएम मोदी का अमेरिका दौरा
भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर इस महीने की 20 तारीख को अमेरिका के दौरे पर जाने वाले हैं और वो वहां पर भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की 22 सितंबर को अगुवाई करेंगे। पीएम मोदी 22 सितंबर को अमेरिका की राजधानी बेहद अहम क्वाड की बैठक में शामिल होने के लिए पहुंच रहे हैं। जिसमें जापान और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री भी शामिल होंगे। इस साल क्वाड की एक बैठक वर्चुअल हो चुकी है और अब चारों नेता एक साथ बैठकर क्वाड की बैठक करेंगे, जिसमें मुख्य एजेंडा हिंद-प्रशांत क्षेत्र और समुद्री कानून ही होगा। चूंकी इन दोनों जगहों पर चीन काफी आक्रामक है, लिहाजा क्वाड की बैठक में टार्गेट चीन ही होगा।

पीएम मोदी का अमेरिका कार्यक्रम
भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर 20 सितंबर को न्यूयॉर्क के लिए उड़ान भरेंगे और 22 सितंबर की शाम को वाशिंगटन में होंगे, जब पीएम मोदी अमेरिका की राजधानी में पहुंचेंगे। भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल एयर इंडिया वन में पीएम मोदी के साथ होंगे। पीएम मोदी 25 सितंबर की सुबह संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करेंगे और फिर भारत के लिए प्रस्थान करेंगे । भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर 21 सितंबर से शुरू होने वाले यूनाइटेड नेशंस जनरल एसेंबली की बैठक के दौरान अन्य देशों के विदेश मंत्रियों के साथ द्विपक्षीय बैठकें करेंगे।

भारत के मुख्य एजेंडे
अमेरिकी यात्रा के दौरान भारत का ध्यान अफगानिस्तान में तालिबान के शासन पर होगा। क्योंकि अब यह तय हो गया है कि अफगानिस्तान में सुन्नी आतंकवादी संगठन तालिबान कट्टरपंथी विचारधारा के साथ ही सरकार चलाएगा और महिलाओं और अन्य अल्पसंख्यकों के प्रति क्रूर रहेगा। वहीं, भारत को इस बात की भी आशंका है कि अफगानिस्तान की धरती का इस्तेमाल भारत के खिलाफ हो सकता है और पाकिस्तान भी भारत में आतंकियों तो भेजने की कोशिश कर सकता है। लिहाजा, भारत अपनी चिंता को संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक के दौरान उठा सकता है। वहीं, पाकिस्तानी आईएसआई काबुल में तालिबान सरकार के राजनीतिक और सैन्य मामलों में खुले तौर पर शामिल होने के कारण भविष्य में अफगानिस्तान से होने वाले किसी भी आतंकवादी हमले के मामले में वैश्विक समुदाय इस्लामाबाद को जिम्मेदार ठहराएगा। क्वाड शिखर सम्मेलन में अफगानिस्तान की स्थिति, कोरोनावायरस, इंडो-पैसिफिक और जलवायु परिवर्तन पर विस्तार से चर्चो होगी।

इंडो-पैसिफिक पर अहम चर्चा
प्रधानमंत्री मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान सबसे ज्यादा चर्चा में जो मुद्दा होगा, वो है हिंद-प्रशांत क्षेत्र और दक्षिण चीन सागर में मुक्त नेविगेशन का अधिकार। जिसमें बीजिंग इस क्षेत्र में अपने निराधार समुद्री दावों को लागू करने के लिए आक्रामक हो रहा है। दूसरी तरफ क्वाड नौसेनाएं, पिछले महीने गुआम के तट पर मालाबार अभ्यास के साथ इंडो-पैसिफिक में नियमित रूप से अभ्यास कर रही हैं। लिहाजा माना जा रहा है कि क्वाड की बैठक में चीन को लेकर एजेंडे तय किए जा सकते हैं।

भारत-ऑस्ट्रेलिया टू प्लस टू बैठक
शुक्रवार को भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच चल रहे टू प्लस टू वार्ता के दौरान भारतीय रक्षा मंत्री ने कहा कि, ''भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन के बीच जून 2020 में वर्चुअल बैठक के दौरान हम ऑर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रक्षा संबंधों को लेकर व्यापक रणनीति साझेदारी पर पहुंचे थे। राजनाथ सिंह ने कहा कि 'पिछले कुछ सालों में दोनों देशों की पहल इस बात को दिखाता है कि हम कितने करीब पहुंचे हैं। दोनों देशों के बीच की ये पार्टनरशिप फ्री ट्रेड, नियम आधारित व्यवस्था और ऑर्थिक विकास में साझेदार हैं।' भारतीय रक्षा मंत्री ने कहा कि दोनों देशों के बीच संबंध काफी मजबूत हुए हैं, जिससे हम काफी खुश हैं और हमारे बीच रक्षा संबंधों को लेकर उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।''












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