जियो पॉलिटिक्स... जियो इकोनॉमिक्स.. 90 देश... क्या है रायसीना डायलॉग, जिसका पीएम आज करेंगे उद्घाटन

रायसीना डायलॉग की शुरूआत साल 2016 में की गई थी, जिसका मकसद वैश्विक राजनीति में भारत को एक प्रमुख शक्ति के तौर पर प्रस्तुत करना था और आज से इसका सातवां संस्करण शुरू हो रहा है।

नई दिल्ली, अप्रैल 25: भारत की शक्ति का प्रभाव अब पूरी दुनिया में दिखने लगा है और भारत की ताकत को अब पूरी दुनिया स्वीकार भी करने लगी है और इसका सबसे ताजा उदाहरण है, आज से शुरू होने वाला रायसीना डायलॉग, जिसका उद्घाटन भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी करेंगे। जियो-पॉलिटिक्स और जियो-इकोनॉमिक्स के लिहाज से काफी अहम माने जाने वाले इस सम्मेलन की चीफ गेस्ट यूरोपीय कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयन हैं। आइये जानते हैं, आखिर रायसीना डायलॉग क्या है और यह भारत की शक्ति का प्रदर्शन क्यों करता है।

2016 में हुई थी शुरूआत

2016 में हुई थी शुरूआत

रायसीना डायलॉग की शुरूआत साल 2016 में की गई थी, जिसका मकसद वैश्विक राजनीति में भारत को एक प्रमुख शक्ति के तौर पर प्रस्तुत करना था और आज से इसका सातवां संस्करण शुरू हो रहा है। पिछले बार कोविड की वजह से ये सम्मेलन वर्चुअल हुआ था और राष्ट्रीय राजधानी में एक हफ्ते के भीतर वैश्विक नेताओं के साथ प्रधानमंत्री की यह दूसरी सबसे महत्वपूर्ण बैठक होने वाली है। पिछले हफ्ते, पीएम मोदी ने यूनाइटेड किंगडम के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन से मुलाकात की थी, जिसमें दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों, यूक्रेन युद्ध, जलवायु परिवर्तन सहित कई मुद्दों पर चर्चा की थी।

जियो-पॉलिटिक्स पर चर्चा

जियो-पॉलिटिक्स पर चर्चा

रविवार को एक ट्वीट में यूरोपीय संघ आयोग की प्रमुख उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने जलवायु परिवर्तन पर भारत के साथ काम करने के महत्व पर जोर दिया है। उन्होंने ट्वीट में लिखा है कि, 'यूरोप #EUGreenDeal के साथ जलवायु तटस्थता की राह पर है। लेकिन अकेले यूरोप हमारी धरती को नहीं बचाएगा। यह एक वैश्विक प्रयास है, और हमें भारत के साथ काम करने की आवश्यकता है। और हम आप पर भरोसा करते हैं, और हमारे आज के युवा लोग इसके लिए लड़ते रहेंगे'। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष ने जलवायु कार्यकर्ताओं के साथ बातचीत का एक वीडियो भी पोस्ट किया है।

तीन दिनों तक चलेगा कार्यक्रम

तीन दिनों तक चलेगा कार्यक्रम

रायसीना डायलॉग सोमवार, मंगलवार और बुधवार... तीन दिनों तक चलेगा। जिसमें इस साल का मुख्य विषय 'टेरा नोवा: इंपैसियन, अधीर, और इम्पेरिल्ड' है। भारतीय विदेश मंत्रालय की तरफ से इसकी जानकारी दी गई है। भारतीय विदेश मंत्रालय की तरफ से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया है कि, 'तीन दिनों के दौरान, संवाद में छह विषयगत स्तंभों पर कई प्रारूपों में पैनल चर्चा और बातचीत होगी। जिसमें (i) लोकतंत्र पर पुनर्विचार: व्यापार, तकनीक और विचारधारा, (ii) बहुपक्षवाद का अंत: एक नेटवर्क वैश्विक व्यवस्था?; (iii) वाटर कॉकस: इंडो-पैसिफिक में अशांत ज्वार (iv) कम्युनिटीज इंक: स्वास्थ्य, विकास और धरती के लिए पहला उत्तरदाता; (v) हरित संक्रमण प्राप्त करना: सामान्य अनिवार्य, विचलन वास्तविकताएं और (vi) सैमसन बनाम Goliath: The Persistent and Relentless Tech Wars, (sic)" पर चर्चा होगी। पिछले साल, कोविड के कारण सम्मेलन एक आभासी प्रारूप में आयोजित किया गया था। इस साल, हालांकि, यह व्यक्तिगत रूप से आयोजित किया जा रहा है।

उर्सुला वॉन डेर लेयन मुख्य अतिथि

उर्सुला वॉन डेर लेयन मुख्य अतिथि

पीएम मोदी आज रायसीना डायलॉग का उद्घाटन करेंगे और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष वॉन डेर लेयेन मुख्य अतिथि के रूप में उद्घाटन सत्र में शामिल होंगी। रायसीना डॉयलॉग का प्रमुख मुद्दा विदेश मंत्रालय का भू-राजनीति और भू-अर्थशास्त्र पर प्रमुख सम्मेलन है। द्विपक्षीय मोर्चे पर, वॉन डेर लेयेन ने कहा कि यूरोपीय संघ भारत को नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था को बनाए रखने, जलवायु परिवर्तन से लड़ने और डिजिटल संक्रमण को चार्ट करने के लिए एक महत्वपूर्ण भागीदार के रूप में देखता है। शांतिपूर्ण और समृद्ध हिंद-प्रशांत को सुनिश्चित करने जैसे दोनों पक्षों के अभिसरण हित भी हैं। वॉन डेर लेयेन ने यह भी कहा कि, यूरोपीय संघ भारत के साथ व्यापार, निवेश संरक्षण और भौगोलिक संकेतों पर तीन समझौतों को तेजी से काम को अंजाम तक पहुंचाना चाहता है। (सभी तस्वीर फाइल)

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