चीन दौरे पर इन पांच बातों से जरूर बचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
शियान। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी तीन दिन की चीन की यात्रा पर हैं। प्रधानमंत्री अपनी मेहमानवाजी के लिए दुनियाभर में अपनी एक अलग पहचान बना चुके हैं। लेकिन प्रधानमंत्री को चीन के दौरे पर अपनी मेहनवाजी के तौर-तरीके बदलने की काफी जरूरत है।

पिछली बार जब चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत दौरे पर आये थे तो पीएम मोदी ने उनके लिए गुजरात में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया था। पीएम ने उन्हें गांधीजी का पारंपरिक चरखा दिया था और उनके लिए झूले का भी प्रबंध किया था। ऐसे में पीएम मोदी को भी चीन के राष्ट्रपति बेहतर स्वागत देने की कोशिश करेंगे।
लेकिन इन सब के बीच में प्रधानमंत्री को चीन की सांस्कृतिक धरोहर और परंपराओं को समझने की भी जरूरत है। चीन में कई ऐसी परंपराएं हैं जिन्हें चीन की परंपरा के अनुसार की करना चाहिए।
1- गले मिलना
अमेरिकी राष्ट्रपित बराक ओबामा के भारत दौरे के दौरान प्रधानमंत्री ने उन्हें कई बार गले लगाया था। लेकिन चीन के लोग गले लगने में असहज महसूस करते हैं। यही नहीं अनजान लोगों से हाथ मिलानें और उन्हें गले लगाना यहा के लोगों को काफी असहज लगता है। वहीं पीठ के पीछे हाथ रखना या कंधे के उपर हाथ रखने के संकेतों से यहां के लोग भली-भांति परिचित नहीं हैं।

2- खाना खाने के दौरान रखें इन बातों का खयाल
चीन में खाने की टेबल पर भी बाकी देशों की तुलना में अलग संस्कृति को अपनाया जाता है। यहां खाने के लिए चॉपस्टिक यानि लकड़ी की डंडियों से खाना खाये जाने को काफी महत्ता दी जाती है। चॉपस्टिक को किसी को भी खाने के कटोरे में सीधी नहीं डालनी चाहिए, ऐसा करना किसी के अंतिम संस्कार की ओर इशारा करता है। वहीं चॉपस्टिक को गिराना नहीं चाहिए इसे अशुभ संकेत माना जाता है।
3- खाने का बर्तन पूरी तरह खत्म ना करें
इसके साथ ही इस बात का भी खयाल रखना चाहिए कि खाने की बर्तन को पूरा नहीं खत्म करना चाहिए क्योंकि इसे अपमानजनक माना जाता है। खाने की प्लेट में थोड़ा खाना छोड़े जाने को मेहमान को सम्मान दिये जाने में गिना जाता है।

4- तोहफों को खोलने से पहले सोचें
प्रधानमंत्री अपने विदेशी मेहमानों को यादगार तोहफे देने में विश्वास रखते हैं। चाहे वो पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को शॉल हो या खूबसूरत पेंटिंग या फिर ऐतिहासिक दस्तावेज। चीन की परंपरा के अनुसार छोटे, पारंपरिक तोहफों को दिये जाने को अच्छा माना जाता है। लेकिन इस तोहफे को दोनों हाथों से दिये जाने को भद्र और सम्मानजनक माना जाता है।

वहीं यह गौर करने वाली बात है कि मेहमान के सामने ही तोहफों को खोलने को सही नहीं माना जाता है। तो ऐसे में अगर प्रधानमंत्री को कोई तोहफा मिलता है तो उन्हें उस तोहफे को दोनों हाथों से पकड़ते हुए लेना चाहिए साथ ही शुक्रिया भी अदा करना चाहिए।
5- शारीरिक भाव भंगिमायें
चीन में साधारण भाव भंगिमाओं को बहुत ही महत्व दिया जाता है। उदाहरण के लिए हाथ के दोनों अगूंठों से कान को उपर उठाने को अच्छे संकेत के तौर पर माना जाता है। जबकि कानी उंगली से इशारा किये जाने को अशुभ माना जाता है।

वहीं सर को हामी में हिलाये जाने को दुनियाभर में स्वीकृति के तौर पर माना जाता है लेकिन चीन में इसका मतलब स्वीकृति नहीं होता है। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी और उनके दल को मीडिया से बातचीत करते समय इस बात का विशेष खयाल रखना चाहिए।












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