'जनता के लिए नहीं, डॉलर के लिए जंग में कूदे थे', इमरान खान ने अफगानिस्तान युद्ध के लिए मांगी माफी

इमरान खान ने दावा किया है कि, वो पाकिस्तान के नीति निर्धारकों के काफी करीब थे, जिन्होंने अफगानिस्तान युद्ध में शामिल होने का फैसला लिया था।

इस्लामाबाद, दिसंबर 22: 'अफगानिस्तान युद्ध में कूदना पाकिस्तान का जनहित में उठाया गया फैसला नहीं, बल्कि डॉलर के लिए लिया गया फैसला था, और हमें इसके लिए खेद है', ये बयान दिया है पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने, जिन्होंने सालों से कही जाने वाली उस थ्योरी पर मुहर लगा दी है, कि अमेरिकन डॉलर की खातिर पाकिस्तान अफगानिस्तान जंग में कूदा था और डॉलर के लिए ही पाकिस्तान ने पहले रूस को धोखा दिया और फिर अमेरिका को 'बेवकूफ' बनाता रहा।

डॉलर के लिए जंग में कूदा

डॉलर के लिए जंग में कूदा

अफगानिस्तान में अमेरिका के 20 साल लंबे 'आतंकवाद के खिलाफ युद्ध' में पाकिस्तान की भागीदारी के फैसले पर प्रधानमंत्री इमरान खान ने मंगलवार को खेद व्यक्त करते हुए कहा कि यह जनहित में नहीं बल्कि "डॉलर के लिए" उठाया गया कदम था। इस्लामाबाद में अफगानिस्तान के मुद्दे पर आयोजित 57 मुस्लिम देशों के संगठन ओआईसी की बैठक के बाद इमरान खान ने पहली बार गलती मानी है और साफ कर दिया है कि, पाकिस्तान किसी आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में शामिल होने के लिए अफगानिस्तान नहीं गया था, बल्कि अमेरिकन डॉलर्स के लिए वो जंग में कूदा था। आपको बता दें कि, रविवार को ओआईसी की बैठक का आयोजन किया गया था, जिसमें पाकिस्तान ने सभी 57 मुस्लिम देशों के विदेशमंत्रियों को आमंत्रित किया था, लेकिन बैठक में सिर्फ 20 मुस्लिम देशों के विदेशमंत्री ही पहुंचे थे, वहीं पांच मुस्लिम देशों के विदेश मंत्री पाकिस्तान की बैठक में शामिल नहीं होकर भारत आ गये थे।

पाकिस्तान की खोली पोल

पाकिस्तान की खोली पोल

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय में आयोजित कार्यक्रम में बोलते हुए इमरान खान ने कहा कि, ''वो उस वक्त के पाकिस्तानी नीति निर्धारकों के करीब ही थी, जब यह फैसला किया जाना था, कि पाकिस्तान को आतंकवाद के खिलाफ युद्ध में शामिल होना चाहिए या नहीं''। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने कहा कि, ''और इसीलिए मैं इस बात से अच्छी तरह वाकिफ हूं, कि फैसले के पीछे क्या विचार थे। दुर्भाग्य से, पाकिस्तान के लोग इस पर ध्यान नहीं दे रहे थे।" सोवियत-अफगान युद्ध का जिक्र करते हुए इमरान खान कहा कि, "इसके बजाय हमारे विचार 1980 के दशक के समान ही थे, जब हमने अफगान जिहाद में भाग लिया था।"

''पाकिस्तान ने खुद को दिया जख्म''

''पाकिस्तान ने खुद को दिया जख्म''

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने आगे बोलते हुए कहा कि, अफगानिस्तान युद्ध में शामिल होकर पाकिस्तान ने खुद अपने ही शरीर पर घाव किए हैं। उन्होंने कहा कि, अफगानिस्तान युद्ध पाकिस्तान के लिए 'खुद का बनाया घाव' साबित हुआ है, हालांकि, "हम इस परिणाम के लिए किसी और को दोष नहीं दे सकते।" इमरान खान ने आगे कहा कि, "हम खुद जिम्मेदार हैं... जैसा कि हमने दूसरों को खुद को इस्तेमाल करने दिया, सहायता के लिए अपने देश की प्रतिष्ठा का त्याग किया और एक विदेश नीति बनाई या तैयार की गई, जो सार्वजनिक हित के खिलाफ गई, वो भी सिर्फ डॉलर्स के लिए"।

'सुधरी है पाकिस्तान की छवि'

'सुधरी है पाकिस्तान की छवि'

भाषण के दौरान इमरान खान ने अफगानिस्तान पर ओआईसी सत्र की मेजबानी करने के लिए पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय को बधाई दी और कहा कि, शिखर सम्मेलन के बाद जो प्रतिक्रिया मिल रही है, उससे पता चलता है कि पाकिस्तान की छवि विश्व स्तर पर सुधरी है। उन्होंने 41 सालों के बाद पाकिस्तान में ओआईसी सम्मेलन कराने के लिए पाकिस्तान विदेश मंत्रालय की सराहना की। इमरान खान ने कहा कि, ''अफगानिस्तान पर मुस्लिम देशों का रूख सार्वभौमिक है, जबकि यूरोपीयन देशों से जो बयान आ रहे हैं, वो हमारे साथ खड़े दिख रहे हैं''।

अमेरिका की जमकर निंदा

अमेरिका की जमकर निंदा

इसके साथ ही पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने बैठक के दौरान अफगानिस्तान की मौजूदा हालात के लिए अमेरिका की जमकर निंदा की है। उन्होंने अफगानिस्तान संकट के लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि, अमेरिका की वजह से अफगानिस्तान के लाखों लोग प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि, "यह जानते हुए भी कि यह (अफगानिस्तान के) खाते (अमेरिका में) फ्रीज हो गए हैं और उनकी बैंकिंग प्रणाली में लिक्विडिटी डाल दी गई है, इसे टाला जा सकता है।" इमरान खान ने आगे कहा कि, ''अफगानिस्तान में तालिबान के सत्ता में लौटने के बाद अमेरिकी प्रतिबंधों और अफगान संपत्तियों को फ्रीज करने के परिणामस्वरूप आर्थिक संकट से फंसे और दशकों के संघर्ष के कारण अफगानिस्तान में मानवीय संकट बढ़ गया है।''

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