Petro-Diesel Price Hike: 81% से ज्यादा महंगा हुआ डीजल, पेट्रोल भी लगा रहा आग, देखें कहां कितना महंगा हुआ तेल
Petro-Diesel Price Hike: एक महीने से ऊपर हो चुका है लेकिन अमेरिका-ईरान का युद्ध थमने का नाम नहीं ले रहा है। इसकी वजह से पूरी दुनिया में जियो पॉलिटकल तनाव भी चरम पर है। इस युद्ध का असर अब सिर्फ मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पाकिस्तान, बांग्लादेश और , फिलीपींस, श्रीलंका जैसे देशों में तेल और गैस की भारी किल्लत देखने को मिल रही है। इससे ग्लोबल एनर्जी मार्केट पर गहरा असर पड़ा है। यहां तक की पेट्रोल-डीजल और गैस के दाम आसमान भेदकर बाहर जा चुके हैं।
क्या भाव पहुंचे तेल के दाम?
ग्लोबल फ्यूल मार्केट इस समय भारी उथल-पुथल में है। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 116 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई, जबकि 30 मार्च को यह 115.30 डॉलर प्रति बैरल दर्ज की गई। इसका सीधा असर पेट्रोल और डीजल जैसी चीजों पर पड़ा, जिनकी कीमतों में जबरदस्त बढ़ोतरी देखने को मिली।

एक्सपर्ट ने बताया कितना बढ़ा डीजल
आईबीसी ग्रुप के सीईओ Mario Nawfal ने एक्स पर पोस्ट करके बताया कि युद्ध शुरू होने के बाद डीजल की कीमतों में तेज उछाल आया है। उनके मुताबिक एशिया, यूरोप और बाकी क्षेत्रों में कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी हुई है, जिससे खासतौर पर ईरानी और खाड़ी देशों से इम्पोर्ट पर निर्भर देशों पर भारी दबाव पड़ा है।
एशिया में सबसे ज्यादा असर
एशियाई देशों में फिलीपींस में सबसे ज्यादा असर देखा गया, जहां डीजल की कीमतें 81.6% तक बढ़ गईं। इसके बाद मलेशिया (57.9%), वियतनाम (45.9%), सिंगापुर (44%), चीन (25.4%), दक्षिण कोरिया (15.1%) और जापान (14%) में भी कीमतें तेजी से बढ़ीं। जिससे इन देशों में अचानक महंगाई भी बढ़ने लगी है।

पाकिस्तान में मच रहा हाहाकार
विकासशील देशों में हालात और ज्यादा खराब हैं। नाइजीरिया में डीजल की कीमत 78.3% बढ़ गई, जबकि श्रीलंका में 37.2% की बढ़ोतरी हुई। पाकिस्तान जैसे देशों में रिकॉर्ड उछाल आने से सप्लाई चेन टूटने से तेल और गैस की भारी कमी हो रही है, जिससे आम लोगों की जिंदगी मुश्किल हो गई है।
अमेरिका में भी मची घबराहट
यह संकट सिर्फ गरीब देशों तक सीमित नहीं है। अमेरिका में डीजल की कीमत करीब 41.2% तक बढ़ी है, जबकि कनाडा में 36.9% की बढ़ोतरी हुई। यूरोप में भी जर्मनी (+30.9%), फ्रांस (+27.8%), ब्रिटेन (+18%), इटली (+14.9%) और यूक्रेन (+33.9%) में कीमतों में उछाल दर्ज किया गया है।
ग्लोबल इकोनॉमी पर बड़ा खतरा
2026 के इस ईरान युद्ध ने दुनिया के कई हिस्सों को प्रभावित किया है। खासतौर पर Strait of Hormuz जैसे अहम सप्लाई रूट्स पर खतरे ने हालात और गंभीर बना दिए हैं। बढ़ती ईंधन कीमतों की वजह से ग्लोबल महंगाई बढ़ रही है और ट्रांसपोर्ट, लॉजिस्टिक्स और विकासशील देशों की अर्थव्यवस्था सबसे ज्यादा प्रभावित हो रही है।
ईरान ने कैसे दबाई दुनिया की नस?
दरअसल 28 फरवरी 2026 को जब इस युद्ध की शुरुआत हुई, तब ही ईरान को पता था कि वह अमेरिका से सीधे टक्कर नहीं ले सकता। लिहाजा उसने कमजोरी पकड़ी और अमेरिकी-इजरायली हमलों के जवाब में अमेरिकी मिलिट्री बेस पर बम बरसाए। इसके बाद Strait of Hormuz को बंद किए जाने का खतरा पैदा हो गया और उन तेल टैंकरों पर भी हमले किए जो अमेरिका समर्थक देशों के थे। जिससे पूरा रूट ब्लॉक हो गया और इससे दुनिया भर में कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित हुई और कीमतें तेजी से बढ़ गईं।
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