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आज रात से आसमान में दिखेगा कुदरत की आतिशबाजी का शानदार नजारा, होगी सितारों की बारिश

नई दिल्ली, 16 जुलाई। अगर आप भी उन लोगों में से हैं जो आसमान में टूटता तारा देख अपनी आंख बंद कर मन्नतों (विश) का झोला खोल लेते हैं, तो आने वाले कुछ दिन आपकी 'मांगे' कम पड़ सकती हैं लेकिन तारे टूटने का सिलसिला नहीं खत्म होगा। जी हां, आसमान में टूटा तारा देखना किसे पसंद नहीं होता, कोई इसे गुडलक मान अपनी विश भगवान तक पहुंचाता है, तो कोई इसके पीछे की साइंस का पता लगाने के लिए रिसर्च करता है।

आसमान में होगी उल्काओं की बारिश

आसमान में होगी उल्काओं की बारिश

हालांकि जिसे हम बचपन से टूटा हुआ तारा मानते आए हैं वो दरअसल, छोटे-छोटो उल्कापिंड होते हैं जो हमारी पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश कर आग का गोला बन जाते हैं। यही चमकती हुई चीज हमें आसमान में किसी टूटे हुए तारे की तरह प्रतीत होती है। आपको जानकर हैरानी होगी की आज रात से आने वाले कुछ दिनों तक आपको लगातार आसमान में ऐसे विचित्र घटना रोज देखने को मिल सकती है।

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    स्काईवॉचर्स के लिए बेहद खास पल

    स्काईवॉचर्स के लिए बेहद खास पल

    आज की रात स्काईवॉचर्स के लिए बेहद खास इसलिए हैं क्योंकि ये साल के सर्वश्रेष्ठ उल्का बौछार की शुरुआत का दिन है। जी हां आज रात यानी 16 जुलाई से पर्सिड्स उल्का बौछार (Perseid Meteor Shower) शुरू होने वाली है, इस दौरान आपको 24 अगस्त, 2021 तक आसमान में प्रकृति की आतिशबाजी का शानदार नजारा देखने को मिलेगा। वैज्ञानिकों के मुताबिक ओरियोनिड उल्कापिंडो की बैछार आज से शुरू हो जाएगी।

    क्या होता है 'पर्सिड्स उल्का बौछार'

    क्या होता है 'पर्सिड्स उल्का बौछार'

    'पर्सिड्स उल्का बौछार' के दौरान अंतरिक्ष में मौजूद धूल के कण से लेकर एक छोटे-छोटे पत्थर के बराबर उल्कापिंड धरती के वायुमंडल में प्रवेश करेंगे और जमीन को छूने से पहले ही आसमान में जलकर खाक हो जाएंगे। धूल, पत्थर और बर्फ से बने ये टुकड़े वायुमंडल से घर्षण के कारण आग के गोलों में बदल जाएंगे, जो हमें नंगी आंखों से टूटे हुए तारों की तरह दिखाई देंगे। इनकी तेज रोशनी जरूर आपका ध्यान खींचेगी।

    आज रात 10 बजे से शुरू हो सकता है शो

    आज रात 10 बजे से शुरू हो सकता है शो

    नासा के वैज्ञानिकों के मुताबिक आज से एक सप्ताह तक उत्तरी गोलार्ध से पूरे आकाश में उल्का बौछार देखी जा सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि आकाश में इन अद्भुत आग के गोले को देखने का सबसे अच्छा समय सुबह का होगा, लेकिन ये शो रात 10 बजे से शुरू हो सकता है। जो उल्का बौछार को पहली बार देखने की तैयारी कर रहे हैं उन्हें इसे देखने के लिए दूरबीन या लेंस की आवश्यकता नहीं होगी।

    24 अगस्त तक चलेगा शो

    24 अगस्त तक चलेगा शो

    इस अद्भुत पल को आप अपने फोन में भी रिकॉर्ड कर सकते हैं, लेकिन इसका असली मजा तभी है जब आप सिर्फ इसे अपनी आंखों से देखें। 'पर्सिड्स उल्का बौछार' के समय उल्काएं लगभग 59 किलोमीटर प्रति सेकंड की गति से पृथ्वी के वायुमंडल को भेदती हैं, इसलिए वह अपने पीछे एक लंबी रोशनी की लकीर छोड़ेंगी जिसे देर तक देखा जा सकता है। नासा के अनुसार उल्का शो 24 अगस्त तक चलेगा और अगस्त के मध्य में चरम पर होगा।

    कहां से आते हैं ये छोटे उल्कापिंड?

    कहां से आते हैं ये छोटे उल्कापिंड?

    वैज्ञानिकों ने बताया कि उल्का बैछार जब अपने पीक पर होगा तो उस दौरान एक घंटे में 100 से अधिक उल्काओं को आकाश में रोशनी फैलाते देखा जा सकता है। आपको बता दें कि पर्सिड्स कोई ऐस्टरॉइड नहीं बल्कि स्विफ्ट-टटल नामक धूमकेतु से निकले उल्कापिंड हैं। ये धूमकेतु 133 साल में सूर्य का एक चक्कर पूरा करता है, इससे निकले उल्कापिंड बेहद चमकीले फायर बॉल जैसे होते हैं। ये उल्का बौछार हर साल एक निश्चित समय पर ही होती है।

    यह भी पढ़ें: नासा ने शेयर की मंगल ग्रह के चांद की तस्वीर, लिखा, आप इसे आलू कहते हैं, हम 'Mars Moon'

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