भारत-चीन को सीमा पर शांति भंग नहीं करना चाहिए: मनमोहन सिंह

उन्होंने कहा कि इसके साथ ही हमें सीमा विवाद को सुलझाने के लिए जल्द काम करना चाहिए। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि उन्हें आधारभूत संरचना, उत्पादन और आतंकवाद विरुद्ध अभियान सहित आठ क्षेत्रों में दोनों देशों के सहयोग का अवसर दिखा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि सहयोग का लाभ किसी भी नियंत्रण के अनुमानित लाभ से कहीं अधिक है। इसलिए, हमें एक दूसरे के साथ समानता, मित्रता और साथ ही इस विश्वास के साथ काम करना चाहिए कि दोनों देश एक-दूसरे के लिए खतरा नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि चीन के साथ स्थिरता भरे संबंधों की वजह से दोनों देशों के लिए उनके द्वारा किए गए आर्थिक विकास के अवसर के दोहन की परिस्थितियां तैयार हुई हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि चीन भारत का सबसे बड़ा आर्थिक साझीदार बनकर उभरा है। लेकिन दोनों के बीच चिंताएं है, चाहे वे सीमावर्ती इलाके की घटनाएं हों या सीमा पार नदियों एवं व्यापार असंतुलन का मसला रहा हो।
उन्होंने कहा कि उनके अनुभवों ने यह दिखाया है कि इस तरह के मसले द्विपक्षीय या बहुपक्षीय सहयोग के अवसरों के पूर्ण दोहन में अवरोध बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि वह मानते हैं कि वचनबद्धता के सात व्यावहारिक सिद्धांत सहयोग को बढ़ाने की संभावना को पाने में उनकी मदद कर सकते हैं। जिसमें पारस्परिक आदर, एक दूसरे के हित, संप्रभुता और पारस्परिक व समान सुरक्षा को महत्व देना, सीमा पर शांति को बरकरार रखना, सीमा पार नदियों और व्यापार असंतुलन जैसे जटिल मसलों पर विचार-विमर्श को बढ़ाना शामिल है।
इसके अलावा इसमें क्षेत्रीय मसले पर निष्पक्ष रवैये के साथ उच्च स्तरीय रणनीतिक संचार और विचार-विमर्श जैसे विषय भी शामिल हैं। मनमोहन सिंह ने कहा कि टैन्ग्राम (चीनी पहेली) के खूबसूरत सिद्धांत की तरह आने वाले वर्षो में हम साथ मिलकर भारत-चीन संबधों की खूबसूरत टेपेस्ट्री तैयार करेंगे। मनमोहन सिंह ने कहा कि वह सीमा पर शांति स्थापित करने और सीमा पार नदियों के मसले पर हुए महत्वपूर्ण समझौते से खुश हैं।












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