Papua New Guinea: शहर भर में पोस्टर्स, 19 तोपों की सलामी.. PM मोदी के स्वागत के लिए बेकरार पापुआ न्यू गिनी
प्रशांत द्वीपों के साथ संस्थागत संबंधों को बढ़ाने के लिए, भारत ने 2014 में FIPIC की शुरुआत की थी। यह क्षेत्र-व्यापी संवाद प्राथमिक मंच के रूप में कार्य करता है, जिसके माध्यम से भारत प्रशांत द्वीप के साथ जुड़ता है।

PM Modi Papua New Guinea Visit: भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जब पापुआ न्यू गिनी की धरती पर कदम रखेंगे, तो वो पहले ऐसे भारतीय प्रधानमंत्री बन जाएंगे, जो प्रशांत क्षेत्र में स्थिति इस सबसे बड़े देश का दौरा करेगा।
इससे पहले भारत के किसी भी प्रधानमंत्री ने पापुआ न्यू गिनी का दौरा नहीं किया है। हालांकि, भारत के राष्ट्रपति इस देश में आते रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की स्वागत के लिए राजधानी पोर्ट मोरेस्बी को सजाया गया है और जगह जगह बैनर्स लगाए गये हैं, जिनमें पीएम मोदी का स्वागत किया जा रहा है। पापुआ न्यू गिनी की मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, देश की सरकार सुनिश्चित कर रही है, कि पीएम मोदी का, वास्तविक पापुआ न्यू गिनी शैली में स्वागत किया जाए।
पापुआ न्यू गिनी दौरे पर पीएम मोदी
रिपोर्ट के मुताबिक, जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पापुआ न्यू गिनी में उतरेंगे, उस वक्त पापुआ न्यू गिनी के प्रधानमंत्री जेम्स मारापे खुद एयरपोर्ट पर उनके स्वागत के लिए मौजूद रहेंगे।
पीएम मोदी के स्वागत के लिए पापुआ न्यू गिनी अपनी सालों से चली आ रही परंपरा को तोड़ने वाला है। पापुआ न्यू गिनी में परंपरा है, कि शाम के बाद घर में किसी मेहमान का स्वागत नहीं किया जाता है, लेकिन पीएम मोदी के स्वागत के लिए इस परंपरा को तोड़ा जाएगा।
आम तौर पर पापुआ न्यू गिनी सूर्यास्त के बाद आने वाले किसी भी नेता का औपचारिक स्वागत नहीं करता है। लेकिन पीएम मोदी के लिए एक विशेष उदाहरण बनाया जा रहा है, और पूरी तरह से उनका औपचारिक स्वागत किया जाएगा।
पापुआ न्यू गिनी की मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब प्रधानमंत्री एयरपोर्ट पर उतरेंगे, उस वक्त उन्हें 19 तोपों की सलामी दी जाएगी।
प्रधानमंत्री मोदी दूसरी बार प्रशांत क्षेत्र का दौरा कर रहे हैं, इससे पहले वो 2014 में फिजी गये थे, जबकि उनसे पहले इंदिरा गांधी 1981 में फिजी गई थीं, लिहाजा भारत अब प्रशांत क्षेत्र में नये सिरे से कदम जमाने की कोशिश कर रहा है। पीएम मोदी की पापुआ न्यू गिनी की यात्रा के साथ ही, प्रशांत क्षेत्र में भारत की नई विदेश नीति का आगाज भी हो रहा है।
संसाधनों से संपन्न देश है पापुआ न्यू गिनी
पापुआ न्यू गिनी (पीएनजी) न केवल एक संसाधन-संपन्न देश है, बल्कि इस देश की धरती के नीचे लगभग 23 मिलियन औंस सोना, 500 मिलियन बैरल तेल और 35 ट्रिलियन क्यूबिक फीट प्राकृतिक गैस का भारी भंडार का छिपा हुआ है।
लिहाजा, यह भारत के लिए इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भी रणनीतिक रूप से महत्व रखने वाला देश है।
पिछले कुछ वर्षों में, स्ट्रैटजिक जल क्षेत्र में बहुत अशांति देखी गई है, क्योंकि चीन ने अपने विवादास्पद बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) के दक्षिणवर्ती विस्तार के माध्यम से, विशेष रूप से सोलोमन द्वीप समूह में अपना प्रभाव तेजी से बढ़ाया है। सोलोमन द्वीप में चीन ने अपनै सैन्य बंदरगाह भी बनाया है, जिससे भारत और अमेरिका के रणनीतिक हित गंभीर तौर पर प्रभावित हो रहे हैं, लिहाजा पापुआ न्यू गिनी से चीन को उसी की भाषा में जवाब दिया जा सकता है।

FIPIC शिखर सम्मेलन का आयोजन
प्रधानमंत्री मोदी के दौरे को लेकर FIPIC शिखर सम्मेलन का आयोजन किया गया है, जिसमें प्रशांत द्वीप क्षेत्र के 14 देशों के राष्ट्राध्यक्ष हिस्सा लेंगे।
प्रशांत क्षेत्र के 14 देशों के प्रमुखों का एक साथ जुटना अपने आप में दुर्लभ बात है, लेकिन भारत-पापुआ न्यू गिनी के इस कार्यक्रम में कई मुद्दों पर बात की जाएगी। FIPIC का ये तीसरा शिखर सम्मेलन होने जा रहा है, और इस कार्यक्रम के जरिए, पीएम मोदी, प्रशांत द्वीप फोरम के अन्य नेताओं से मिलेंगे, जिसने एक्ट ईस्ट नीति के विकास के साथ क्षेत्र के देशों के साथ भारत के संबंधों को गहरा किया है।
प्रधानमंत्री मोदी का पापुआ न्यू गिनी के दौरे को लेकर विदेशी एक्सपर्ट्स का कहना है, कि विश्वगुरू बनने की दिशा में भारत ने अपना कदम बढ़ा दिया है और अब भारत प्रशांत क्षेत्र में अपनी शक्ति का प्रदर्शन करने के लिए तैयार हो सकता है। हालांकि, ये इतना आसान नहीं है, लेकिन हां, इस तरह कदम तो बढ़ा दिया ही गया है।
पीएम मोदी की यात्रा से पहले मारापे ने कहा, कि "भारत एक विशाल देश है और एक वैश्विक आर्थिक महाशक्ति है और यह पीएनजी के लिए अच्छा है, कि हमारे उनके साथ अच्छे संबंध हैं। भारत वर्तमान में दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, जो आगे और भी बड़ा होता जाएगा।"
किन समझौतों के होने की है संभावना
पापुआ न्यू गिनी में भारतीय समुदाय के लोग भी रहते हैं और पीएम मोदी का पोर्ट मोरेस्बी में भारतीय समुदाय के सदस्यों से मिलने का कार्यक्रम है। पीएनजी में भारतीय डायस्पोरा के लगभग 3,000 सदस्य द्वीप राष्ट्र की अर्थव्यवस्था और समाज में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
वहीं, पीएम मोदी की यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच माइक्रो स्मॉल टू मीडियम एंटरप्राइजेज (MSMEs) में सहयोग पर समझौता ज्ञापन (MOU) होने की संभावना है।
इसके अलावा, विदेशी कार्यालय परामर्श पर, दोनों देशों के चुनाव आयोगों के बीच समझौता हो सकता है। वहीं, प्रसार भारती और नेशनल ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन PNG के बीच भी समझौता होने की संभावना है। इसके अलावा, भारत और पापुआ न्यू गिनी के बीच पारस्परिक वीज़ा-ऑन-अराइवल व्यवस्था भी किए जाने की संभावना है। इसके साथ ही, राजनयिक और आधिकारिक पासपोर्ट धारकों के लिए वीज़ा छूट समझौता, सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम (सीईपी) को लेकर भी समझौते किए जाने की संभावना है।
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रिपोर्ट के मुताबिक, फोरम फॉर इंडिया-पैसिफिक आइलैंड्स कोऑपरेशन (FIPIC) शिखर सम्मेलन के अलावा, प्रधानमंत्री मोदी पैसिफिक आईलैंड फोरम के नेताओं से भी मुलाकात करेंगे। पैसिफिक आईलैंड फोरम कार्यक्रम में 19 प्रशांत द्वीप देश के नेता जुटेंगे, जिनमें ऑस्ट्रेलिया, कुक आइलैंड्स, फेडरेटेड स्टेट्स ऑफ माइक्रोनेशिया, फिजी, फ्रेंच पोलिनेशिया, किरिबाती, नाउरू, न्यू कैलेडोनिया, न्यूजीलैंड, नीयू, पलाऊ, पापुआ न्यू गिनी, रिपब्लिक ऑफ मार्शल आइलैंड्स, समोआ, सोलोमन आइलैंड्स, टोंगा, तुवालु और वानुअतु के नेता शामिल हैं, वो पैसिफिक आइलैंड फोरम में भाग लेंगे।












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