कनाडा के बाद अमेरिका का एक और विश्वासघात? चुपचाप PoK पहुंचे पाकिस्तान में अमेरिका के राजदूत, क्यों?
US envoy's visit to Gilgit Baltistan: खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या को लेकर धीरे धीरे कनाडा के बगल में खड़े होने वाले अमेरिका ने भारत के साथ एक और विश्वासघात किया है और इस बार पाकिस्तान में अमेरिका के राजदूत डेविड ब्लोम ने चुपचाप पीओके यानि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर का दौरा किया है।
डेविड ब्लोम ने पिछले साल भी पीओके का दौरा किया था और पाकिस्तानी भाषा बोलते हुए, पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर को 'आजाद कश्मीर' कहकर संबोधित किया था, जो पाकिस्तानी बोलते हैं, जिसका भारत ने काफी कड़ा विरोध किया था। लेकिन, इस बार फिर से डेविड ब्लोम ने वही पुरानी हरकत की है, जिसके बाद सवाल उठ रहे हैं, कि आखिर जो बाइडेन, भारत के खिलाफ कौन सी खिचड़ी पका रहे हैं।

अमेरिकी राजदूत का पीओके दौरा
भारत में अमेरिकी राजदूत एरिक गार्सेटी ने मंगलवार को कहा, कि पाकिस्तान में अमेरिकी राजदूत डोनाल्ड ब्लोम की गिलगित-बाल्टिस्तान यात्रा एक ऐसा मामला है, जिसे "भारत और पाकिस्तान के बीच हल किया जाना चाहिए, न कि अमेरिका सहित किसी तीसरे पक्ष द्वारा।"
डॉन के अनुसार, पाकिस्तान में अमेरिकी राजदूत डोनाल्ड ब्लोम ने हाल ही में गिलगित-बाल्टिस्तान की छह दिवसीय यात्रा की थी, इस दौरान उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों का दौरा किया था और स्थानीय प्रतिनिधियों और गिलगित-बाल्टिस्तान सरकार के अधिकारियों से मुलाकात की थी।
पाकिस्तान स्थित समाचार दैनिक डॉन के मुताबिक, अमेरिकी राजदूत के पीओके दौरे को दूतावास और स्थानीय सरकार दोनों ने गुप्त रखा था, और यात्रा के बारे में कोई विवरण मीडिया को उपलब्ध नहीं कराया गया था। अमेरिकी राजदूत की यात्रा के बारे में एकमात्र आधिकारिक जानकारी, गिलगित बाल्टिस्तान के डिप्टी स्पीकर के कार्यालय द्वारा जारी एक बयान में दी गई।
ब्लोम ने गिलगित में खाद्य एवं पर्यटन मंत्री गुलाम मुहम्मद से भी मुलाकात की थी।
जिसको लेकर भारत में अमेरिकी राजदूत गार्सेटी ने कहा, कि "पाकिस्तान में अमेरिकी राजदूत पर प्रतिक्रिया देना मेरा काम नहीं है, लेकिन मुझे पता है, कि वह पहले भी आ चुके हैं और जाहिर तौर पर जी20 के दौरान हमारे प्रतिनिधिमंडल के कुछ सदस्य जम्मू-कश्मीर में भी रहे हैं।"
उन्होंने कहा, कि ''हम जुड़े रहेंगे लेकिन यह कुछ ऐसा होना चाहिए, जो भारत और पाकिस्तान के बीच हल हो, न कि अमेरिका सहित किसी तीसरे पक्ष द्वारा।''
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन की भारत यात्रा पर बोलते हुए उन्होंने कहा, "भारत की तरफ से निमंत्रण मिला है, लेकिन अभी कार्यक्रम की पुष्टि नहीं हुई है।"
वहीं, डॉन न्यूज के अनुसार, ब्लोम ने गिलगित बाल्टिस्तान की अपनी यात्रा से कुछ दिन पहले बंदरगाह शहर ग्वादर का भी दौरा किया था, जहां चीन सीपीईसी के हिस्से के रूप में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को क्रियान्वित कर रहा है।
हालांकि, गिलगित-बाल्टिस्तान में विपक्षी नेता काज़िम मेसुम ने ब्लोम की गिलगित-बाल्टिस्तान यात्रा पर सवाल उठाया है।
डॉन के अनुसार, गिलगित-बाल्टिस्तान विधानसभा के विपक्षी नेता काज़िम मेसुम ने शुक्रवार को कहा, कि क्षेत्र में अमेरिकी राजदूत की "रहस्यमय गतिविधियों" ने सवाल उठाए हैं, उन्होंने कहा कि जीबी सरकार को इस यात्रा के बारे में पता नहीं था।
उन्होंने कहा, "किसी भी देश के राजदूत के लिए इस क्षेत्र का दौरा करने की एक निर्धारित प्रक्रिया है," उन्होंने ग्वादर की यात्रा के बाद ब्लोम के गिलगित आगमन को "संदिग्ध" बताया है।
विपक्षी नेता ने कहा, कि सीपीईसी के दो सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों का दौरा "अमेरिका की सीपीईसी रोकथाम नीति" का हिस्सा था। डॉन न्यूज ने मेसुम के हवाले से कहा, कि "राजदूत ने उन क्षेत्रों का दौरा किया, जहां से सीपीईसी मार्ग गुजरेगा।"












Click it and Unblock the Notifications