भारत सुपरपावर बनना चाहता है, हम भीख मांगते रहते हैं... जिहाद की 'फैक्ट्री' चलाने वाले PAK नेता को आई अक्ल?

India-Pakistan News: जिहाद की फैक्ट्री चलाने वाले पाकिस्तान के जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम पाकिस्तान (फजल) के कट्टरपंथी नेता मौलाना फजलुर रहमान ने भारत का हवाला देकर शहबाज शरीफ की सरकार और देश की सबसे ज्यादा ताकवर सेना पर हमला बोला है।

फजलुर रहमान ने इमरान खान की पार्टी की रैलियों पर रोक और इलेक्शन में धांधली का आरोप लगाते हुए कहा है, कि भारत का लक्ष्य सुपरपावर बनने की है, जबकि पाकिस्तान बेलऑउट पैकेज के लिए भीख मांगता रहता है।

Maulana Fazlur Rehman on india pakistan

फजलुर रहमान को आई अक्ल?

नेशनल असेंबली में अपने उद्घाटन भाषण के दौरान एक पाकिस्तान की सेना पर जोरदार हमला बोलते हुए जेयूआई-एफ प्रमुख ने देश की दुर्दशा के लिए, पर्दे के पीछे से फैसले लेने वाली अदृश्य ताकतों को जिम्मेदार ठहराया, जिससे निर्वाचित अधिकारी महज कठपुतली बनकर रह गए।

उन्होंने दावा किया, कि "दीवारों के पीछे कुछ शक्तियां हैं, जो हमें नियंत्रित कर रही हैं और वे निर्णय लेती हैं जबकि हम सिर्फ कठपुतली हैं।'' उन्होंने संसद पर सिद्धांतों को त्यागने और "लोकतंत्र को बेचने" का भी आरोप लगाया है।

उन्होंने कहा, कि "रैली करना पीटीआई का अधिकार है। हमने 2018 के चुनाव पर भी आपत्ति जताई थी, और हमें इस (8 फरवरी के चुनाव) पर भी आपत्ति है। अगर 2018 के चुनाव में धांधली हुई थी, तो मौजूदा चुनाव में धांधली क्यों नहीं हुई?" रहमान ने पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के गठबंधन से पीटीआई को सरकार बनाने की अनुमति देने का आग्रह किया, क्योंकि इमरान खान की पीटीआई ने चुनाव में सबसे ज्यादा सीटें हासिल की हैं।

'दिवालिएपन से बचने के लिए भीख मांगता है पाकिस्तान'

आपको बता दें, कि फजलुर रहमान वो कट्टरपंथी नेता हैं, जो पाकिस्तान में सैकड़ों मदरसे चलाते हैं और तालिबान के तमाम बड़े लीडर उन्हीं के मदरसे में पढ़े हैं। और फजलुर रहमान वही नेता हैं, जिन्होंने इमरान खान की सरकार के दौरान शहबाज शरीफ की पार्टी पीएमएल-एन और बिलावल भुट्टो की पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) के साथ मिलकर महागठबंधन का गठन किया था और देश में दर्जनों विरोध प्रदर्शन किए थे।

फजलुर रहमान को पाकिस्तान की शातिर खुफिया एजेंसी आईएसआई का कठपुतली माना जाता है और जहां जहां आईएसआई को सरकार पर प्रेशर बनाना होता है, फजलुर रहमान उसी वक्त सरकार के खिलाफ रैलियां शुरू कर देते हैं।

लेकिन, इस बार संसद में बोलेत हुए इसके बाद मौलवी फजलुर रहमान ने चुनाव और देश को चलाने में सत्ता प्रतिष्ठान (पाकिस्तान सेना) और नौकरशाही की भूमिका पर निराशा व्यक्त करते हुए कहा, कि 8 फरवरी को हुए चुनाव में धांधली की गई है। उन्होंने इस्लामिक सिद्धांतों को बनाए रखने के महत्व पर जोर देते हुए काउंसिल ऑफ इस्लामिक आइडियोलॉजी (सीआईआई) की सिफारिशों को लागू करने में नाकामी पर भी अफसोस जताया।

उन्होंने एक बार फिर से इस्लामी कार्ड खेलते हुए कहा, कि "हमें देश इस्लाम के नाम पर मिला था, लेकिन आज हम एक धर्मनिरपेक्ष राज्य बन गए हैं। 1973 के बाद से सीआईआई की एक भी सिफारिश लागू नहीं की गई है। हम एक इस्लामी देश कैसे हो सकते हैं?"

फजलुर रहमान ने यह भी कहा, कि पाकिस्तान दिवालिया होने से बचने के लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से भीख मांग रहा है।

भारत से तुलना करते हुए जेयूआई-एफ के नेता रहमान ने कहा, "जरा भारत और हमारी तुलना करें... दोनों देशों को एक ही दिन आजादी मिली थी। लेकिन आज वे (भारत) महाशक्ति बनने का सपना देख रहे हैं और हम दिवालियापन से बचने के लिए भीख मांग रहे हैं। इसके लिए कौन जिम्मेदार है?"

फजलुर रहमान की राजनीति समझिए

फजलुर रहमान की जेयूआई-एफ, इमरान खान की पीटीआई का कट्टर प्रतिद्वंद्वी था और उसने इमरान खान को हटाने के लिए इस्लामाबाद का घेराव तक दिया था। इमरान खान की सरकार गिरने के बाद फजलुर रहमान शहबाज शरीफ की गठबंधन सरकार का हिस्सा बन गए। हालांकि, चुनाव के बाद उन्होंने पीएमएल-एन और पीपीपी से नाता तोड़ लिया और आरोप लगाया, कि उनकी पार्टी को सत्ता से बाहर रखने के लिए चुनावों में धांधली की गई है।

यह अनुमान लगाया गया है, कि फजलुर रहमान सेना और गठबंधन सरकार पर एक समझौते का प्रेशर बना रहे हैं, ताकि पाकिस्तान की सरकार में उन्हें एक बड़ा हिस्सा मिल सके।

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