कोर्ट ने पहले हिन्दू लड़की को किया किडनैपर्स के हवाले, फिर रोता देखकर जज ने बदला अपना फैसला

पीड़ित लड़की चंदा को पाकिस्तान में हैदराबाद के फतेह चौक इलाके से आरोपी शमन मैगसी और तीन अन्य लोगों ने 12 अगस्त को अगवा कर लिया था।

Pakistan Hindu Girl Chanda: कट्टरपंथी देश पाकिस्तान में हिन्दुओं को कोर्ट में भी इंसाफ नहीं मिलता है और पाकिस्तानी कोर्ट नाबालिग हिन्दुओं के मामले में अपहरणकर्ताओें का ही पक्ष लेती है। पाकिस्तान की एक अदालत ने 15 साल की एक हिन्दू लड़की के अपहरणकर्ताओं को बाइज्जत बरी करते हुए लड़की को वापस उन्हीं लोगों के हाथ में सौप दिया, जबकि कोर्ट में हिन्दू लड़की बार बार कह रही थी, कि वो अपने घर मां-बाप के पास जाना चाहती है और उसका अपहरण किया गया है। पीड़ित लड़की का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जो अदालती फैसला आने के बाद कोर्ट परिसर में अपने परिजनों के गले लगकर रो रही है। हालांकि, बाद में जाकर कोर्ट को अपना फैसला बदलने के लिए मजबूर भी होना पड़ा।

लड़की का हुआ था अपहरण

लड़की का हुआ था अपहरण

रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान में 15 साल की एक हिन्दू लड़की का चार मुसलमान युवकों ने अपहरण कर लिया था और फिर उसका जबरदस्ती धर्म परिवर्तन करवाकर उसकी शादी अपहरणकर्ता से कर दी गई। रिपोर्ट दर्ज होने के बाद भी एक महीने तक पुलिस ने मामले में कोई कार्रवाई नहीं की और इस दौरान हिन्दू लड़की के साथ जुल्म होता रहा। एक महीने के बाद हरकत में आई पुलिस ने करीब 2 महीने के बाद पीड़ित लड़को को बरामद किया और फिर उसे कोर्ट में पेश किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, गुरुवार को पाकिस्तानी अदालत ने नाबालिग पीड़ित लड़की को उसके मां-बाप के साथ जाने की इजाजत नहीं दी और उसे वापस अपहरणकर्ताओं को ही सौंप दिया। इस घटना के बाद फिर से पता चलता है, कि कैसे पाकिस्तान में अधिकारी देश के हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रहे अत्याचारों के प्रति चुप्पी साधे हुए हैं और कैसे पाकिस्तान की अदालतों में भी हिन्दुओं को इंसाफ नहीं मिलता है।

क्या था पूरा मामला?

क्या था पूरा मामला?

पीड़ित लड़की चंदा (बदला हुआ नाम) को पाकिस्तान में हैदराबाद के फतेह चौक इलाके से आरोपी शमन मैगसी और तीन अन्य लोगों ने 12 अगस्त को अगवा कर लिया था। इसके तुरंत बाद, लड़की के माता-पिता ने पास के पुलिस स्टेशन में संदिग्धों के खिलाफ जबरन धर्म परिवर्तन और अपहरण की शिकायत दर्ज कराई। पीड़ित परिवार ने कहा कि, "हम गरीब लोग हैं। यहां कोई हमारी मदद नहीं कर रहा है। मैं लगभग हर रोज पुलिस स्टेशन जाती हूं, लेकिन वे न तो हमारी मदद कर रहे हैं और न ही मेरी बेटी के बारे में कुछ कह रहे हैं"। रिपोर्ट के मुताबिक, पीड़ित लड़की अपनी दो बहनों के साथ कमाकर परिवार का पेट भरती है, क्योंकि उसके पिता शारीकित समस्याओं के चलते कमा नहीं सकते हैं। लड़की की मां ने कहा कि, "हमने एसएसपी कार्यालय का भी दौरा किया, लेकिन वहां भी हमें कोई मदद नहीं मिली।"

एक महीने तक FIR भी नहीं

एक महीने तक FIR भी नहीं

रिपोर्ट के मुताबिक, लड़की को 12 अगस्त को अगवा कर लिया गया था और पुलिस ने 17 सितंबर को जाकर एफआईआर दर्ज की थी। इतना ही नहीं, स्थानीय मीडिया ने भी इस मुद्दे को नहीं उठाया। वहीं, अपहरण की गई ब्राह्मण लड़की की कहानी दो महीने बाद लोगों तक पहुंचाई गई। जिसके बाद सामाजिक कार्यकर्ता शिवा काछी, जो पाकिस्तान दारावर इत्तेहाद के अध्यक्ष हैं, उन्होंने लोगों के साथ मिलकर 16 अक्टूबर को हैदराबाद में प्रदर्शन किया, जिसके बाद जाकर पुलिस ने पहला कदम उठाया। जिसके बाद पता चला, कि 30 अगस्त को ही लड़की का 'जबरन धर्म परिवर्तन और निकाह' करवा दिया। सबसे हैरान करने वाली बात ये है, कि निकाहनामे में लड़की की उम्र 19 साल बताई गई है। जबकि वो सिर्फ 15 साल की है। वहीं, गैंगरेप की बात से भी इनकार नहीं किया गया है। हिंन्दू मानवाधिकार कार्यकर्ता महेश वासु ने बताया कि, गुरुवार (19 अक्टूबर) को लड़की को कराची से छुड़ाया गया और उसे एक अनाथालय भेज दिया गया।

पीड़िता के खिलाफ कोर्ट का फैसला

पीड़िता के खिलाफ कोर्ट का फैसला

वहीं, पाकिस्तान की एक स्थानीय अदालत ने गुरुवार को नाबालिग लड़की को उसके माता-पिता के पास वापस जाने की अनुमति नहीं दी और अदालत ने उसे वापस "अपहरणकर्ता" को सौंप दिया। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में चंदा को अदालत के फैसले के बाद रोते और अपने माता-पिता को गले लगाते देखा जा सकता है। पाकिस्तान की कुल आबादी में मुसलमान 97 प्रतिशत हैं, जबकि हिंदू लगभग 2 प्रतिशत हैं, जिनमें से लगभग 90 प्रतिशत हिंदू-बहुल पड़ोसी भारत की सीमा से लगे सिंध प्रांत में रहते हैं। जबरन धर्मांतरण की घटनाएं पाकिस्तान में आम हैं और हिन्दू लड़कियों से होने वाले अत्याचार को लेकर पाकिस्तान में नेता चुप रहते हैं, जिनसे ऐसी घटनाओं को और बढ़ावा मिलता है। पाकिस्तान के नेताओं ने हिन्दुओं से होने वाले अत्याचारों को रोकने के लिए एक भी कदम नहीं उठाया है।

बाद में अदालत ने बदला अपना फैसला

वहीं, बाद में पीड़ित लड़की के रोने का वीडियो वायरल होने के बाद कोर्ट को अपना फैसला बदलने के लिए मजबूर होना पड़ा है, क्योंकि पाकिस्तान के कुछ तबकों से पीड़ित लड़की के लिए आवाजें उठनी शुरू हो गईं थीं। बताया जा रहा है कि, वीडियो वायरल होने के बाद जज ने अपना फैसला बदल लिया है और पीड़ित लड़की को अपने मां- बाप के साथ जाने की इजाजत दे दी है। रिपोर्ट में ये भी कहा गया है, कि जज ने अपने फैसला बदलते हुए जांच रिपोर्ट सौंपे जाने तक कथित आरोपी पति को लड़की या उसके घरवालों से किसी भी तरह का संपर्क स्थापित करने से रोक लगा दी है।

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