पाकिस्तान की केयरटेकर सरकार करेगी देश की 'इज्जत' का सौदा, चुनाव से ठीक पहले बेचेगी सरकारी एयरलाइंस
Pakistan airlines sale: पाकिस्तान की कार्यवाहक सरकार, जिसके कंधे पर देश में चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्षता से करवाने की जिम्मेदारी थी, उसने अपना काम करने की बजाए, देश की सरकारी एयरलाइंस कंपनी को ही बेचने का फैसला कर लिया है।
अधिकारियों के मुताबिक, पाकिस्तान का कार्यवाहक प्रशासन घाटे में चल रही पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस (पीआईए) को बेचने के लिए नई सरकार के लिए बाध्यकारी योजना बना रहा है। अतीत में, निर्वाचित सरकारें भी पाकिस्तानी एयरलाइंस को बेचने जैसा कदम उठाने से पहले कतराती रही हैं, क्योंकि पाकिस्तानी एयरलाइंस को सरकारों ने देश की इज्जत से जोड़कर रखा हुआ था।

पाकिस्तान की राजनीति में पाकिस्तानी एयरलाइन यानि पीआईए हमेशा से राजनीति के केन्द्र में रही है और हर दलों ने इसको लेकर राजनीति की है, लेकिन कोई भी सरकार पीआईए को घाटे से बाहर नहीं ला पाई।
लेकिन पाकिस्तान, जो बड़े पैमाने पर आर्थिक संकट का सामना कर रहा है, और पिछसे साल जून में अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के साथ 3 अरब डॉलर के बेलआउट समझौते के तहत घाटे में चल रहे राज्य के स्वामित्व वाले उद्यमों को खत्म करने पर सहमत हुआ था, उसने पाकिस्तानी एयरलाइंस को बेचने का फैसला कर लिया है।
पाकिस्तानी एयरलाइंस बेचने का फैसला
आईएमएफ समझौते पर हस्ताक्षर करने के कुछ ही हफ्तों बाद सरकार ने पीआईए का निजीकरण करने का फैसला किया है। कार्यवाहक प्रशासन, जिसने 8 फरवरी के चुनाव की देखरेख के लिए अगस्त में कार्यभार संभाला था, उसे निवर्तमान संसद द्वारा आईएमएफ के साथ सहमत बजटीय लक्ष्यों को पूरा करने के लिए आवश्यक कदम उठाने का अधिकार दिया गया था।
एयरलाइन को बेचने की योजना के बारे में पूछे जाने पर केयरटेकर सरकार के निजीकरण मंत्री फवाद हसन फवाद ने रॉयटर्स से कहा, कि "हमारा काम 98% पूरा हो गया है। और बाकी 2% काम कैबिनेट की मंजूरी के बाद इसे एक्सेल शीट पर लाना है।"
फवाद ने कहा, कि लेनदेन सलाहकार अर्न्स्ट एंड यंग द्वारा तैयार की गई योजना को चुनाव के बाद, प्रशासन का कार्यकाल समाप्त होने से पहले मंजूरी के लिए कैबिनेट में पेश किया जाएगा।
फवाद ने कहा, कैबिनेट यह भी तय करेगी, कि हिस्सेदारी निविदा के जरिए बेची जाए या सरकार-से-सरकारी सौदे के जरिए। फवाद ने कहा, "हमने केवल चार महीनों में जो किया है, वह पिछली सरकारें एक दशक से ज्यादा समय से करने की कोशिश कर रही थीं।" उन्होंने कहा, कि "पीछे मुड़कर नहीं देखा जा सकता।"
हालांकि, फिलहाल उन्होंने निजीकरण की प्रक्रिया क्या और कैसी होगी, इसकी जानकारी नहीं दी है।
दिवालिया होने के कगार पर पीआईए
पिछले साल जून तक पीआईए पर 785 अरब पाकिस्तानी रुपये (2.81 अरब डॉलर) की देनदारियां थीं और 713 अरब रुपये का घाटा था। पीआईए के सीईओ ने कहा है, कि 2023 में घाटा 112 अरब रुपये और ज्यादा बढ़ने की संभावना है।
यदि मौजूदा बेलआउट कार्यक्रम मार्च में समाप्त होने के बाद आने वाली सरकार आईएमएफ में वापस जाती है तो निजीकरण पर प्रगति एक प्रमुख मुद्दा होगी। कार्यवाहक वित्त मंत्री शमशाद अख्तर ने पिछले साल संवाददाताओं से कहा था., कि पाकिस्तान को आईएमएफ कार्यक्रमों में बने रहना होगा।
एयरलाइन कंपनी को बेचने की प्रक्रिया से जुड़े दो सूत्रों ने रॉयटर्स को बताया, कि अर्न्स्ट एंड यंग की 1,100 पेज की रिपोर्ट के तहत, एयरलाइन के ऋणों को एक अलग इकाई में चिह्नित करने के बाद पूर्ण प्रबंधन नियंत्रण के साथ 51% हिस्सेदारी, खरीदारों को पेश की जाएगी। पीआईए के प्रवक्ता अब्दुल्ला हफीज खान ने कहा, कि एयरलाइन निजीकरण प्रक्रिया में सहायता कर रही है और लेनदेन सलाहकार को "पूर्ण सहयोग" दे रही है।
हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है, कि पाकिस्तान सरकार भले ही पीआईए को बेचने की कोशिश करे, लेकिन सवाल ये हैं, कि उसे खरीदेगा कौन?
2023 के लिए एयरलाइन की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, पीआईए की भौतिक संपत्ति, जिसमें विमान, पेरिस और न्यूयॉर्क में होटल और अन्य संपत्तियां शामिल हैं, बुक वैल्यू के अनुसार 105.6 बिलियन रुपये ($ 375 मिलियन) हैं। हालांकि, पीआईए अधिकारियों ने कहा, परिसंपत्तियों का बाज़ार मूल्य एक अरब डॉलर से ज्यादा हो सकता है। उन्होंने कहा, किसी भी स्थिति में होटल और अन्य संपत्तियों की बिक्री नहीं होंगी।












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