J-31 Fighters: चीन से पाकिस्तान खरीदने वाला है J-31 फिफ्थ जेनरेशन जेट, क्या रेस में पिछड़ रहा है भारत?
China-Pakistan J-31 Fighters: पाकिस्तान वायु सेना के प्रमुख जहीर अहमद बाबर के हवाले से एक बयान में कहा गया है, कि शेनयांग जे-31 स्टील्थ लड़ाकू विमान खरीदने को लेकर पाकिस्तान और चीन के बीच नींव पहले ही रखी जा चुकी है और निकट भविष्य में पाकिस्तान, चीनी विमान को अपने बेड़े का हिस्सा बना लेगा।
जे-31 स्टील्थ लड़ाकू विमान, पाकिस्तान में अमेरिकी F-16 की जगह उड़ान भर सकता है, जिसका मतलब होगा, कि चीनी बास्केट में पाकिस्तान का फिर से गोता लगाना। इससे पहले पाकिस्तान ने दिसंबर 2021 में चीन को 25 J-10CE फाइटर जेट का ऑर्डर दिया था।

मार्च 2022 में, 6 J-10CE का पहला बैच मिन्हास (कामरा) एयरबेस पर PAF 15 स्क्वाड्रन में शामिल हुआ था। PAF पहले ही लगभग 150 चीन-पाक JF-17 थंडर विमान को अपने बेड़े में शामिल कर चुका है।
हालांकि, इस्लामाबाद जे-31 फाइटर जेट को चीन से खरीदने का इरादा रखता है, लेकिन कई लोग पूछ रहे हैं, कि पैसा कहां है? और पाकिस्तान ने तुर्की एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज (टीएआई) के साथ फाइटर जेट (KAAN डील) के लिए जो हामी भरी है, जिसके तहत तुर्की ने कहा है, कि वो पाकिस्तान के साथ मिलकर पाकिस्तान में पांचवी पीढ़ी का लड़ाकू विमान बनाएगा, फिर उस डील का क्या होगा?
J-31 Platform का डेलवपमेंट्स
चीनी शेनयांग जे-31 गिर्फ़ाल्कन, जिसे शेनयांग एयरक्राफ्ट कॉरपोरेशन (एसएसी) बना रहा है, वो एक प्रोटोटाइप मध्यम आकार का डबल इंजन, सिंगल सीट वाला 5वीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान है।
चीन के वायुसेना में पहले से शामिल चेंगदू जे-20 स्टील्थ फाइटर जेट के विपरीत, जे-31 को एसएसी की आंतरिक फंडिंग के माध्यम से विकसित किया गया था, लेकिन उस वक्त दुनिया को हैरानी हुई, जब इसे पीपुल्स लिबरेशन आर्मी एयर फोर्स (पीएलएएएफ) ने ना ही फंड दिया और ना ही इसे अपने बेड़े में शामिल किया।
कई रिपोर्ट्स में कहा गया है, कि J-31 फाइटर जेट को चीन की वायुसेना ने रिजेक्ट कर दिया है और उसकी जगह पर जे-20 की संख्या को ही अपने बेड़े में बढ़ाने का फैसला लिया है।
J-31 की तस्वीरें पहली बार जून 2012 में इंटरनेट पर सामने आईं। बाद में कथित तौर पर इस विमान को सितंबर 2012 में एक हवाई क्षेत्र में खड़ा देखा गया था। बाद में J-31 का 1⁄4-स्केल मॉडल चीन इंटरनेशनल एविएशन एंड एयरोस्पेस प्रदर्शनी में दिखाया गया था।
31 अक्टूबर 2012 को J-31 के प्रोटोटाइप नंबर 31001 ने अपनी पहली उड़ान भरी। और इसके उड़ान के बाद अमेरिका के बाद चीन, दुनिया दूसरा देश बन गया, जिसके पास एक ही समय में परीक्षण के तहत दो स्टील्थ लड़ाकू विमान हैं। चीनी विमानन विशेषज्ञ जू योंगलिंग ने J-31 को उन देशों के लिए एक विकल्प बताया, जो नवीनतम पीढ़ी का युद्धक विमान F-35 नहीं खरीद सकते।
J-31 फाइटर जेट को लेकर भारी सस्पेंस
J-31 एयरफ्रेम का सार्वजनिक रूप से 12 नवंबर 2014 को झुहाई एयरशो में अनावरण किया गया था। इसने एक हवाई प्रदर्शन किया। अधिकांश विश्लेषकों का मानना था, कि इस प्रदर्शन ने इम्प्रेस नहीं किया।
इस विमान को लगातार आफ्टरबर्नर का उपयोग करना पड़ता है। कंपनी, विमान परियोजना के लिए साझेदारों की तलाश कर रही है और अभी भी PLAAF (चीनी वायुसेना) के साथ मामला बना रही है। 2019 तक एक इसके एक नये वेरिएंट के आने की संभावना थी, लेकिन नया वेरिएंट नहीं आया।
विमान के मुख्य डिजाइनर, सन कांग ने महसूस किया, कि यह जे-15 को पूरक करने या बाद में बदलने के लिए वाहक-आधारित नौसैनिक लड़ाकू विमान के रूप में यह एक अच्छा मंच हो सकता है।
ऐसी भी कुछ रिपोर्टें थीं, कि PLA नेवी (PLAN) ने शेनयांग से J-31 का वाहक-संगत संस्करण विकसित करने का आग्रह किया था। हालांकि, एविएशन इंडस्ट्री कॉरपोरेशन ऑफ़ चाइना (AVIC) की मार्केटिंग टीम स्पष्ट थी, कि विमान मुख्य रूप से F-35 के प्रतिस्पर्धी के रूप में निर्यात के लिए था।
पाकिस्तान को क्यों चाहिए J-31 फाइटर जेट?
पाकिस्तान के पास F-16 के पुराने बेड़े में राजनीतिक प्रतिबंधों और संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा अतिरिक्त व्यवधानों के कारण उतार-चढ़ाव देखा गया है। पाकिस्तान के बेड़े में जितने भी एफ-16 फाइटर जेट्स हैं, वो अब करीब 40 साल पुराने वेरिएंट हैं। उनके पास 1960 के दशक की पुरानी लगभग 180 डसॉल्ट मिराज III और मिराज V भी हैं।
अब जाकर JF-17s ने मिराज वेरिएंट की जगह लेना शुरू कर दिया है, और J-10s ने F-16s को बढ़ाना शुरू कर दिया है। भविष्य में F-16 वर्ग के विमान का प्रतिस्थापन पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान से करना होगा, और फिलहाल के लिए पाकिस्तान J-10 की डील भी चीन के साथ कर सकता है।
पाकिस्तान इस बात को लेकर सचेत है, कि भारत अपने लड़ाकू विमान कार्यक्रमों को आगे बढ़ा रहा है। लेकिन, पाकिस्तानी सेना फिलहाल ड्राइविंग सीट पर है। भारत का एएमसीए प्रोजेक्ट (तेजस मार्क-2) 2032 के आसपास ही वायुसेना के बेड़े में शामिल हो सकता है। लिहाजा पाकिस्तान, भारत से आगे रहना चाहता है।
चीन अपने J-31 कार्यक्रम के लिए भागीदार खोजने के लिए बेताब है। फिलहाल पाकिस्तान ही एकमात्र दावेदार है और इसलिए दोनों तरफ से ये कदम उठाए जा रहे हैं। पाकिस्तान में कई विश्लेषक इस डील को लेकर गंभीर सवाल उठा रहे हैं। कई विश्लेषक ये भी कह रहे हैं, कि आखिर पाकिस्तानी वायुसेना अपने सभी विमान चीन से ही क्यों खरीद रही है?
हालांकि, पाकिस्तान तुर्की को भी नाराज नहीं करना चाहता है, लेकिन दोनों डील में जाने की हैसियत पाकिस्तान की नहीं है।
J-31 पहले उपलब्ध होगा। इसके सस्ता होने की संभावना है। वहीं, इसे चीनी अर्थव्यवस्था और प्रौद्योगिकी का समर्थन प्राप्त होगा।
इसके अलावा, पाकिस्तान ये भी उम्मीद कर रहा है, कि एक दिन वो चीन के साथ टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के जरिए विमानों का पाकिस्तान में भी निर्माण संभव है। लिहाजा, पाकिस्तान चाहता है, कि भारत से पहले वो फिफ्थ जेनरेशन फाइटर जेट हासिल कर वो भारत के ऊपर बढ़त हासिल कर ले।
भारत के पास क्या हैं ऑप्शन और चैलेंज?
भारत का लड़ाकू विमान LCA Mk1A अभी भी डेवलपमेंट के स्टेज में है। जिसे चौथी प्लस पीढ़ी माना जा सकता है। एमके1ए 2024 में शामिल होना शुरू हो जाएगा। एलसीए एमके2, जिसे 4.5 पीढ़ी माना जा सकता है, वो जल्द से जल्द 2025 के आसपास अपनी पहली उड़ान भरेगा।
तेजस मार्क-2 को 2028-29 के आसपास शामिल किया जाएगा। इंडियन एयरफोर्स ने लगभग 200 Mk1 और Mk2 वेरिएंट के लिए प्रतिबद्धता जताई है। भारत के पांचवीं पीढ़ी के विमान, AMCA को पहले ही दो वेरिएंट AMCA Mk1 (आंशिक रूप से स्टील्थ) और Mk2 (स्टील्थ) में विभाजित किया जा चुका है।
हालांकि, इन प्रोजेक्ट्स के लिए सुरक्षा पर कैबिनेट समिति (सीसीएस) की मंजूरी अभी भी मिलनी बाकी है। अगर आज की तारीख में भी मंजूरी दे जाए, फिर भी AMCA Mk1 2028-29 के आसपास और Mk2 2032 तक उड़ान भर सकता है। AMCA वेरिएंट का इंडक्शन 2032-35 के आसपास हो सकता है। पाकिस्तान 2029-30 टाइमलाइन की बात कर रहा है। चीन के पास पहले से ही 150 से ज्यादा जे-20 विमान हैं और 2027 तक इसे बढ़ाकर 400 करने का लक्ष्य है।
यानि, तीनों देशों के बीच एक तरह की रेस लगी हुई है और हर कोई अपनी वायुसेना की शक्ति को सबसे आगे रखने के लिए अपने अपने हिसाब से तैयारियां कर रहा है।
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