AMCA: पाकिस्तान को मिल रहा चीनी 5th जेनरेशन विमान, भारत में सरकारी टेबल पर फंसी डिजाइन.. असमंजस में वायुसेना?
China Vs Indian Air Force: पाकिस्तान की सेना ने इसी महीने घोषणा की है, कि उसने चीन से फिफ्थ जेनरेशन फाइटर जेट एफसी-31/जे-31 डबल इंजन वाले स्टील्थ लड़ाकू विमान खरीदने करने की योजना बनाई है और ऐसा करके उसकी योजना फाइटर जेट हासिल करने की रेस में भारत से आगे निकलना है।
चीन से पहले तुर्की ने पिछले साल अगस्त में पाकिस्तान को फिफ्थ जेनरेशन फाइटर जेट संयुक्त तौर पर बनाने का ऑफर दिया था और पाकिस्तान ने तुर्की के ऑफर पर भी हामी जताई है।

लेकिन, पाकिस्तान की तुर्की या चीनी फाइटर जेट्स खरीदने की अटकलों के बीच, पिछले कुछ वर्षों में इंडियन डिफेंस स्टेब्लिसमेंट के ध्यान नहीं देने की वजह से, स्टील्थ फाइटर जेट बनाने की कोशिश के हमारे 20 साल धुल गये हैं। लिहाजा, इंडियन एयरफोर्स को 20 सालों का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
अब जब तुर्की ने पाकिस्तान को अपने फिफ्थ जेनरेशन फाइटर जेट KAAN के प्रोडक्शन में शामिल होने का न्योता दिया है, और जब पाकिस्तान ने चीन से एफसी-31/जे-31 डबल इंजन खरीदने की घोषणा भी कर दी है, तो भारत के सामने पैनिक बटन बजने लगा है, लेकिन भारत के सामने दिक्कत ये है, कि वो फिफ्थ जेनरेशन फाइटर जेट के लिए किस विकल्प के साथ जाए?
भारतीय वायुसेना के कैसे धुले कई साल?
स्वदेशी लड़ाकू विमानों के अधिग्रहण में होने वाली देरी, और प्रोजेक्ट के डेवलपमेंट में लगातार होने वाली देरी की वजह से भारतीय वायुसेना के पास अब, भारतीय हवाई क्षेत्र की रक्षा के लिए पुराने लड़ाकू विमानों की घटती इकाइयां ही बची हैं।
पिछले साल अगस्त में यूरेशियन टाइम्स की रिपोर्ट में कहा गया है, कि भारतीय वायुसेना के पास अब लड़ाकू विमानों की तुलना में, सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल इकाइयां ज्यादा हैं। यानि, भारतीय वायुसेना के बेड़े में लड़ाकू विमानों की संख्या काफी कम हो गई है।
हालांकि, लड़ाकू विमानों की अगली पीढ़ी, यानि फिफ्थ जेनरेशन फाइटर जेट के लिए भारत की ये तलाश करीब 15 साल पहले शुरू हुई थी, जब भारत ने पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू जेट (एफजीएफए) विकसित करने के लिए रूस के साथ हाथ मिलाया था।
लेकिन, कई सालों के बाद, इंडियन एयरफोर्स अब तक के सबसे महत्वाकांक्षी और विवादास्पद, ज्वाइंट भारत-रूस डिफेंस प्रोजेक्ट में से एक से हट गई। इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह, इस प्रोजेक्ट में आने वाली लागत को लेकर दोनों देशों के बीच सहमति नहीं बनना था। इस प्रोजेक्ट के तहत भारत और रूस के ज्वाइंट वेंचर के तहत साल 2018 तक सुखोई/HAL पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान (FGFA) का को-डेवलपमेंट और प्रोडक्शन, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और एक-दूसरे के बीच विमान की तकनीकी क्षमताएं बांटना शामिल था।
लेकिन, 11 सालों तक चली लंबी बातचीत के बाद साल 2018 में भारत इस परियोजना से पीछे हट गया।

किस प्लान पर काम कर रहा है भारत?
भारत ने फिफ्थ जेनरेशन फाइटर जेट को घर में ही बनाने की तैयारी की है और भारत का फिफ्च जेनरेशन फाइटर जेट प्रोजेक्ट एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) साल 2026 तक शुरू होने की उम्मीद नहीं है। अगर 2026 तक फाइटर जेट बन भी गया, तो पहले ट्रायल होने और फिर वायुसेना में उसके शामिस होने में कई साल और लग जाएंगे।
लेकिन, इसके पीछे की सबसे बड़ी शर्त ये है, कि भारत की सुरक्षा पर कैबिनेट कमेटी इस प्रोजेक्ट को लेकर अपनी सहमति जताए। अगर कैबिनेट कमेटी तैयार हो जाती है, तो इसके बाद भारत का DRDO, डबल इंजन की क्षमता वाले स्टील्थ फाइटर जेट के निर्माण का काम शुरू करेगा, लेकिन यहां सवाल ये है, कि क्या भारत सरकार इस प्रोजेक्ट के लिए फंड जारी करेगी? जबकि, भारत के विपरीत अमेरिका का पहला 5वीं पीढ़ी का लड़ाकू जेट, लॉकहीड मार्टिन F-22 रैप्टर ने पहली बार 2005 में सेवा में प्रवेश कर लिया था।
यूरेशियन टाइम्स की एक रिपोर्ट में स्क्वाड्रन लीडर विजयेंद्र के ठाकुर ने कहा था, कि "उनके ट्रैक रिकॉर्ड और ओवर-प्रोजेक्शन की उनकी प्रवृत्ति को देखते हुए, इस बात को लेकर शक है, कि DRDO और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के नेतृत्व को, एएमसीए परियोजना के दौरान टेक्नोलॉजी की कमी की वजह से, इस प्रोजेक्ट की समयसीमा को आगे बढ़ाने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।"
साल 2009 में, AMCA की शुरुआत में हवाई लड़ाई, जमीनी हमले, दुश्मन की एयर डिफेंस को ध्वस्त करने और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध को लेकर हर मौसम में लड़ने लायक, स्विंग-रोल फाइटर जेट बनाने की योजना बनाई गई थी। इसके चार साल बाद साल 2013 में, इसके पहले व्यवहार्य कॉन्फ़िगरेशन पर काम किया गया, जिसे IAF ने स्वीकार कर लिया।
लेकिन, फिर, FGFA विकसित करने के लिए रूस के साथ संयुक्त उद्यम शुरू किया गया। ब्रह्मोस ज्वाइंट वेंचर की कामयाबी से उत्साहित होकर, IAF ने 2018 में इससे बाहर निकलने तक, इस परियोजना को जारी रखने का फैसला किया। लिहाजा AMCA परियोजना में देरी होती चली गई, लेकिन अब IAF ने स्वदेशी फिफ्थ जेनरेशन फाइटर जेट के साथ जाने का फैसला किया है।
इंडियन एयरफोर्स ने तय किया है, कि भारत अब खुद, स्वदेशी टेक्नोलॉजी के साथ फिफ्थ जेनरेशन फाइटर जेट का निर्माण करेगा।
जिसके तहत, इंडियन एयरफोर्स ने ADA के द्वारा तैयार की गई क्रिटिकल डिजाइन को मंजूरी दे दी है। इसके तहत GE-F414 इंजन पहले पांच AMCA प्रोटोटाइप को पावर देंगे। भारतीय वायुसेना एमके1 (जीई एफ414 इंजन के साथ 40) और एमके2 ('भारतीय' इंजन के साथ) कॉन्फ़िगरेशन में 125 एएमसीए को अपने बेड़े में शामिल करेगी। बाद वाले को एक विदेशी भागीदार के सहयोग से ज्यादा शक्तिशाली इंजन विकसित करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है।
रेस में कैसे आगे निकलना चाहता है पाकिस्तान?
पाकिस्तान भले ही कंगाली से जूझता रहता है, लेकिन वो ताकत के मामले में भारत से ज्यादा पीछे नहीं रहना चाहता है।
हालांकि, फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है, कि पाकिस्तान तुर्की के लड़ाकू विमान कार्यक्रम में कब शामिल हो पाएगा, आ फिर तुर्की के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए पाकिस्तान बजट ला भी पाता है या नहीं, लेकिन तुर्की ने संकेत दिया है, कि वह जल्द से जल्द पाकिस्तान के साथ बातचीत शुरू करने की योजना बना रहा है।
तुर्की के उप रक्षा मंत्री सेलाल सामी तुफ़ेकी ने 2 अगस्त 2023 को पाकिस्तान में कहा था, कि "बहुत जल्द, इस महीने के भीतर, हम आधिकारिक तौर पर हमारे KAAN राष्ट्रीय लड़ाकू जेट कार्यक्रम में पाकिस्तान को शामिल करने के लिए अपने पाकिस्तानी समकक्षों के साथ चर्चा करेंगे।"
तुर्की की यह घोषणा अज़रबैजान के उसके KAAN लड़ाकू जेट परियोजना का हिस्सा बनने के कुछ ही दिनों बाद आई थी। कान के विकास का नेतृत्व करने वाले तुर्की एयरोस्पेस का पाकिस्तान एयरोनॉटिकल कॉम्प्लेक्स (पीएसी) कामरा, राज्य के स्वामित्व वाली सैन्य विमान कंपनी और रखरखाव, मरम्मत और ओवरहाल हाउस के साथ घनिष्ठ संबंध रहे हैं।
KAAN फाइटर जेट के बारे में प्रभावशाली बात यह है, कि इसका डेवलपमेंट AMCA परियोजना के साथ ही शुरू हुआ था, लेकिन तुर्की ने इस साल दिसंबर में KAAN फाइटर जेट के ट्रायल की घोषणा की है, जबकि भारत में अभी तक प्रोजेक्ट को लेकर फाइल को मंजूरी भी नहीं मिली है।
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