ईरान ने मार्च तक का दे रखा है अल्टीमेटम... क्या इसी डर से शिया शासन के सामने घुटनों पर आया जिन्ना का देश?

Iran-Pakistan News: पाकिस्तान और ईरान ने इस हफ्ते एक दूसरे पर मिसाइलों को दागने के बाद स्थिति को शांत करने पर सहमति जताई है और 'परस्पर विश्वास और सहयोग' की भावना से तनाव कम करने पर सहमत हुए। इसके साथ ही इस्लामाबाद ने कहा है, कि वो राजनयिक बातचीत के लिए तैयार है।

जिसके बाद सवाल उठ रहे हैं, कि क्या महाकंगाल होने के डर से सुन्नियों का देश पाकिस्तान, शिया शासन ईरान के सामने झुका है? हम आपको बताने जा रहे हैं, कि आखिर पाकिस्तान क्यों ईरानी शासन के सामने डर गया है?

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पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने किया फोन

पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने एक बयान में कहा, पाकिस्तान के विदेश मंत्री जलील अब्बास जिलानी ने अपने ईरानी समकक्ष हुसैन अमीर-अब्दुल्लाहियन के साथ टेलीफोन पर बातचीत की और उन्हें बताया, कि उनका देश "आपसी विश्वास और सहयोग" की भावना के आधार पर सभी मुद्दों पर ईरान के साथ काम करने के लिए तैयार है।

बयान में कहा गया है, कि "उन्होंने (जिलानी) सुरक्षा मुद्दों पर करीबी सहयोग की जरूरत को रेखांकित किया है।"

यह घटनाक्रम पाकिस्तान द्वारा ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में "आतंकवादी ठिकानों" के खिलाफ सटीक सैन्य हमले करने के बाद आया है।

पाकिस्तान के दावे के मुताबिक, हमले में कम से कम नौ लोग मारे गए।

पाकिस्तान ने ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमलों के जवाब में हमला किया, जिसमें बलूचिस्तान में दो सुन्नी बलूच आतंकवादी समूह जैश अल-अदल को निशाना बनाया गया था।

इससे पहले तुर्की के विदेश मंत्री हकन फिदान के साथ बातचीत के दौरान, पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने कहा, कि उनके मिसाइल हमलों का मकसद ईरान के अंदर आतंकवादी शिविरों को निशाना बनाना था और तनाव बढ़ाने में उनकी कोई रुचि या इच्छा नहीं थी।

18 अरब डॉलर का क्या है मामला?

दरअसल, पिछले साल पाकिस्तान की पब्लिक अकाउंट्स कमेटी (पीएसी) ने चिंता जताई थी, कि अगर देश ईरान-पाकिस्तान गैस पाइपलाइन परियोजना को आगे नहीं बढ़ाता है, तो पाकिस्तान को 18 अरब डॉलर का जुर्माना देना होगा।

लिहाजा पाकिस्तान, जो आईएमएफ से बार बार कर्ज लेकर अपना देश चला रहा है, वो भला ईरान को 18 अरब डॉलर का जुर्माना कहां से देगा? लिहाजा, पाकिस्तान के साथ क्या हो सकता है, इसका अंदाजा आप लगा सकते हैं और अतीत में पाकिस्तान ने जितना ईरान को परेशान किया है, उसे देखकर ये भी नहीं लगता, कि ईरान, किसी तरह का रहम पाकिस्तान को दिखाने वाला भी है।

वहीं, पिछले साल फरवरी में ईरान ने कहा था, कि अगर पाइपलाइन प्रोजेक्ट पर काम शुरू नहीं होता है, तो वो कॉन्ट्रैक्ट के मुताबिक, पाकिस्तान के ऊपर 18 अरब डॉलर, यानि करीब 48 हजार 960 करोड़ पाकिस्तानी रुपये का जुर्माना लगाएगा।

क्या है ईरान-पाकिस्तान में समझौता?

पाकिस्तान और ईरान के बीच गैस पाइपलाइन को लेकर ये समझौता साल 2009 में किया गया था, जब पाकिस्तान में बिलावल भुट्टो की पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की सरकार थी।

इस समझौते के तहत दोनों देशों के बीच 800 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन का निर्माण होना था और फिर इस पाइपलाइन के जरिए ईरान से पाकिस्तान में गैस की सप्लाई होनी थी। लेकिन, ये प्रोजेक्ट पिछले 14 सालों से फंसा हुआ है।

ईरान अपने हिस्से का काम सालों पहले पूरा कर चुका है, लिहाजा उसने भारी मात्रा में पैसा इस प्रोजेक्ट में खर्च कर दिए हैं और आगे का काम पाकिस्तान को करना है, जिससे वो मुकर गया है और इसके पीछे उसने अमेरिकी प्रतिबंधों का हवाला दिया है।

लेकिन, पाकिस्तान का डबल गेम देखिए, अमेरिका ने ईरान पर 2018-19 में प्रतिबंध लगाए थे और उससे पहले भी पाकिस्तान ने इस पाइपलाइन को लेकर एक मीटर का भी काम नहीं किया है, इसीलिए ईरान उसकी नीयत पर सवाल उठा रहा है।

ईरान ने दर्जनों बार पाकिस्तान से पाइपलाइन बिछाने को लेकर आग्रह किया, लेकिन पाकिस्तान हर बार नये बहाने बना देता है, जिससे तंग आकर ईरान ने पिछले साल फरवरी में तय कॉन्ट्रैक्ट के तहत पाकिस्तान पर 18 अरब डॉलर का जुर्माना लगाने की धमकी दी थी, जिसके बाद पाकिस्तान हरकत में तो आया था, लेकिन दिक्कत ये है, कि पाकिस्तान के पास पैसे ही नहीं हैं, कि वो पाइपलाइन का काम आगे बढ़ा सके।

ईरान ने पाकिस्तान को मार्च 2024 तक का अल्टीमेटम दिया है। ईरान ने कहा है, कि अगर मार्च 2024 से पहले पाकिस्तान अपने क्षेत्र में गैस पाइपलाइन का काम पूरा कर लेता है, तो बहुत अच्छी बात है, अन्यथा ईरान, पाकिस्तान के खिलाफ आगे की कार्रवाई करेगा।

ईरान ने पाकिस्तानी अधिकारियों के सामने साफ कर दिया है, कि उसे हर हाल में तय समय सीमा से पहले गैस पाइपलाइन काम पूरा करना होगा, अन्यथा वो जुर्माना चुकाने के लिए तैयार हो जाए।

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