कट्टरपंथी मौलाना के आगे नतमस्तक इमरान, मौलाना साद जेल से रिहा, पाकिस्तान में फ्रांस को बहिष्कार करने पर वोटिंग
इमरान खान सरकार ने कट्टरपंथी मौलाना साद रिजवी को रिहा कर दिया है और पाकिस्तान की संसद में फ्रांस को बहिष्कार करने पर वोटिंग की जा रही है।
इस्लामाबाद, अप्रैल 20: कट्टरपंथी इमरान खान ने पाकिस्तान के कट्टरपंथी मौलाना साद रिजवी को आखिरकार रिहा कर दिया है। पाकिस्तान सरकार ने कट्टरपंथियों के आगे घुटने टेक दिए और तहरीक-ए-लब्बैक के सरगना साद हुसैन रिजवी को रिहा कर दिया गया है। 12 अप्रैल को तहरीक-ए-लब्बैक के सरगना साद हुसैन रिजवी को पाकिस्तान की पुलिस ने गिरफ्तार किया था जिसके बाद से ही पूरे पाकिस्तान में दंगे फसाद हो रहे थे। इसके साथ ही पाकिस्तान की संसद में अब इस बात पर वोटिंग की जा रही है कि क्या उसे फ्रांस के साथ सारे रिश्ते खत्म कर लेना चाहिए। 12 अप्रैल से कट्टरपंथी मौलाना साद रिजवी लाहौर के कोट लखपत जेल में बंद था और पूरे पाकिस्तान में गृहयुद्ध जैसी स्थिति बन गई थी। पाकिस्तान के गृहमंत्री ने खुद आगे बढ़कर कट्टरपंथी संगठन तहरीक-ए-लब्बैक के साथ समझौता किया है और ऐलान किया है कि फ्रांस के राजदूत को पाकिस्तान से निकाला जाए या नहीं, इसको लेकर संसद में वोटिंग होगी।

तहरीक-ए-लब्बैक पर प्रतिबंध
इमरान खान सरकार ने जिस मौलाना साद रिजवी को जेल से रिहा किया है वो कट्टरपंथी संगठन तहरीक-ए-लब्बैक का मुखिया है और इससे पहले इमरान खान सरकार ने तहरीक-ए-लब्बैक को प्रतिबंधित संगठन घोषित कर दिया था। पाकिस्तान सरकार ने पूर देश में हिंसा फैलाने के आरोप में आतंकवाद अधिनियम के तहत तहरीक-ए-लब्बैक को प्रतिबंधित कर दिया था। आपको बता दें कि तहरीक-ए-लब्बैक के नाम पर पाकिस्तान में गृहयुद्ध छिड़ा हुआ है और लाखों लोग सड़क पर उतरे हुए हैं। लोग कट्टरपंथी मौलाना साद रिजवी को रिहा करने की मांग कर रहे थे। जिसे अब रिहा किया गया है लेकिन पाकिस्तान में अभी भी बवाल खत्म नहीं हुआ है। ये संगठन पाकिस्तान के अंदर काफी शक्तिशाली माना जाता है और पाकिस्तानी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक साद रिजवी के एक इशारे पर पाकिस्तान के अंदर लाखों लोग सड़कों पर उतर चुके हैं।
फ्रांस के नाम पर मचा है बवाल
पाकिस्तान में ये बवाल मचा है फ्रांस के नाम पर। दरअसल, फ्रांस में पिछले साल नवंबर के महीने में एक टीचर पर क्लासरूम में पैगंबर मोहम्मद का कार्टून दिखाने का आरोप लगा था। जिसके बाद टीचर की गला रेतकर हत्या कर दी गई थी। हालांकि, बाद में आरोप लगाने वाली छात्रा अपने बयान से मुकर गई थी और खुलासा हुआ था कि जिस दिन उसने टीचर पर कार्टून दिखाने का आरोप लगाया था, उस दिन वो खुद स्कूल में नहीं थी। लेकिन, पाकिस्तान में इस घटना पर अब बवाल मचा है। फ्रांस के राष्ट्रपति ने क्लासरूम में कार्टून दिखाए जाने को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता करार दिया था और टीचर की हत्या की कड़े शब्दों में निंदा की थी। इसके बाद से ही पाकिस्तान में फ्रांस को लेकर भारी नाराजगी है और फ्रांस के कट्टरपंथी नेता और मौलाना पाकिस्तान सरकार पर फ्रांस से हर रिश्ते खत्म करने की मांग कर रहे हैं। जिसके बाद अब पाकिस्तान की सरकार ने कट्टरपंथियों की बात मानते हुए फ्रांस के मुद्दे पर संसद में वोटिंग कराने का फैसला लिया है।
कट्टरपंथियों से समझौता
तहरीक-ए-लब्बैक लगातार फ्रांसीसी राजदूत को पाकिस्तान से बाहर निकालने की बात कर रही है। वहीं, नवंबर में पाकिस्तान की इमरान खान सरकार और टीएलपी के बीच एक समझौता हुआ था। इस समझौते के मुताबिक इमरान खान ने कहा था कि तीन महीने के भीतर इस मसले को पाकिस्तान की संसद के जरिए सुलझाया जाएगा। वहीं, टीएलपी ने इमरान खान सरकार को 20 अप्रैल तक का अल्टीमेटम दिया था लेकिन पाकिस्तान सरकार ने फ्रांस से रिश्ते खत्म नहीं किए और इसी बात को लेकर अब पाकिस्तान में आग लगी हुई है।
कौन है मौलाना साद रिजवी
पाकिस्तान में हजारों की तादाद में कट्टरपंथी नेता हैं जो इस्लाम के नाम पर लोगों का खून बहाने पर आमादा रहते हैं और अभी भी पाकिस्तान में यही हो रहा है। साद रिजवी से पहले खादिम हुसैन रिजवी तहरीक-ए-लब्बैक के नेता थे, लेकिन अचानक उनका निधन हो गया, जिसके बाद तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान का नया नेता साद रिजवी को बनाया गया। साद रिजवी अपने भड़काने वाले बयानों के लिए पाकिस्तान में काफी चर्चित भी है। साद रिजवी अपने समर्थकों के साथ पाकिस्तान में कट्टरपंथी कानून बनाने का वकालत करता है और लगातार पाकिस्तान की सरकार पर दबाव बनाता रहता है। साद रिजवी और उसके समर्थक ईशनिंदा कानून को खत्म नहीं करने के लिए भी हमेशा से सरकार पर दबाव बनाती रही है। साद रिजवी और तहरीक-ए-लब्बैक चाहती है कि पाकिस्तान सरकार फ्रांस के अपने सारे संबंध खत्म करे, फ्रांस के सामानों का बहिष्कार करे और फ्रांस के राजदूत को पाकिस्तान से बाहर निकाला जाए।












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