तानाशाही की ओर बढ़ता पाकिस्तान, परवेज मुशर्रफ ने बनाया प्लान

इस्लामाबाद। नवाज शरीफ के प्रधानमंत्री पद से बेदखल होने के बाद पाकिस्तान की राजनीति में एक बार फिर जबरदस्त सियासी उठापठक देखने को मिल रहा है। पाकिस्तान की राजनीति कई बार सैन्य तख्तापलट का शिकार होते दिख रही है तो वहीं, एक बार फिर इस मुल्क पर तानाशाही राज का साया मंडराने लगा है। एक अंग्रेजी मैगजीन डिप्लोमेट के अनुसार, तानाशाह और पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ एक बार फिर पाकिस्तान की राजनीति में सेंध मारने वाले हैं। डिप्लोमेट मैगजीने की माने तो पाकिस्तान की आवाम को एक बार फिर मुशर्रफ की तानाशाही को झेलना पड़ सकता है।

तानाशाही की ओर बढ़ता पाकिस्तान, परवेज मुशर्रफ ने बनाया प्लान

मैगजीन ने दावा किया है कि मुशर्रफ की अगुवाई में '23 राजनैतिक पार्टियों के गठबंधन' का विलय देखने को मिल सकता है। हैरान करने वाली बात यह है कि इस गठबंधन में आतंकी हाफिज सईद की पार्टी मिल्ली मुस्लिम लीग भी शामिल है। नवाज शरीफ के जाने के बाद सत्तारूढ़ पार्टी की कमर टूट गई है और कई बड़े मंत्री भी कैबीनेट से इस्तीफा दे चुके हैं। इसके बाद पाकिस्तान में कट्टरवादी ताकतों को हिम्मत मिली है।

इससे पहले 26/11 के मुंबई हमले का मास्टरमाइंड हाफिज सईद ने 2 दिसंबर को घोषणा की थी कि वह 2018 में पाकिस्तान के आम चुनाव लड़ेगा, वहीं नवंबर में पूर्व सैन्य शासक मुशर्रफ ने भी एक बड़े राजनीतिक गठबंधन का ऐलान किया था। पाकिस्तान में अगले साल चुनाव है और इस प्रकार की खतरनाक ताकतें अगर चुनाव में उतरती है, तो पाकिस्तान की राजनीति बहुत कुछ बदल जाएगी।

नवाज शरीफ के प्रधानमंत्री पद से हटने के बाद से पाकिस्तान की राजनीति में बहुत कुछ बदलाव देखने को मिला है। हाल ही में लाहौर हाई कोर्ट ने आतंकी हाफिज सईद को नजरबंदी से रिहा कर दिया था, उसके बाद उसने अगले साल आम चुनाव में भाग लेने की घोषणा की थी। हाफिज सईद के बाहर आते ही मुशर्रफ ने कहा था कि उन्होंने हमेशा जमात-उद-दावा और हाफिज का समर्थन किया है।

इस बीच नवंबर मे एक कट्टर इस्लामिक (तहरीक-ए-लब्बैक या रसूल अल्ला पाकिस्तान) पार्टी ने जिस तरह से हिंसक प्रदर्शन कर एक लोकतांत्रिक सरकार को घुटने टेकने के लिए मजबूर किया, जिससे बहुत कुछ स्पष्ट हो गया कि पाकिस्तान की सियासी ताकत की जड़ें कमजोर हो चुकी है। इस घटना को अंजाम देने के लिए पाकिस्तान की मिलिट्री के सांठगांठ पर भी सवाल खड़े हुए हैं। यहां तक कि इस्लामाबाद हाई कोर्ट ने इसके लिए सरकार और मिलिट्री को कड़ी फटकार भी लगाई थी।

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