नवाज शरीफ के प्रधानमंत्री बनने का सपना सुप्रीम कोर्ट ने तोड़ा, शहबाज शरीफ का कानून संशोधन खारिज

Nawaz Sharif News: नवाज शरीफ के पाकिस्तान वापस लौटने, फिर से आम चुनाव लड़ने और प्रधानमंत्री बनने के ख्वाब पर पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट ने पानी फेर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट (रिव्यू ऑफ जजमेंट एड ऑर्डर) अधिनियम 2023 को रद्द कर दिया है।

सुप्रीम कोर्ट का ये फैसला पूर्व पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के लिए बहुत बड़ा झटका है और शहबाज शरीफ का कानून संशोधन कर नवाज शरीफ को वापस पाकिस्तान बुलाने का प्लान, फिलहाल फेल नजर आ रहा है।

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पाकस्तान सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश उमर अता बंदियाल की अध्यक्षता वाली और न्यायमूर्ति इजाजुल अहसन और न्यायमूर्ति मुनीब अख्तर की शीर्ष अदालत की तीन सदस्यीय पीठ ने, कानून को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर 7 जून से 19 जून तक चली छह सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट (रिव्यू ऑफ जजमेंट एड ऑर्डर) अधिनियम 2023 को रद्द कर दिया है।

पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट ने 19 जून को फैसला सुरक्षित रखने की घोषणा की थी, जबकि शहबाज शरीफ की सरकार ने मई के अंत में नेशनल असेंबली में इस अधिनियम को पारित किया था।

गुलाम मोहिउद्दीन, ज़मान खान वरदाक, ज्यूरिस्ट्स फाउंडेशन ने अपने सीईओ रियाज़ हनीफ राही और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के माध्यम से इस अधिनियम की वैधता को चुनौती दी थी।

पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस उमर अता बंदियाल, जो इमरान खान के करीबी माने जाते हैं, उन्होंने शहबाज शरीफ को तगड़ा झटका दिया है और जेल में बंद इमरान खान ने बता दिया है, कि वो अभी भी खेल से बाहर नहीं हुए हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने किस आधार पर दिया फैसला?

शहबाज शरीफ के गठबंधन सरकार के कार्यकाल के दौरान, संसद में एक कानून बनाया गया था, जिसके तहत किसी भी सजायाफ्ता आरोपी को, कोर्ट के फैसले खिलाफ अपील करने का अधिकार दिया गया था। इसके तहत, सुप्रीम कोर्ट को अपने फैसले की समीक्षा करना पड़ता और चूंकी पाकिस्तान में सुप्रीम कोर्ट, सेना और सरकार के प्रेशर में होता है, लिहाजा शहबाज सरकार इसका फायदा अपने भाई, नवाज शरीफ की सजा को चुनौती देकर और सजा को सस्पेंड करवाकर उठाना चाहते थे।

शहबाज सरकार ने जो कानून संशोधन किया था, उसमें कहा गया था, कि संविधान के अनुच्छेद 184 के तहत अपने मूल क्षेत्राधिकार के प्रयोग में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित निर्णयों और आदेशों की सार्थक समीक्षा प्रदान करके, न्याय के मौलिक अधिकारों को सुनिश्चित करना आवश्यक है।

पाकिस्तानी संविधान के अनुच्छेद 184 के तहत अपने मूल क्षेत्राधिकार (स्वतः प्रेरणा शक्तियों) के प्रयोग में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले और आदेशों के मामले में, कानून कहता है, कि तथ्यों और कानून, दोनों पर समीक्षा का दायरा अपील के समान होगा।

इससे पहले मूल आदेश जारी करने वाली पीठ ने समीक्षा याचिका पर सुनवाई की थी, लेकिन समीक्षा कानून के तहत अब वह ऐसा नहीं कर सकती।

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नवाज शरीफ के लिए क्यों है झटका

नवाज शरीफ के लिए सुप्रीम कोर्ट का ये फैसला इसलिए बहुत बड़ा झटका है, क्योंकि शहबाज शरीफ के कानून संशोधन के बाद नवाज शरीफ सुप्रीम कोर्ट में अपनी सजा के खिलाफ फिर से अपील कर सकते थे। लेकिन, सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बाद अब नवाज शरीफ के पास सजा के फैसले खिलाफ अपील करने का अधिकार खत्म हो गया है।

इसके अलावा, शहबाज सरकार ने एक और कानून पारित किया था।

एएफपी की रिपोर्ट के मुताबित, 25 जून को, पाकिस्तान की नेशनल असेंबली ने चुनाव (संशोधन) अधिनियम 2023 पारित किया था, जिससे अदालतों को केवल "सिर्फ पांच साल के लिए" सांसदों को अयोग्य घोषित करने की अनुमति दी गई है। यानि, पाकिस्तान की अदालतें, किसी नेता को पांच साल से ज्यादा वक्त तक के लिए चुनाव लड़ने पर रोक नहीं लगा सकती हैं।

इस संशोधन के बाद अब नवाज शरीफ के लिए फिर से चुनाव लड़ना मुमकिन बना दिया गया है। लेकिन, आज के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद, अब नवाज शरीफ, सर्वोच्च अदालत में अपील नहीं कर सकते हैं, लिहाजा, शहबाज शरीफ का दूसरा कानून, नवाज शरीफ की मदद नहीं कर पाएगा।

न्यायपालिका के साथ खींचतान के बीच यह विधेयक 5 मई को पाकिस्तान की संसद ने पारित किया था। पूरक एजेंडे के माध्यम से सदन में लाए गए विधेयक को, सीनेटर इरफानुल हक सिद्दीकी ने पेश किया था, जो पीएमएल-एन सुप्रीमो नवाज शरीफ के करीबी विश्वासपात्र माने जाते हैं।

शहबाज सरकार ने दावा किया था, कि इस विधेयक का उद्देश्य निर्णयों और आदेशों की समीक्षा करने की अपनी शक्तियों के प्रयोग में सर्वोच्च न्यायालय को सुविधा प्रदान करना और मजबूत करना है।

हालांकि, विपक्ष ने इसे पीएमएल-एन सुप्रीमो नवाज शरीफ की अयोग्यता को पलटने के प्रयास के रूप में देखा।

आपको बता दें, कि शीर्ष अदालत का फैसला प्रधान मंत्री शहबाज शरीफ के उस बयान के एक दिन बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था, कि नवाज शरीफ अगले महीने पाकिस्तान लौटेंगे, हालांकि उन्होंने कोई सटीक तारीख नहीं बताई है, लेकिन अब नवाज शरीफ के वतन वापसी का रास्ता मुश्किल हो गया है।

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