पाकिस्तान ने Pok को पाई-पाई के लिए तड़पाया, बजट में भारी कमी, कश्मीरी एक्टिविस्ट ने जताई चिंता
बजट कम किए जाने के बाद पीओके सरकार ने अफसोस जताया है कि, सरकार ने 'लाइन ऑफ कंट्रोल (एलओसी) पैकेज फंड' को भी फ्रीज कर दिया है।
मुजफ्फराबाद, जून 02: दिवालियेपन की दहलीज पर पहुंच चुका पाकिस्तान भले ही कश्मीर पर हो-हल्ला करता रहता है, लेकिन असलियत ये है, कि कश्मीर के जिस हिस्से पर उसने गैर-कानूनी तरीके से कब्जा कर रखा है, उसकी देखभाल भी करना उससे संभव नहीं हो पा रहा है और प्रसिद्ध कश्मीरी मानवाधिकार कार्यकर्ता ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में खतरनाक दुर्दशा को लेकर खतरे का अलार्म बजाया है।

पीओके की खराब स्थिति
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के लोगों की दुर्दशा पर प्रकाश डालते हुए, मानवाधिकार कार्यकर्ता और यूनाइटेड कश्मीर पीपुल्स नेशनल पार्टी (यूकेपीएनपी) के अध्यक्ष शौकत अली कश्मीरी ने कहा कि, पाकिस्तानी सरकार ने पीओके के डेवलपमेंट बजट में 2.5 अरब रुपये की कटौती की है और सामान्य बजट में 7 अरब रुपये कम कर दिए हैं। उन्होंने पीओके की स्थिति को "खतरनाक" करार दिया है। पीओके से निर्वासित नेता ने ट्विटर पर लिखा कि, 'पाकिस्तान सरकार ने पीओके के विकास बजट में 2.5 अरब रुपये और सामान्य बजट में 7 अरब रुपये की कटौती की है।" एक अन्य ट्वीट में कश्मीरी एक्टिविस्ट ने लिखा कि, इससे पहले पाकिस्तान सरकार ने 2021-22 के लिए कुल 49.9 अरब रुपये के बजट पर सहमति जताई थी। लेकिन, अब बजट में भारी मात्रा में कटौती की गई है।

पीओके सरकार ने भी जताई निराशा
बजट कम किए जाने के बाद पीओके सरकार ने अफसोस जताया है कि, सरकार ने 'लाइन ऑफ कंट्रोल (एलओसी) पैकेज फंड' को भी फ्रीज कर दिया है। वहीं, कश्मीरी नेता ने आगाह किया कि स्थिति खतरनाक होती जा रही है और इसे "युद्ध स्तर" पर संबोधित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य से, राजनीतिक नेता दावा करते रहते हैं कि पीओके में साक्षरता दर पाकिस्तान के किसी भी अन्य प्रांत से अधिक है लेकिन सच्चाई ये है कि, 'हमारे पास अभी भी फेल सिस्टम है'। उन्होंने कहा कि पीओके में संघ परिषद स्तर पर प्राथमिक स्कूलों की दयनीय स्थिति है, जहां छात्रों को "बिना वॉशरूम, स्वच्छ पेयजल की सुविधा के खुले आसमान के नीचे जमीन पर बैठने के लिए मजबूर किया जाता है'।

पीओके की बदहाल स्थिति
यूकेपीएनपी के अध्यक्ष ने कहा कि, इस खेदजनक स्थिति के अलावा, "शिक्षकों की भी भारी कमी है।" कश्मीरी नेता का ये ट्वीट पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) की पाकिस्तान सरकार द्वारा जारी बजट के बाद आया है, जिसमें उन्होंने चेतावनी दी है, कि अगर बजट की समीक्षा नहीं की गई तो यह एक गंभीर वित्तीय प्रणाली असंतुलन का कारण बन सकता है। वहीं, एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए पीओके के वित्त और राजस्व मंत्री अब्दुल मजीद खान ने आरोप लगाया कि, पीओके का विकास बजट, जो कि संघीय सरकार द्वारा समग्र रूप से प्रदान किया जाता है, चालू वित्तीय वर्ष में 28 बिलियन रुपये था, लेकिन संघीय वित्त 'डॉन' की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान के अखबार डिवीजन ने एकतरफा तौर पर इसमें 5.2 अरब रुपये की कटौती कर दी है।

भारतीय कश्मीर में भारी विकास
एक तरफ पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर पाई-पाई को तरस रहा है, वहीं भारतीय कश्मीर में विकास के नये इतिहास लिखे जा रहे हैं। पिछले साल अक्टूबर महीने में दुबई ने जम्मू-कश्मीर में बड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट में निवेश को मंजूरी दे दी है और भारत सरकार ने कहा है कि, दोनों देशों के बीच कश्मीर में इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के लिए एमओयू पर साइन कर लिए गये हैं। मोदी मोदी सरकार ने प्रोजेक्ट फाइनल होने का दावा किया है। दोनों देशों के बीच कश्मीर को लेकर एमओयू फाइनल कर दिया गया है। संयुक्त अरब अमीरात के 7 अमीरातों में से एक दुबई ने भारत के साथ कश्मीर को लेकर उस वक्त समझौता किया है, जब अनुच्छेद 370 खत्म करने को लेकर पाकिस्तान लगातार अलग अलग मुस्लिम देशों से मदद मांग रहा है और हस्तक्षेप की मांग कर रहा है।

''विकास के रास्ते पर कश्मीर''
भारतीय ट्रेड मंत्री पीयूष गोयल ने एक बयान में कहा था कि, "दुनिया ने उस गति को पहचानना शुरू कर दिया है जिस रफ्तार से जम्मू-कश्मीर विकास की गति पर चल रहा है।" बयान में कहा गया है कि, दुबई की विभिन्न संस्थाओं ने कश्मीर में निवेश में गहरी दिलचस्पी दिखाई है। हालांकि, इन सबके बीच एक बार फिर से कश्मीर में हिंसक वारदातें बढ़ी हैं और कश्मीर में फिर से शांति बहाल करने के लिए भारत सरकार की तरफ से कई कोशिशें की जा रही हैं। इस हफ्ते भी सैकड़ों प्रवासी मजदूरों के कश्मीर से पलायन करने की खबर आई है।












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