इमरान-शहबाज की लड़ाई में नर्क बना पाकिस्तान, IMF ने लटकाया लोन, विनाशकारी बर्बादी में फंसा जिन्ना का मुल्क

इस्लामाबाद की पुलिस दो दिन पहले ही लाहौर पहुंच चुकी थी, ताकि इमरान खान को गिरफ्तार किया जा सके और कल दोपहर एक बजे के बाद इमरान खान को गिरफ्तार करने की प्रक्रिया शुरू हुई थी, जो अभी तक जारी है।

Pakistan-IMF Deal

Pakistan-IMF Deal: आर्थिक संकट में बुरी तरह से फंसे पाकिस्तान का मुस्तकिबल और बर्बाद होने वाला है और इमरान खान और शहबाज शरीफ के बीच चल रही लड़ाई ने इस्लामिक देश को नर्क बना दिया है। पाकिस्तान के पास खाने की औकात नहीं है, लेकिन पाकिस्तान के नेता आपस में लड़ाई लड़ रहे हैं। लिहाजा, इंटरनेशनल मॉनेट्री फंड (IMF) ने पाकिस्तान को दी जाने वाली कर्ज की किस्त फिर लटका दी है। डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, राजनयिक सूत्रों ने बताया है, कि पाकिस्तान में राजनीतिक अस्थिरता की वजह से अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) पाकिस्तान को लोन नहीं दे रहा है। राजनयिक सूत्रों ने कहा है, कि आईएमएफ के साथ लोन पर बात नहीं बनने की सबसे बड़ी वजह राजनीतिक लड़ाई है, जो देश की इकोनॉमी को अस्थिर कर सकता है।

IMRAN KHAN

IMF ने फिर से पाकिस्तान को लटकाया

सूत्रों का कहना है, कि जो भी वैश्विक ऋणदाता संस्थाएं हैं, खासकर आईएमएफ, वो पाकिस्तान से आश्वासन मांग रहे हैं, कि देश की सरकार और राजनीतिक पार्टियां इस बात को सुनिश्चित करें, कि आईएमएफ और पाकिस्तान के बीच होने वाले समझौते को भविष्य में भी पाकिस्तान की राजनीतिक पार्टियां सम्मान देंगी। आपको बता दें, कि पाकिस्तान और आईएमएफ पिछले कई महीनों से 7 अरब डॉलर के आईएमएफ कार्यक्रम को फिर से शुरू करने के लिए बातचीत कर रहे हैं, लेकिन अभी तक एक समझौते पर नहीं पहुंचे हैं। अगर बातचीत फाइनल होती है, तो इस बार आईएमएफ से पाकिस्तान को 1.1 अरब डॉलर की एक किश्त मिलेगी और फिर आगे जाकर अगली किश्त मिलेगी। लेकिन, देश में राजनीतिक लड़ाई ने आईएमएफ लोन को संकट में डाल दिया है।

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क्या IMF के साथ हो पाएगा समझौता?

पिछले हफ्ते, पाकिस्तान के वित्त सचिव हमीद याकूब शेख ने संवाददाताओं से कहा था, कि अगले कुछ दिनों में आईएमएफ के साथ एक समझौता होने की संभावना है। लेकिन, पाकिस्तान अतीत में भी इस तरह के दावे करने के बाद लोन नहीं ले पाया था। डॉन ने जिन सूत्रों से बात की, उन्होंने कहा कि, पाकिस्तान ने आईएमएफ द्वारा सुझाए गए नीतिगत उपायों की एक श्रृंखला को पहले ही लागू कर दिया है, जिसमें टैक्स में वृद्धि, ऊर्जा की उच्च कीमतें और 25 वर्षों में उच्चतम ब्याज दरों में वृद्धि शामिल है। लेकिन दो प्रमुख मुद्दे अभी तक अनसुलझे हैं: वित्तीय और राजनीतिक आश्वासन। आईएमएफ चाहता है, कि पाकिस्तान यह दिखाए कि वह अपने भुगतान संतुलन के अंतर को कम करने के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधन जुटा सकता है। आपको बता दें, कि चूंकि आईएमएफ, कर्ज लेने वाले की जरूरत का केवल एक हिस्सा ही प्रदान करता है, इसलिए उधारकर्ता को यह दिखाने की आवश्यकता होती है, कि उसे कुछ और देशों से उधार मिल सकता है।

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चीन-सऊदी की मदद काफी नहीं

सूत्रों के मुताबिक चीन, सऊदी अरब और अन्य सहयोगी देशों ने मदद की पेशकश की है, लेकिन IMF को लगता है, कि यह काफी नहीं है। पाकिस्तान सरकार का कहना है, कि ये अंतर 5 अरब डॉलर है, लेकिन आईएमएफ का मानना है कि पाकिस्तान को 7 अरब डॉलर की जरूरत है। आईएमएफ को इस आश्वासन की भी जरूरत है, कि समझौते पर हस्ताक्षर करने वाली सरकार इसे लागू कर सकती है। लेकिन खैबर पख्तूनख्वा और पंजाब में संभावित चुनाव, और जल्द ही राष्ट्रीय चुनावों की संभावना ने आईएमएफ को यह सोचने के लिए मजबूर कर दिया है, कि वर्तमान सरकार उस सौदे को लागू करने में सक्षम हो सकती है या नहीं? आईएमएफ ये भी सोच रहा है, कि वर्तमान सरकार भले ही उसकी शर्तों को मान ले, लेकिन क्या ये सरकार चुनाव के बाद वापस सत्ता में लौट पाएगी? इसीलिए राजनिय सूत्रों में से एक ने कहा, कि "इसलिए आईएमएफ को विपक्षी दलों, खासकर पीटीआई से आश्वासन चाहिए, कि अगर वे मौजूदा सरकार के बदलने के बाद सत्ता में आते हैं, तो आईएमएफ-पाकिस्तान समझौते का सम्मान करेंगे।" लेकिन, जिस तरह से इमरान खान और शहबाज शरीफ के बीच लड़ाई जारी है, और इमरान खान को गिरफ्तार करने के लिए पाकिस्तान पुलिस हाथ-पैर मार रही है, उसे देखकर इमरान खान से किसी भी तरह के आश्वासन की उम्मीद नहीं की जा सकती है।

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इमरान खान को मना पाएंगे शहबाज?

राजनयिक सूत्र ने कहा, कि "इसीलिए आईएमएफ का सरकार के साथ साथ विपक्षी पार्टियों से वादा चाहिए, खासकर इमरान खान की पार्टी से वादा चाहिए, कि वो डील का सम्मान करेंगे। लेकिन, भला इमरान खान, वो भी इन परिस्थितियों में ऐसा वादा करके, सरकार के लिए चीजों को आसान नहीं बनाना चाहेगा।" राजनियक सूत्रों ने कहा, कि "इन परिस्थितियों में आईएमएफ आमतौर पर विपक्ष से संपर्क करता है और इमरान खान से भी संपर्क कर सकता है।' तो क्या शहबाज शरीफ इमरान खान को मना पाएंगे? ये असंभव सरीखा लगता है, क्योंकि इमरान खान की मांग चुनाव कराने की है और वो साफ कर चुके हैं, कि देश के साथ किसी भी तरह की डील चुनाव के बाद बनने वाली सरकार करेगी। सूत्रों का कहना है, कि मौजूदा सरकार चाहती है, कि इमरान खान इस तरह का आश्वासन दें, लेकिन वह इसे सार्वजनिक रूप से मानने के लिए तैयार नहीं है। क्योंकि, इससे विपक्ष और मजबूत हो सकता है। वित्त मंत्री जब देरी के लिए इमरान को जिम्मेदार ठहरा रहे थे तो उनका यही मतलब था।

तो क्या आईएमएफ से नहीं मिलेगा लोन?

डॉन के मुताबिक, एक तीसरे डिप्लोमेटिक सूत्र ने कहा, कि "जब तक इन दो चीजों - वित्तीय और राजनीतिक आश्वासन - को मंजूरी नहीं दी जाती है, तब तक आईएमएफ सौदे को फाइनल नहीं करेगा।" सूत्र ने कहा, कि "हां, यह सही है कि आईएमएफ और पाकिस्तान समझौते को अंतिम रूप देने के करीब हैं, लेकिन यह कहना मुश्किल है कि वे इस पर कब हस्ताक्षर करेंगे।" वहीं, अमेरिकी विदेश विभाग ने मंगलवार को कहा है, कि वो पाकिस्तान में ऊर्जा स्रोतों को विकसित करने में मदद करेगा। लेकिन, अमेरिकी मदद से पाकिस्तान को कुछ खास हासिल नहीं होगा, क्योंकि पाकिस्तान विनाशकारी परिस्थितियों की तरफ तेजी से बढ़ रहा है और इमरान खान बनाम शहबाज शरीफ के बीच की ये लड़ाई, देश को कंगल बनाकर ही छोड़ेगी।

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