Shehbaz Sharif Viral Video: 'इज्जत बेचकर मांग रहे हैं पैसा', शहबाज शरीफ ने बताया कैसे मांगी अरब देशों से भीख
Shehbaz Sharif on Pakistan economy: पाकिस्तान की कंगाली अब दुनिया से छिपी नहीं है, लेकिन इस बार खुद देश के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अपनी बेबसी का कच्चा चिट्ठा खोल दिया है। इस्लामाबाद में एक्सपोर्टर्स को संबोधित करते हुए शहबाज भावुक हो गए और कबूल किया कि देश को बचाने के लिए उन्हें और आर्मी चीफ आसिम मुनीर को दुनिया के सामने 'हाथ फैलाना' पड़ा।
उन्होंने माना कि कर्ज मांगना बेहद शर्मनाक है, लेकिन आर्थिक तंगी ने पाकिस्तान को इस मोड़ पर खड़ा कर दिया है जहां आत्मसम्मान से समझौता करना पड़ रहा है।

Shehbaz Sharif IMF statement: दोस्त देशों के सामने झुकना पड़ा
शहबाज शरीफ ने बताया कि देश की हालत इतनी खराब थी कि उन्हें और फील्ड मार्शल को कई देशों के चक्कर काटने पड़े। उन्होंने बताया, "हम सीधा उनके पास गए और अपनी जरूरत बताई कि हमें इतने बिलियन डॉलर दे दें ताकि हमारा IMF प्रोग्राम बच सके।" उन्होंने स्वीकार किया कि उन मित्र देशों ने पैसे देने से मना तो नहीं किया, लेकिन कर्ज मांगने की इस प्रक्रिया में उन्हें बहुत शर्मिंदगी उठानी पड़ी क्योंकि मांगने वाले का सिर हमेशा झुका रहता है।
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Pakistan debt crisis 2026: सम्मान और शर्तों का कड़वा समझौता
पीएम ने स्पष्ट कहा कि जब आप किसी से कर्ज मांगते हैं, तो अपनी मर्जी से शर्तें तय नहीं कर सकते। कर्ज देने वाले देश और संस्थाएं ऐसी 'अनुचित' शर्तें थोपते हैं, जिनका बोझ उठाना आम जनता के लिए नामुमकिन हो जाता है। उन्होंने स्वीकार किया कि बार-बार कटोरा फैलाने के कारण पाकिस्तान की साख दुनिया भर में गिरी है और देश को अपनी 'इज्जत-ए-नफ्स' यानी आत्मसम्मान की भारी कीमत चुकानी पड़ी है। यह एक कड़वा सच है जिसे अब स्वीकार करना पड़ रहा है।
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कंगाली के दलदल में धंसा पाकिस्तान
पाकिस्तान की आर्थिक हालत साल-दर-साल बदतर होती जा रही है। आंकड़ों की बात करें तो दिसंबर 2025 तक पाकिस्तान का कुल विदेशी कर्ज 52 बिलियन डॉलर के पार पहुंच चुका है। चीन, सऊदी अरब और IMF जैसे कर्जदाताओं के बोझ तले दबा यह देश अब अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए भी दूसरों पर निर्भर है। शहबाज ने माना कि दुनिया अब सिर्फ खैरात देने को तैयार नहीं है, बल्कि वे निवेश और ठोस सुधारों की मांग कर रहे हैं, जो पाकिस्तान के लिए एक बड़ी चुनौती है।
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पहले भी झलका था भीख मांगने का दर्द
यह पहली बार नहीं है जब शहबाज शरीफ ने अपनी लाचारी दिखाई हो। वे पहले भी कई बार कह चुके हैं कि उन्हें 'भीख का कटोरा' लेकर घूमना पसंद नहीं है, लेकिन देश की बदहाली उन्हें ऐसा करने पर मजबूर कर देती है। इस बार उनका बयान इसलिए बड़ा है क्योंकि उन्होंने खुलकर स्वीकार किया कि आतंकवाद और गलत नीतियों के कारण आज पाकिस्तान उस मुकाम पर खड़ा है, जहाँ उसे अपने अस्तित्व के लिए दुनिया के सामने हाथ फैलाना पड़ रहा है।












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