सरकार बनाने के बाद भीख मांगने सऊदी पहुंचे शहबाज शरीफ, प्रिंस सलमान के खैरात पर चलेगा पाकिस्तान!
Shehbaz Sharif Saudi Arab Visit: पाकिस्तान विदेश मंत्रालय ने कहा है, कि पाकिस्तानी प्रधान मंत्री शहबाज शरीफ देश के दीर्घकालिक सहयोगी सऊदी अरब के साथ द्विपक्षीय बैठक के लिए इस्लामाबाद से सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से मुलाकात करने के लिए रवाना हो गए हैं।
शनिवार से शुरू होने वाली रियाद की दो दिवसीय यात्रा फरवरी में गठबंधन सरकार बनाने के बाद दूसरी बार सत्ता में चुने जाने के बाद शहबाज शरीफ की पहली विदेश यात्रा होगी। जाहिर तौर पर, शहबाज शरीफ की कोशिश सऊदी अरब के प्रिंस से पैसे मांगना है, ताकि पाकिस्तान का कामकाज चल सके।

सऊदी अरब के दौरे पर शहबाज शरीफ
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा है, कि "उम्मीद है कि दोनों नेता आपसी हित के क्षेत्रों पर चर्चा करेंगे और क्षेत्रीय और वैश्विक विकास पर विचारों का आदान-प्रदान करेंगे।"
आइये 5 कारणों से जानते हैं, कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री आखिर सऊदी अरब क्यों गये हैं और वहां से उन्हें क्या हासिल होने वाला है?
1- पाकिस्तानी अखबार द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान ने बलूचिस्तान के चाघी जिले में स्थित रेको डिक कॉपर-गोल्ड प्रोजेक्ट में सऊदी अरब से 1 अरब डॉलर से ज्यादा का भारी निवेश हासिल करने के लिए एक व्यापक योजना तैयार की है। रेको खदान को दुनिया के सबसे बड़े अविकसित तांबे-सोने के क्षेत्रों में से एक माना जाता है, और सऊदी निवेश, पाकिस्तान की संघर्षरत अर्थव्यवस्था को वित्तीय सहायता प्रदान कर सकता है।
2- 3 अरब डॉलर के IMF बेलआउट के माध्यम से एक संप्रभु ऋण संकट को टालने के बाद से, पाकिस्तान को वित्तीय सहायता की सख्त जरूरत है। नकदी की कमी से जूझ रहे इस देश की नजर, कृषि से लेकर खदानों, खनिजों और विमानन जैसे उद्योगों में सऊदी निवेश पर टिकी है। शहबाज शरीफ चाहते हैं, कि सऊदी अरब इन सेक्टर्स में पाकिस्तान में निवेश करे। पिछले साल, पाकिस्तान ने ऊर्जा, आईटी, खनिज, रक्षा और कृषि क्षेत्रों से संबंधित परियोजनाओं में सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से पांच वर्षों के लिए 25 अरब डॉलर के निवेश की पुष्टि की थी।
3- पाकिस्तान और सऊदी अरब दोनों इस्लामिक सांस्कृतिक संबंध साझा करते हैं। देश के विदेश मंत्रालय ने घोषणा की है, कि शहबाज शरीफ के अपनी यात्रा के दौरान उमरा (पवित्र तीर्थयात्रा) करने और मस्जिद-ए-नबवी में नमाज अदा करने की उम्मीद है।
4- पड़ोसी देशों भारत और अफगानिस्तान के साथ पाकिस्तान के काफी खराब संबंध हो चुके हैं। हालांकि, भारत के साथ सीमा रेखा पर भले ही शांति है, लेकिन अफगानिस्तान सीमा पर हर दिन पाकिस्तानी सैनिक मारे जा रहे हैं। तालिबान ने साफ शब्दों में कह दिया है, कि टीटीपी पाकिस्तान का सिरदर्द है। लिहाजा, पाकिस्तान खाड़ी देश के साथ रक्षा संबंधों को मजबूत करना चाहता है। इस साल की शुरुआत में, पाकिस्तान की सेना ने सऊदी प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की और रक्षा प्रौद्योगिकियों में मध्य पूर्वी देश के निवेश को बढ़ावा देने और सहयोग बढ़ाने की योजना की घोषणा की थी।
5- पाक विदेश मंत्रालय ने कहा कि सऊदी अरब और पाकिस्तान के भी "क्षेत्रीय और वैश्विक विकास" पर विचारों का आदान-प्रदान करने की उम्मीद है।
पिछले साल, इस्लामिक संगठन (ओआईसी) की बैठक के दौरान सऊदी अरब के विदेश मामलों के मंत्री, प्रिंस फैसल बिन फरहान ने कहा था, कि जम्मू और कश्मीर का मुद्दा, क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता के लिए एक बड़ी चुनौती है और सऊदी शाही परिवार, इस चुनौती के समाधान के लिए इस संघर्ष में शामिल पक्षों के बीच मध्यस्थता की निरंतर कोशिश करता रहेगा। लिहाजा, माना जा रहा है, कि शहबाज शरीफ एक बार फिर से कश्मीर पर सऊदी का साथ मांग सकते हैं, लेकिन अब सऊदी अरब और भारत के संबंध इतने मजबूत हो चुके हैं, कि इस बात की संभावना कम है, कि कश्मीर को लेकर आश्वासन के अलावा पाकिस्तान को कुछ और मिल सकता है।












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