इस्लामिक देशों के सामने अमेरिका पर बरसे इमरान खान, अफगानिस्तान की मदद करना 'धार्मिक कर्तव्य'
पाकिस्तान में आज 57 इस्लामिक देशों के 'इस्लामिक सहयोग संगठन' यानि ओआईसी की बैठक का आयोजन किया गया था, जिसमें 57 इस्लामिक देशों की तरफ से प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया था।
इस्लामाबाद, दिसंबर 19: इस्लामाबाद में इस्लामिक सहयोग संगठन की बैठक के दौरान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने अमेरिका के साथ साथ दुनिया को बड़ी चेतावनी दी है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने दुनिया को चेतावनी देते हुए कहा कि, अगर अफगानिस्तान को फौरन दुनिया ने मदद नहीं दी, तो अफगानिस्तान की समस्या इंसानों द्वारा बनाई गई दुनिया की सबसे बड़ी समस्या बन जाएगी।

अफगानिस्तान पर ब्लैकमेलिंग?
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने रविवार को वैश्विक समुदाय के लिए एक स्पष्ट चेतावनी जारी करते हुए कहा कि, अफगानिस्तान संभावित रूप से "दुनिया में सबसे बड़ा मानव निर्मित संकट" बन सकता है अगर दुनिया की तरफ से अभी अफगानिस्तान को संभालने की कोशिश नहीं की गई। राजधानी इस्लामाबाद में पाकिस्तानी संसद भवन में पड़ोसी देश अफगानिस्तान के मौजूदा हालात पर चर्चा करने के लिए इस्लामिक सहयोग संगठन यानि ओआईसी के विदेश मंत्रियों की बैठक का आयोजन किया गया है, जिसमें बात करते हुए इमरान खान ने अफगानिस्तान के मुद्दे पर दुनिया को बड़ी चेतावनी दी है।

पाकिस्तान में इस्लामिक सम्मेलन
पाकिस्तान में आज 57 इस्लामिक देशों के 'इस्लामिक सहयोग संगठन' यानि ओआईसी की बैठक का आयोजन किया गया था, जिसमें 57 इस्लामिक देशों की तरफ से प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया था। जिसमें बोलते हुए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने अफगानिस्तान के मुद्दे पर मुस्लिम देशों का साथ मांगा है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने कहा कि, "चालीस साल पहले अफगानिस्तान की स्थिति पर ही चर्चा करने के लिए पाकिस्तान में ओआईसी का एक असाधारण सत्र आयोजित किया गया था''। पाकिस्तान में आयोजित इस बैठक में तालिबान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी को भी इमरान खान सरकार ने आमंत्रित किया था। आपको बता दें कि, इस्लामिक सहयोग संगठन यानि ओआईसी का सदस्य अफगानिस्तान नहीं है।

बैठक में तालिबान की तारीफ
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने इस्लामिक देशों के सामने एक तरह से तालिबान की जमकर तारीफ की है और कहा कि, पिछले कई सालों से अफगानिस्तान ने जितना भुगता है, उतना नुकसान किसी और ने नहीं उठाया है। उन्होंने कहा कि, तालिबान के नियंत्रण से पहले भी अफगानिस्तान की आधी आबादी गरीबी रेखा के नीचे थी और देश के बजट का 75 फीसदी हिस्सा विदेशी मदद से आता था। इमरान खान ने अफगानिस्तान के लिए 'चंदा' मागते हुए कहा कि, अफगानिस्तान जैसी स्थिति में कोई भी देश ढह जाएगा। इसके साथ ही इमरान खान ने अफगानिस्तान का मुद्दा उठाने वाले दूसरे वक्ताओं की भी तारीफ की है और कहा कि, "अगर दुनिया कार्रवाई नहीं करती है, तो यह सबसे बड़ा मानव निर्मित संकट होगा जो हमारे सामने सामने आ रहा है।" (फाइल फोटो)

मदद करना मुसलमानों का धार्मिक कर्तव्य
इस्लामिक सहयोग संगठन के सामने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने जमक मजहबी एजेंडा चलाने की कोशिश की और कहा कि, अफगानों की मदद करना इस्लामिक देशों का 'धार्मिक कर्तव्य' है। खास तौर पर अमेरिका को निशाने पर लेते हुए इमरान खान ने कहा कि, संयुक्त राज्य अमेरिका को चार करोड़ अफगान नागरिकों से तालिबान सरकार को "अलग" करना चाहिए। उन्होंने कहा, "वे 20 वर्षों से तालिबान के साथ संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन परेशान अफगानिस्तान के लोग हैं, इसीलिए तत्काल कार्रवाई करना महत्वपूर्ण है''। उन्होंने कहा कि तालिबान को अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए किए गए वादों को पूरा करना था, जिसमें एक समावेशी सरकार बनाना और महिलाओं के अधिकारों को सुनिश्चित करना शामिल था। (फाइल फोटो)

हर समाज में अलग अलग मानवाधिकार
इमरान खान ने इस्लामिक देशों के सामने अपने संबोधन के दौरान पूरी तरह से मानवाधिकार के उल्लंघन को लेकर तालिबान को क्लीनचिट दे दिया। उन्होंने कहा कि, ''मानवाधिकारों का विचार हर समाज में अलग है"। इमरान खान ने खैबर पख्तूनख्वा प्रांत का उदाहरण देते हुए कहा कि, "शहर की संस्कृति ग्रामीण क्षेत्रों में संस्कृति से पूरी तरह से अलग है। हम लड़कियों के माता-पिता को वजीफा देते हैं, ताकि वे उन्हें स्कूल भेज सकें। लेकिन अफगानिस्तान की सीमा से लगे जिलों में, अगर हम सांस्कृतिक मानदंडों के प्रति संवेदनशील नहीं हैं तो दुगनी रकम मिलने के बावजूद वे उन्हें स्कूल नहीं भेजेंगे। हमें मानवाधिकारों और महिला अधिकारों के प्रति संवेदनशील होना होगा।" (फाइल फोटो)












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