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पाकिस्तान की नई सरकार में पहले दिन ही दरार, मंत्रिमंडल को लेकर पीएम शहबाज शरीफ की माथापच्ची

विश्लेषकों का यह भी कहना है कि, शहबाज शरीफ पूरी आजादी के साथ काम नहीं कर पाएंगे, क्योंकि उन्हें अन्य विपक्षी दलों और अपने भाई के साथ सामूहिक एजेंडे पर काम करना होगा।

इस्लामाबाद, अप्रैल 12: पाकिस्तान में शहबाज शरीफ ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ले ली है, लेकिन सरकार गठन के पहले ही दिन इमरान सरकार को गिराने वाली सहयोगी पार्टी ने जिस तरह के तेवर दिखाए हैं, उसे देखकर लगता नहीं, कि पीएम शहबाज शरीफ के लिए सरकार चलाना आसान होगा। वहीं, मंत्रिमंडल गठन को लेकर भी पाकिस्तान की नई शहबाज शरीफ की सरकार माथापच्ची कर रही है।

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    सरकार बनते ही आई दरार

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    पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ से समर्थन वापस लेकर इमरान खान की सरकार को गिराने में काफी अहम भूमिका निभाने वाली एमक्यूएम-पी ने पहले ही प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को लेकर गहरी नाराजगी जताई है और एमक्यूएम-पी के वरिष्ठ नेता वसीम अख्तर ने गुरुवार को नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ पर अपनी पार्टी के साथ किए गए समझौते का उल्लेख नहीं करने के लिए जमकर निशाना साधा है। जियो न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, एमक्यूएम-पी का समर्थन प्राप्त करने के लिए एमक्यूएम-पी ने संयुक्त विपक्ष के साथ एक समझौता किया था और उसी मुताबिक सरकार चलाने के लिए समर्थन देने का ऐलान का था, लेकिन अब एमक्यूएम-पी प्रधाननमंत्री शहबाज शरीफ से काफी नाराज हो गई है।

    क्यों नाराज हुई एमक्यूएम-पी?

    क्यों नाराज हुई एमक्यूएम-पी?

    एमक्यूएम-पी पार्टी के वरिष्ठ नेता वसीम अख्तर ने इस्लामाबाद में पत्रकारों से कहा, कि ‘ये सरकार आज एमक्यूएम-पी के समझौते के कारण बनी है और शहबाज शरीफ को अपने भाषण में एमक्यूएम-पी के साथ किए गए समझौते का उल्लेख करना चाहिए था।‘ अख्तर ने कहा कि ‘बेनजीर आय सहायता कार्यक्रम को फिर से शुरू करने की घोषणा एक स्वागत योग्य कदम था, लेकिन जेयूआई-एफ, पीपीपी और पीएमएल-एन के साथ एमक्यूएम-पी के समझौते का भी उल्लेख किया जाना चाहिए था। अख्तर ने कहा, ‘मैं अपना विरोध दर्ज कर रहा हूं, क्योंकि शहबाज शरीफ एमक्यूएम-पी के समर्थन के कारण प्रधानमंत्री हैं।‘ दरअसल, इमरान सरकार को गिराने में काफी अहम भूमिका निभाने वाली एमक्यूएम-पी को नये प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ना ही एक बार शुक्रिया कहा और ना ही किस ‘समझौते' के आधार पर उसका सहयोग लिया गया है, उसका ही जिक्र किया गया है, लिहाजा एमक्यूएम-पी पार्टी शहबाज शरीफ से काफी ज्यादा नाराज है।

    मंत्रिमंडल पर माथापच्ची

    मंत्रिमंडल पर माथापच्ची

    वहीं, पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शहबाज शरीफ ने सरकार का गठन तो कर लिया है, लेकिन मंत्रिमंडल कैसा होगा, इसको लेकर भी तमाम सहयोगियों के बीच माथापच्ची की जा रही है। सरकार में शामिल हर सहयोगी पार्टी को ‘मलाईदार' विभाग ही चाहिए। डेली जंग की एक रिपोर्ट के अनुसार, शहबाज शरीफ की सरकार में शामिल सभी पार्टियां मंत्रालय मिलने की उम्मीद कर रही हैं। सूत्रों के मुताबिक. कैबिनेट में पीएमएल-एन के पास 12 मंत्रियों के साथ बहुमत होगा। वहीं, बिलावल भुट्टो की पार्टी पीपीपी को सात और जेयूआई-एफ को चार मंत्रालय दिए जाएंगे। इस बीच, एमक्यूएम-पी के दो और एएनपी, जम्हूरी वतन पार्टी और बलूचिस्तान अवामी पार्टी को भी एक-एक मंत्रालय दिए जाने की संभावना है।

    कौन-कौन नेता बन सकते हैं मंत्री

    कौन-कौन नेता बन सकते हैं मंत्री

    जियो न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, शहबाज शरीफ की पार्टी पीएमएल-एन के ख्वाजा आसिफ, साद रफीक, खुर्रम दस्तगीर, अहसान इकबाल, मरियम औरंगजेब, शाइस्ता परवेज मलिक, राणा सनाउल्लाह और मुर्तजा जावेद के कैबिनेट में शामिल होने की संभावना है। वहीं, निर्दलीय उम्मीदवार मोहसिन डावर और असलम भूतानी और पीएमएल-क्यू के तारिक बशीर चीमा को भी कैबिनेट में शामिल किए जाने की संभावना है। सीनेट में सदन के नेता के लिए आजम नजीर तरार का नाम भी विचाराधीन है। वहीं, पीपीपी सीनेट से शेरी रहमान या मुस्तफा नवाज खोखर को मंत्रालय मिल सकता है। वहीं, बिलावल भुट्टो-जरदारी अगले विदेश मंत्री हो सकते हैं, जबकि शाजिया मारी का नाम भी कैबिनेट स्लॉट के लिए विचाराधीन है। पिछले हफ्ते एक इंटरव्यू के दौरान पीपीपी अध्यक्ष ने कहा था कि पार्टी नई सरकार में उनकी भूमिका तय करेगी।

    बिलावल भुट्टो को विदेश मंत्रालय

    बिलावल भुट्टो को विदेश मंत्रालय

    पाकिस्तानी मीडिया ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि, बिलावल भुट्टो का अगला विदेश मंत्री बनना करीब करीब तय है और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी को विदेश मंत्री के रूप में नियुक्त किए जाने की संभावना है। हालांकि, एक इंटरव्यू के दौरान 33 वर्षीय बिलावल भुट्टो ने इन संभावनाओं से फिलहाल इनकार कर दिया है और कहा है कि, उनकी पार्टी को फैसला करना है, कि सरकार में उनकी क्या जिम्मेदारी होगी। बिलावल भुट्टो ने इमरान सरकार की विदेश मंत्रालय और राष्ट्रीय सुरक्षा समिति (एनएससी) को विवादास्पद बताते हुए उसकी जमकर आलोचना की थी और उन्होंने कहा कि, पीटीआई के चार साल के शासन के दौरान पाकिस्तान को काफी नुकसान पहुंचा है।

    जरदारी बनेंगे अगले राष्ट्रपति?

    जरदारी बनेंगे अगले राष्ट्रपति?

    पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स में पिछले महीने ही दावा किया गया था, कि इमरान खान की सरकार गिरने के बाद विपक्ष की तरफ से सामूहिक सरकार का गठन किया जाएगा और बिलावल भुट्टो को देश का अगला विदेश मंत्री बनाया जा सकता है, जबकि, मरियम नवाज खुद देश की गृहमंत्री बन सकती हैं। वहीं, पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री आसिफ अली जरदारी को देश को अगला राष्ट्रपति बनाया जा सकता है। हालांकि, देश का वित्तमंत्री कौन होगा, इसको लेकर अभी तक कुछ भी फैसला नहीं किया गया है और पाकिस्तान की वर्तमान आर्थिक स्थिति को देखते हुए ज्यादातर नेता वित्तमंत्रालय स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं, क्योंकि कई नेताओं का मानना है कि, इस वक्त वित्तमंत्री बनना आग से खेलने के बराबर है।

    शहबाज शरीफ के सामने चुनौतियां

    शहबाज शरीफ के सामने चुनौतियां

    विश्लेषकों का यह भी कहना है कि, शहबाज शरीफ पूरी आजादी के साथ काम नहीं कर पाएंगे, क्योंकि उन्हें अन्य विपक्षी दलों और अपने भाई के साथ सामूहिक एजेंडे पर काम करना होगा। जेल से छूटने के बाद से नवाज पिछले दो साल से लंदन में रह रहे हैं, जहां वहां इलाज करवा रहे हैं। पाकिस्तान के वरिष्ठ पत्रकार नजिम सेठी ने एक इंटरव्यू के दौरान कहा कि, 'शहबाज शरीफ क्या... अभी किसी भी प्रधानमंत्री के लिए देश संभालना काफी ज्यादा मुश्किल है।' वहीं, सरकार गठन के पहले ही दिन सरकार में शामिल एक पार्टी ने जिस तरह की नाराजगी दिखाई है, उसे देखते हुए आसानी से समझा जा सकता है, कि शहबाज शरीफ सरकार को संभालेंगे या फिर काम करेंगे, उनके लिए तय करना काफी मुश्किल रहने वाला है।

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