पाकिस्तान के लिए आज ऐतिहासिक दिन, कुछ ही देर में अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग, इमरान के पास इक्का बाकी
शुक्रवार की रात एआरवाई न्यूज से बात करते हुए, पाकिस्तानी सूचना मंत्री फवाद चौधरी ने कहा कि, भले ही अविश्वास प्रस्ताव एजेंडे में है, लेकिन, शनिवार को मतदान नहीं होने की संभावना है।
इस्लामाबाद, अप्रैल 09: पाकिस्तान में इमरान खान की सत्ता रहेगी या जाएगी? कुछ ही देर में पाकिस्तान नेशनल असेंबली में इस बात का फैसला हो जाएगा। सभी की निगाहें आज नेशनल असेंबली पर टिकी हैं, जो गुरुवार के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुरूप प्रधानमंत्री इमरान खान के खिलाफ महत्वपूर्ण अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान करने के लिए तैयार है। लेकिन, माना जा रहा है, कि इमरान खान के पास अभी इक्का बाकी है और आज फिर से वोटिंग नहीं होने दिया जाएगा।
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‘नहीं छोड़ेंगे मैदान’
जबकि, ये पूरी तरह से साफ है, कि नेशनल असेंबली में इमरान खान के लिए अपनी सरकार को बचाना करीब करीब असंभव है, और उन्होंने निचले सदन में अपना बहुमत खो दिया है, लेकिन, सत्ताधारी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) अभी भी अडिग है, कि वह विपक्ष के लिए मैदान नहीं छोड़ेगी और उसने उनके लिए चीजों को कठिन बनाने की कसम खाई है। हो सकता है, चाहे वह मतदान प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न करना हो या विपक्ष के उम्मीदवार शहबाज शरीफ को सदन के नए नेता के रूप में चुनने से रोकना हो। पाकिस्तान के सूचना मंत्री फवाद चौधरी के अनुसार, सरकार विधानसभा में 'धमकी देने वाली' केबल या उसकी सामग्री पेश करेगी और स्पीकर से इस मुद्दे पर बहस के लिए कह सकती है।

मतदान होने की संभावना काफी कम
शुक्रवार की रात एआरवाई न्यूज से बात करते हुए, पाकिस्तानी सूचना मंत्री फवाद चौधरी ने कहा कि, भले ही अविश्वास प्रस्ताव एजेंडे में है, लेकिन, शनिवार को मतदान नहीं होने की संभावना है। उन्होंने कहा कि जहां सुप्रीम कोर्ट ने 9 अप्रैल को बुलाए गए सत्र में मतदान कराने का निर्देश दिया था, इसका मतलब यह नहीं है कि यह उसी तारीख को होगा। वहीं, पाकिस्तान के वरिष्ठ पत्रकारों का मानना है कि, इमरान खान अभी और भी चालें चल सकते हैं और इमरान खान का साफ मकसद है, कि वो संसद के अंदर इस तरह से खुद को ‘जलील' नहीं करना चाह रहे हैं।

डिप्टी स्पीकर के खिलाफ भी अविश्वास प्रस्ताव
एक अन्य महत्वपूर्ण कदम में, विपक्ष ने शुक्रवार को डिप्टी स्पीकर कासिम सूरी के खिलाफ एक अविश्वास प्रस्ताव पेश किया है, जिसमें तीन आरोप शामिल हैं, जिनमें से प्रमुख 3 अप्रैल के विवादास्पद फैसले को जारी करना है, जिसे बाद में सुप्रीम कोर्ट ने असंवैधानिक घोषित कर दिया था। पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) एमएनए और पूर्व डिप्टी स्पीकर मुर्तजा जावेद अब्बासी ने सूरी के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के साथ-साथ इसे वोट देने की अनुमति के लिए नेशनल असेंबली सचिवालय को प्रस्तुत किया था। प्रस्ताव में, विपक्ष ने श्री सूरी पर "नियमों, संसदीय प्रथाओं, लोकतांत्रिक मानदंडों और परंपराओं और यहां तक कि संवैधानिक प्रावधानों का बार-बार उल्लंघन" करने का आरोप लगाया है।

विपक्ष की क्या है रणनीति?
विपक्षी सूत्रों ने डॉन को बताया कि, अपने अविश्वास प्रस्ताव को सफल बनाने के लिए और नेशनल असेंबली में आवश्यक संख्या हासिल करने के लिए विपक्ष इमरान खान के बागी सांसदों का इस्तेमाल नहीं करेगी। विपक्ष को डर है, कि अगर इमरान खान के 22 बागी सांसद सरकार के खिलाफ वोट डालते हैं, तो उनकी सदस्यता जा सकती है, लिहाजा, विपक्ष इमरान खान से समर्थन वापस लेने वाली पार्टियों के जरिए ही उनकी सरकार को गिराएगी। वहीं, पीएमएल-एन और पीपीपी के नेताओं ने दावा किया कि उन्होंने शनिवार की बैठक के लिए अपनी रणनीति तैयार की है और उन्होंने अपने सदस्यों को निर्देश दिया है, कि अगर सरकार की तरफ से सदस्यों ने अशांति पैदा करने के लिए उन्हें उकसाने के लिए कुछ कदम उठाए तो वे शांत और धैर्यवान रहें।

लंबे-लंबे भाषण देंगे मंत्री
डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, इमरान खान की पार्टी ने तय किया है, कि सरकार के मंत्री आज नेशनल असेंबली में अपना भाषण देंगे और उनके भाषण काफी लंबे लंबे होंगे, ताकि वक्त बर्बाद कर मतदान प्रक्रिया को लंबा किया जा सके। पीएमएल-एन के महासचिव अहसान इकबाल ने कहा कि, प्रधानमंत्री के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर सदस्यों को अपना वोट डालने से रोकने का कोई भी प्रयास गलत होगा। उन्होंने कहा कि, "अदालत की अवमानना" के लिए जैसा कि एससी ने अपने फैसले में स्पष्ट रूप से कहा था कि संकल्प पर मतदान शनिवार को होना चाहिए।

इमरान बोले- मंजूर नहीं फैसला
प्रधान मंत्री इमरान खान ने शुक्रवार को राष्ट्र को संबोधित किया और कहा कि वह पाकिस्तान में "विदेशी सरकार" की स्थापना को बर्दाश्त नहीं करेंगे और अगर ऐसा होता है तो वह समर्थन के लिए जनता की ओर रुख करेंगे। एक लाइव टेलीकास्ट के दौरान इमरान खा ने कहा कि, "हम एक ऐसा राष्ट्र नहीं हैं जिसे टिशू पेपर की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है"। अविश्वास प्रस्ताव पर अपना रुख दोहराते हुए, उन्होंने कहा कि वह कभी भी "आयातित सरकार" को स्वीकार नहीं करेंगे और जनता से उनके निर्णय के लिए आशान्वित होंगे।












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