पाकिस्तान में नया फरमान, ‘चांद नजर आया’ कहना पड़ेगा महंगा, झूठी जानकारी हुई तो देने होंगे 10 लाख
पाकिस्तान में चांद देखे जाने की झूठी जानकारी देना महंगा पड़ सकता है। त्योहारों के समय कई बार चांद देखने के गलत दावे किए जाते हैं। इस पर रोक लगाने के लिए ये बिल लाया गया है।

पाकिस्तान ने बुधवार को संसद में 'रुएत-ए-हिलाल बिल 2022' पेश किया। इस बिल का उद्देश्य चांद देखने की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करना है। इस बिल के पारित होने के बाद अब कोई भी चांद से संबंधित झूठी जानकारी नहीं पाएगा।
कानून और न्याय राज्य मंत्री शहादत अवान ने धार्मिक मामलों के मंत्री की अनुपस्थिति में रुएत-ए-हिलाल बिल 2022 पेश किया गया। हालांकि ये कानून बनने से पहले विधेयक को सीनेट द्वारा मंजूरी देनी होगी।
पाकिस्तान में चांद देखने का विवाद हर साल धार्मिक त्योहारों से पहले होता है। नए बिल के तहत चांद दिखने की घोषणा फेडरल रूएट-ए-हिलाल कमेटी के चेयरपर्सन या चेयरपर्सन द्वारा अधिकृत कमेटी के किसी सदस्य द्वारा ही की जा सकती है।
आपको बता दें कि मुस्लिमों से जुड़े कई त्योहार ईद-उल-फितर, ईद-उल-अजहा और रमजान आदि चांद पर निर्भर होते हैं। चांद दिखने के बाद ही त्योहार मनाया जाता है। लेकिन कई बार सोशल मीडिया पर कुछ शरारती तत्व चांद दिखाई दिए बिना ही इसके देखे जाने का ऐलान कर देते हैं।
इस बिल में कहा गया है कि, "चंद्रमा देखने के लिए संघीय, प्रांतीय और जिला समितियों के अलावा कोई भी समिति, इकाई या संगठन, चाहे किसी भी नाम से जाना जाता हो, पूरे पाकिस्तान या किसी भी हिस्से में काम नहीं करेगा। वो चांद देखने का जिम्मेदार नहीं है।"
अगर ये बिल पारित हो जाता है तो गैरमान्यता प्राप्त संस्थाओं या किसी व्यक्ति द्वारा अगर चांद देखने का ऐलान किया गया, तो उस पर जुर्माना लगाया जाएगा। सिर्फ इतना ही नहीं, बल्कि उसे जेल की सजा भी काटनी पड़ेगी।
बिल के मुताबिक अगर किसी व्यक्ति या संस्था ने चांद देखने की झूठी जानकारी दी है, तो उसके ऊपर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। सिर्फ इतना ही नहीं, बल्कि तीन साल सजा का प्रावधान भी किया गया है।
इसके अलावा, अगर कोई न्यूज चैनल, अखबार या कहें इलेक्ट्रॉनिक मीडिया हाउस चांद देखे जाने की गलत जानकारी आवाम को देता है, तो उसके ऊपर 10 लाख रुपये का जुर्माना ठोका जाएगा। इतना ही नहीं, चांद से संबंधित झूठी जानकारी देने पर मीडिया हाउस के लाइसेंस तक रद्द किए जा सकते हैं।
नए बिल के तहत, प्रत्येक प्रांत, इस्लामाबाद, गिलगित-बाल्टिस्तान, आज़ाद जम्मू और कश्मीर में रुएत-ए-हिलाल समितियाँ होंगी जिनमें संघीय स्तर पर मौलवी और संबंधित अधिकारी शामिल होंगे। ऐसी समितियों का गठन जिला स्तर पर भी किया जाएगा।












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