Pakistan Lockdown: इस्लामाबाद में लगा लॉकडाउन, स्कूल-ऑफिस-कारखाने सब बंद, जनता दे रही मुनीर को गालियां
Pakistan Lockdown: अपनी राजनीतिक हसरतों को पूरा करने के लिए पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार और आर्मी चीफ आसिम मुनीर किसी भी हद तक गिर सकते हैं इसमें कोई दो राय नहीं है। पिछले 10 दिनों से वे अपनी कूटनीति को सफल दिखाने के लिए इस्लामाबाद की जनता का तेल निकाल रहे हैं। वहीं जनता भी उनकी हरकतों से त्रस्त होकर अब गालियां देने लगी है।
स्कूल-दुकाने और ऑफिस बंद
दरअसल इस्लामाबाद में इस समय ऐसा माहौल बना हुआ है जैसे फिर से कोरोना लॉकडाउन लग गया हो, लेकिन इसकी वजह कोई वायरस नहीं है। असल कारण है अमेरिका-ईरान शांति वार्ता, जिसके लिए राजधानी को हाई-सिक्योरिटी जोन में बदल दिया गया है। शहर की सड़कें खाली दिख रही हैं, स्कूल और दुकानें बंद हैं, और सरकारी कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम करने के निर्देश दिए गए हैं। यहां तक की बोर्ड्स के एग्जाम टाल दिए गए और बच्चे अब इंतजार कर रहे हैं।

मजदूरों का काम बंद, कई लोग एक ही जगह फंसे
इस स्थिति का सबसे ज्यादा असर आम लोगों पर पड़ा है। कई मजदूरों का काम बंद हो गया है, जबकि कुछ लोग एक ही जगह फंसे हुए हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, और इस वजह से लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
पीस टॉक टली, लेकिन पाबंदियां जारी
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की यात्रा रद्द होने के बाद शांति वार्ता स्थगित हो गई थी। वजह बताई गई कि ईरान बातचीत में शामिल नहीं हो रहा। इसके बावजूद इस्लामाबाद में सुरक्षा पाबंदियां खत्म नहीं हुईं। रेड ज़ोन में कड़ी सुरक्षा है, सड़कें बंद हैं, और स्कूल-कॉलेज अभी भी बंद पड़े हैं।
सड़कें बंद, आवाजाही पर असर
हाल के दिनों में विदेशी डेलीगेशन और अमेरिकी कार्गो विमानों की आवाजाही के लिए शहर की कई मुख्य सड़कों को बंद कर दिया गया है। ये पाबंदियां पहले दौर की वार्ता के समय से लागू हैं और अब तक हटाई नहीं गई हैं, जिससे आम लोगों को भारी परेशानी हो रही है। पिछली पीस टॉक को हुए 10 दिन से ऊपर हो चुके हैं जिसमें युद्ध तो नहीं रुका लेकिन इस्लमाबाद की जनता एक ही जगह ठहरी रह गई।
खाने के पड़े लाले, किराया नहीं दे पा रहे लोग
18 अप्रैल को सरकार के आदेश के बाद इस्लामाबाद और रावलपिंडी में कई गरीब मजदूरों को उनके हॉस्टलों से निकाल दिया गया, क्योंकि वे किराया नहीं दे पा रहे थे। अब पीस टॉक के लगातार टलने से उनकी मुश्किलें और बढ़ गई हैं। लोगों के मन में सवाल है कि यह स्थिति आखिर कब खत्म होगी।
अस्पताल कर्मचारी की परेशानी
पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के हेल्थ ऑफिसर आरिज अख्तर ने स्थानीय मीडिया को बताया कि हालात काफी अफरा-तफरी वाले हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग दूर-दराज से आए हैं, उन्हें रुकने के लिए रिश्तेदारों और दोस्तों से मदद मांगनी पड़ रही है। अख्तर ने आगे कहा कि ऐसा लग रहा है जैसे लोग पिंजरे में कैद हैं। काम पर नहीं जा पा रहे और जिनके पास पैसे नहीं हैं, वे हॉस्टल में ही फंसे हुए हैं। इस वजह से मानसिक तनाव भी बढ़ रहा है।
रोजमर्रा की जिंदगी ठप
ऑफिस कर्मचारी ज़ैनब अली उस्मानखिल ने बताया कि रेड ज़ोन बंद होने से लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी ठप हो गई है। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, दुकानें बंद हैं और ट्रांसपोर्ट महंगा हो गया है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति काफी परेशान करने वाली है। न अपनी मर्जी से कहीं जा सकते हैं और न ही किसी को बुला सकते हैं।
छोटे धंधों की टूटी कमर
छोटे व्यवसायियों की हालत भी खराब है। इस्लामाबाद में एक छोटी ज्वैलरी शॉप चलाने वाले एक शख्स ने नाम न बताने की शर्त पर विदेशी मीडिया को बताया कि बाजार में ग्राहक ही नहीं आ रहे। उन्होंने कहा कि सरकार को समझना चाहिए कि एक दिन की तालाबंदी भी गरीबों के लिए बहुत भारी पड़ती है। दूसरी तरफ इस धंधे से जुड़े मजदूर और छोटे कारीगर खाने को तरस रहे हैं। ये एक किस्म का लॉकडाउन है जो बिना तैयारी के लोगों पर थोप दिया गया।
पीस टॉक दोबारा शुरू होने की उम्मीद नहीं
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अगर ईरान कोई ठोस प्रस्ताव देता है तो शुक्रवार तक बातचीत फिर से शुरू हो सकती है। हालांकि अभी भी स्थिति अनिश्चित बनी हुई है। यानी पीस टॉक दोबारा कब शुरू होगी, कोई नहीं जानता।
आम जनता पर भारी पड़ रही कूटनीति
कुल मिलाकर, अमेरिका-ईरान के बीच चल रही कूटनीतिक खींचतान का सबसे ज्यादा असर आम लोगों पर पड़ रहा है। इस्लामाबाद में जारी यह सुरक्षा लॉकडाउन लोगों की जिंदगी, रोजगार और मानसिक स्थिति पर भारी पड़ रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि वार्ता कब शुरू होगी और हालात कब सामान्य होंगे।
इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।












Click it and Unblock the Notifications