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पाकिस्तान पर यूरोपियन देशों ने कसी नकेल, इमरान खान ने मुस्लिम देशों से एक साथ आने का किया आह्वान

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने इस्लामिक देशों को इस्लामोफोबिया के खिलाफ एक साथ आने की अपील की है।

इस्लामाबाद, मई 04: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने इस्लामोफोबिया के खिलाफ मुस्लिम देशों को एक साथ आने की अपील की है। सोमवार को इमरान खान ने ओआईसी यानि आग्रेनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कॉर्पोरेशन के सदस्य देशों को इस्लामोफोबिया के खिलाफ एक साथ आने की अपील करते हुए कहा है कि ईशनिंदा के खिलाफ सभी इस्लामी ताकतें एक साथ आए। इमरान खान ने इस्लामिक देशों को एक साथ आने की अपील उस वक्त की है जब यूरोपियन यूनियन ने पाकिस्तान पर सख्ती बरतनी शुरू कर दी है।

इस्लामिक देशों से अपील

इस्लामिक देशों से अपील

सोमवार को ओआईसी की बैठक के बाद इमरान खान ने इस्लामाबाद में इस्लामिक देशों के राजदूतों से मुलाकात की। जिसमें उन्होंने इस्लामोफोबिया से पार पाने और आपस में विश्वास बढ़ाने पर बात की। आपको बता दें कि ओआईसी की स्थापना 1969 में की गई थी, जिसमें विश्व के सभी इस्लामिक देश शामिल हैं। इमरान खान ने इस्लामिक देशों से साथ आने की अपील उस वक्त की है जब यूरोपियन देशों ने पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर होने वाले अत्याचार को लेकर पाकिस्तान से सवाल पूछना शुरू कर दिया है। पिछले हफ्ते यूरोपियन यूनियन ने बैठक के दौरान पाकिस्तान को दिए गये व्यापारिक वरीयता को लेकर समीक्षा करना शुरू कर दिया है, जिसका जबाव देने के लिए अब इमरान खान ने मुस्लिम देशों से इस्लामोफोबिया के खिलाफ एक साथ आने की अपील की है।

यूरोपियन यूनियन का प्रस्ताव

यूरोपियन यूनियन का प्रस्ताव

दरअसल, पिछले दिनों यूनाइटेड नेशंस और कुछ अमेरिकन रिपोर्ट्स में कहा गया है कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों को काफी प्रताड़ित किया जा रहा है और अगवा कर उनका धर्म परिवर्तन करवाया जाता है। इसके साथ ही ईशनिंदा के नाम पर पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों को जेल में डाल दिया जाता है और फिर उन्हें प्रशासन के जरिए प्रताड़ित किया जाता है। जिसके बाद यूरोपियन यूनियन की पार्लियामेंन्ट्री बैठक में पाकिस्तान को व्यापारिक वरीयता दिए जाने को लेकर समीक्षा किए जाने की बात की गई है। यूरोपियन देश पाकिस्तान की ईशनिंदा कानून के खिलाफ हैं। यूरोपियन संसद की बैठक में पाकिस्तान के खिलाफ प्रस्ताव काफी ज्यादा बहुमत से स्वीकार कर लिया गया है। इस प्रस्वात के तहत ईशनिंदा, धार्मिक कट्टरता, अल्पसंख्यकों के खिलाफ लगातार बढ़ता अत्याचार और पाकिस्तान में अल्पसंख्यक आबादी के खिलाफ मानवाधिकार उल्लंघन के चलते पाकिस्तान को व्यापार में रियायत खत्म करने की बात कही गई है। अगर पाकिस्तान की व्यापारिक वरीयत यूरोपियन यूनियन खत्म कर देता है तो पाकिस्तान में टेक्सटाइल इंडस्ट्री पूरी तरह बैठ जाएगी और पाकिस्तान की संसदीय रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान में टेक्सटाइन इंडस्ट्री से करीब 2 करोड़ लोग जुड़े हुए हैं।

इस्लामोफोबिया पर जागरूकता

पिछले साल भी इमरान खान ने इस्लामिक देशों को इस्लामोफोबिया पर एक साथ आने की अपील की थी लेकिन उनकी अपील पर किसी भी इस्लामिक देश ने ध्यान नहीं दिया। यहां तक की तुर्की ने भी पाकिस्तान की अपील को खारिज कर दिया था। जिसके बाद एक बार फिर से इमरान खान ने ये अपील की है। दरअसल, पाकिस्तानी पत्रकारों की मानें तो इमरान खान के खिलाफ देश में लगातार बढती महंगाई को लेकर गुस्सा बढ़ता जा रहा है। पाकिस्तान में बिजली बिल कुछ दिनों बाद 14 रुपये प्रति यूनिट से ज्यादा हो जाएगी, वहीं महंगाई दर भी बढ़कर 11 प्रतिशत के रिकॉर्ड को पार कर गया है। विश्व के किसी भी देश में महंगाई दर 11 प्रतिशत नहीं है। वहीं पाकिस्तान में चीनी सवा सौ रुपये किलो बिक रही है तो अंडे की कीमत 25 रुपये प्रति पीस से ज्यादा है। वहीं, पिछले दिनों तहरीक-ए-लब्बैक नाम की पार्टी ने फ्रांस के नाम पर पाकिस्तान में जमकर हिंसा की थी और माना जा रहा है कि पाकिस्तान में करीब 30 लाख लोगों का समर्थन तहरीक-ए-लब्बैक के पास है, लिहाजा 'इस्लाम खतरे में है' इसका बात कर इमरान खान महंगाई और अपने खिलाफ उठ रही आवाजों से लोगों का ध्यान भटकाना चाहते हैं।

'मुस्लिमों के खिलाफ घृणा'

'मुस्लिमों के खिलाफ घृणा'

इमरान खान ने अपनी तकरीर के दौरान कहा कि 'दुनियाभर के देशों में मुस्लिमों के खिलाफ घृणा पैदा किया जा रहा है और पैगंबर मुहम्मद साहब के बारे में गलत बात बोले जाते हैं, जिसके खिलाफ दुनिया के सभी मुस्लिम देशों को एक साथ आना चाहिए और ऐसी ताकतों के खिलाफ आवाज बुंलद करनी चाहिए।' इसके साथ ही इमरान खान ने कहा कि विश्व में ईशनिंदा के खिलाफ कठोर कानून बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि 'इस्लाम को कट्टरता और आतंकवाद से जोड़ा जाता है और मुस्लिमों को किनारे पर धकेला जा रहा है। अभिव्यक्ति की आजादी की आड़ में इस्लामिक उपदेशों का तिरस्कार किया जाता है, जिससे दुनिया भर में मौजूद 1.5 अरब मुस्लिमों की भावनाएं आहत होती हैं'। इमरान खान ने कहा कि 'दुनिया को बताना जरूरी है कि हम कुरान और पैगंबर मोहम्मद से कितनी मोहब्बत करते हैं'

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