'हिन्दुओं के साथ नहीं रह सकते'... जिन्ना ने मुस्लिमों के लिए बनाया पाकिस्तान, जिसका भविष्य 75 सालों में जल गया
इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ ने दावा किया है, कि पाकिस्तान में चल रहे प्रदर्शन में अभी तक उसके 47 कार्यकर्ताओं की मौत हुई है, जबकि एक हजार से ज्यादा लोग घायल हुए हैं।

Pakistan News: मोहम्मद अली जिन्ना ने विभाजन को लेकर सबसे बड़ी तर्क यही दी थी, कि हिन्दुओं की ज्यादा आबादी वाले देश में मुसलमानों का मिलकर एक साथ रहना संभव नहीं है, इसीलिए भारत के दो टुकड़े होंगें और दूसरे टुकड़े का नाम होगा पाकिस्तान।
1947 में भारत दो हिस्सों में बंट गया और दूसरा हिस्सा बना पाकिस्तान, जो मुस्लिमों का, मुस्लिमों के लिए, मुस्लिमों के द्वारा चलने वाला देश बना, लेकिन आज साबित हो गया, कि जिन्ना गलत थे। भारत में 25 करोड़ से ज्यादा मुसलमान 100 करोड़ से ज्यादा हिन्दुओं के साथ रह रहे हैं, लेकिन 23 करोड़ की आबादी वाला पाकिस्तान, जहां कुछ लाख ही हिन्दू हैं, वो 75 सालों में कई बार जला है।
यानि, मुस्लिमों का, मुस्लिमों के लिए, मुस्लिमों के द्वारा चलने वाला, जिन्ना के शासन का ये मॉडल फेल हो गया है। पाकिस्तान का भविष्य शायद इस गृहयुद्ध के साथ जल रहा है।

जल रहा जिन्ना का देश पाकिस्तान
भारत से टूटकर अलग देश बनने वाला पाकिस्तान 1971 में खुद टूट चुका है और जो हालात बन रहे हैं, शायद बाकी बचा पाकिस्तान भी कई हिस्सों में टूट जाए। देश बनने के बाद से ही पाकिस्तान, भारत के खिलाफ जिहाद में जुट गया और वो जिहाज आज पाकिस्तान को निगलने के लिए तैयार है।
पाकिस्तान में इस्लामिक सरकार की स्थापना की गई, जिसमें संविधान के ऊपर शरिया को रखा गया। अब आलम ये है, कि देश में ना संविधान बचा और ना ही शरिया। शरिया मांगने वाले एक तरह बंदूक उठा रहे हैं, तो संविधान बचाने की मांग करने वाले अपना माथा पीट रहे हैं। देश टूटने के कगार पर पहुंचता जा रहा है।
और ऐसा होने की गंभीर वजहें हैं, क्योंकि पाकिस्तान का अगले महीने डिफॉल्ट होना करीब करीब तय हो गया है। पाकिस्तान को आईएमएफ से लोन मिलने की सारी उम्मीदें खत्म हो गई हैं और इंटरनेशनल एजेंसी मूडी ने साफ शब्दों में कहा है, कि आईएमएफ प्रोग्राम लागू नहीं हुआ, तो पाकिस्तान डिफॉल्ट कर जाएगा।

अगर वाकई पाकिस्तान और IMF के बीच की बातचीत फेल हो गई, तो इसके गंभीर असर होंगे। पाकिस्तानी मुद्रा डॉलर के मुकाबले 50 प्रतिशत और गिर जाएगा। फिलहाल, डॉलक के मुकाबले पाकिस्तानी मुद्रा 280 के पार है, जो डिफॉल्ट होते ही 400 के करीब पहुंच जाएगी। वहीं, डिफॉल्ट होने के बाद पाकिस्तान की महंगाई 75 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ जाएगी। पाकिस्तान में इस वक्त एक लीटर पेट्रोल की कीमत 282 रुपये है, और आटा करीब 200 रुपये किलो है, ऐसे में 75 प्रतिशत महंगाई बढ़ने का मतलब पाकिस्तान में त्राहिमाम मचने जैसा होगा।
वर्ल्ड बैंक ने भी पाकिस्तान को कर्ज की अगली किश्त देने से इनकार कर दिया है। वर्ल्ड बैंक से पाकिस्तान को 450 मिलियन डॉलर का लोन मिलने वाला था, लेकिन वर्ल्ड बैंक ने कर्ज की इस किश्त को आईएमएफ कार्यक्रम से जोड़ दिया। जिसका मतलब ये हुआ, कि अगर आईएमएफ प्रोग्राम की बहाली होती है, तभी पाकिस्तान को वर्ल्ड बैंक से लोन मिलेगा, अन्यथा लोन नहीं मिलेगा।

पाकिस्तान को कितना कर्ज चुकाना है?
पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार में सिर्फ 4.5 अरब डॉलर बचे हैं, जबकि पाकिस्तान करीब एक साल पहले ही विदेशी सामानों की खरीददारी पर रोक लगा चुका है। पाकिस्तान को जून महीने में करीब 6 अरब डॉलर के विदेशी कर्ज का भुगतान करना है और आईएमएफ प्रोग्राम फेल होने के बाद ये भुगतान करना, पाकिस्तान के लिए करीब करीब असंभव हो गया है। इसीलिए, पाकिस्तान इस साल जून में डिफॉल्ट कर जाएगा।
अगर किसी तरह अगर पाकिस्तान जून के कर्ज का भुगतान कर भी देता है, फिर भी पाकिस्तान की समस्याएं खत्म नहीं होंगी, क्योंकि पाकिस्तान को साल 2026 तक, यानि अगले 3 सालों में 77.5 अरब डॉलर का कर्ज चुकाना है। पाकिस्तान को अप्रैल 2023 से जून 2026 तक 77.5 अरब अमेरीकी डालर के बाहरी ऋण का पुनर्भुगतान करना है।
यूनाइटेड स्टेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ पीस (यूएसआईपी) की रिपोर्ट में कहा गया है, कि अप्रैल 2023 से जून 2026 तक पाकिस्तान को 77.5 अरब डॉलर का बाहरी कर्ज चुकाने की जरूरत है, और जिस पाकिस्तान की कुल अर्थव्यवस्था ही सिर्फ 350 अरब डॉलर की है, उसके लिए ये कर्ज चुकाना नामुमकिन है।

पाकिस्तान का भविष्य कैसा होगा?
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अंधकारमय... पाकिस्तान का भवष्य अंधकारमय होगा, इससे कोई इनकार नहीं कर सकता है। पिछले IMF स्टाफ स्तर के मिशन को पाकिस्तान से गये लगभग 100 दिन बीत चुके हैं और दोनों पक्षों ने अभी तक एक प्रारंभिक सौदा नहीं किया है, जिसका मतलब ये हुआ, कि पाकिस्तान को अब आईएमएफ से लोन मिलने की संभावना 90 प्रतिशत से ज्यादा कम हो गई है।
जेपी मॉर्गन के विश्लेषक मिलो गुनासिंघे ने कहा, "पाकिस्तान में अब जो कुछ हो रहा है, वो राजनीतिक शांति की संभावना को काफी कर देता है, जिसका असर आईएमएएफ से बातचीत पर पड़ेगा।" आईएमफ ने पाकिस्तान को लोन देने के लिए जो शर्तें रखी थीं, उनमें एक शर्त ही ये था, कि पाकिस्तान की राजनीतिक पार्टियों को एक मेज पर आना होगा, जिसके आसार इमरान खान की गिरफ्तारी के साथ खत्म हो गये हैं।
पाकिस्तान की यह पहली पीढ़ी हो सकती है, जो पाकिस्तान को डिफॉल्ट होता हुआ देखेगी। लिहाजा, पाकिस्तान की नई पीढ़ी पर इसका गंभीर असर पड़ेगा। पाकिस्तान के अंदर आतंकवाद में भारी उछाल आ सकता है और लोगों के हाथों में नौकरी नहीं होने की वजह से, वो गलत रास्ते की तरफ मुड़ सकते हैं। यह उन युवाओं के लिए विशेष रूप से हानिकारक होगा, जो नौकरी, बाजार या व्यवसाय या उद्यमिता में प्रवेश करने के लिए खुद को तैयार कर रहे हैं।
अगर पाकिस्तान डिफॉल्ट होता है, तो पाकिस्तान में जो चंद कंपनियां बची हैं, वो भी बंद होने की स्थिति में पहुंचने लगेंगी। अगर कंपनियां बंद नहीं भी होती हैं, तो उनमें बड़े पैमाने पर छंटनी होंगे और पाकिस्तान आर्थिक संकट में बुरी तरह से समा जाएगा। पाकिस्तान में जो हालात होंगे, उसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती है और वो स्थिति, गृहयुद्ध से भी ज्यादा घातक होगा।












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