पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार में अब बचे सिर्फ 3 अरब डॉलर, एक हफ्ते में बनेगा श्रीलंका, काउंटडाउन शुरू

पाकिस्तान और आईएमएफ के बीच कर्ज को लेकर बातचीत चल रही है। पहले पाकिस्तान ने सर्कुलर डेट मैनेजमेंट प्लान के जरिए आईएमएफ को झांसा देने की कोशिश की थी, लेकिन आईएमएफ ने उसे खारिज कर दिया है।

IMF PAKISTAN

Pakistan News: पाकिस्तान अब आर्थिक बदहाली में फंसने से सिर्फ एक हफ्ते ही दूर रहा है और गुरुवार को पाकिस्तानी रुपया अबतक के सबसे नीचले स्तर तक पहुंचने के बाद अब पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार में सिर्फ 3 अरब डॉलर ही बचा है। लिहाजा, अब पूरी आशंका बन गई है, अगले एक हफ्ते में पाकिस्तान का हाल श्रीलंका के जैसा हो जाएगा और पाकिस्तान में जरूरी सामानों के लिए तहलका मच जाएगा।

पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार घटा

पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार घटा

स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान (एसबीपी) के आंकड़ों के मुताबिक, 27 जनवरी को खत्म हुए सप्ताह में बाहरी ऋण अदायगी के कारण पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार 16 प्रतिशत घटकर 3.09 अरब डॉलर रह गया है, जिसके बाद अब पाकिस्तान के पास मुश्किल से, ज्यादा से ज्यादा 2 सप्ताह के ही सामानों के आयात को कवर करने के लिए पैसा रह गया है। पाकिस्तान के इन्वेस्टमेंट फर्म आरिफ हबीब लिमिटेड (एएचएल) के मुताबिक, फरवरी 2014 के बाद से पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार सबसे कम है और पाकिस्तान अब कुछ ही दिनों के आयात को कवर कर सकता है, यानि पाकिस्तान के पास दूसरे देशों से सामान खरीदने के लिए पैसे खत्म हो रहे हैं, जो कि 1998 के बाद से सबसे कम आयात कवर है। एसबीपी ने कहा है, कि पाकिस्तान के कॉमर्शियल बैंकों के पास अब 5.65 अरब डॉलर बचा है, जबकि देश का कुल तरल भंडार 8.74 बिलियन डॉलर ही बचा है।

देश की बिगड़ रही है स्थिति

देश की बिगड़ रही है स्थिति

एएचएल में अनुसंधान प्रमुख ताहिर अब्बास ने कहा, कि "संकट से बचने के लिए देश को डॉलर के ताजा प्रवाह और आईएमएफ कार्यक्रम की जल्द से जल्द बहाली की सख्त जरूरत है।" आपको बता दें, कि पाकिस्तान रुके हुए बेलआउट कार्यक्रम के तहत बहुत जरूरी धन जारी करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के साथ बातचीत कर रहा है। अगर आईएमएफ पाकिस्तान को एक अरब डॉलर का कर्ज देता है, तो फिर पाकिस्तान दूसरे वित्तीय संस्थानों से भी लोन हासिल कर सकता है, लेकिन अगर आईएमएफ इनकार करता है, तो फिर पाकिस्तान को कहीं और से धन नहीं मिलेंगे। आईएमएफ की स्पेशल टीम फिलहाल पाकिस्तान में ही है और शहबाज सरकार ने मंगलवार को आईएमएफ के साथ आर्थिक मंदी को दूर करने के लिए डिज़ाइन किए गए 7 अरब डॉलर के बेलऑउट पैकेज को अनलॉक करने की कोशिश में है। पाकिस्तान और आईएमएफ अधिकारियों के बीच 9 फरवरी तक बातचीत चलेगी, लेकिन आईएमएफ की शर्तों को मानना, पाकिस्तान सरकार के लिए अत्यधिक मुश्किल होगा। पाकिस्तान के योजना मंत्री भी कह चुके हैं, कि अगर आईएमएफ की सभी शर्तों को मान लिया गया, तो देश में दंगे शुरू हो जाएंगे।

आईएमएफ की अत्यधिक कड़ी शर्तें

आईएमएफ की अत्यधिक कड़ी शर्तें

आईएमएफ ने पाकिस्तान को बेलऑउट पैकेज देने के लिए कई शर्तों का निर्धारण किया हुआ है, जिसमें पाकिस्तान की करेंसी के एक्सचेंज रेट बाजार में ओपन करने,ईंधन और बिजली पर सारी सब्सिडी को पूरी तरह से समाप्त करने और देश में टैक्स स्लैब को सख्त करने जैसी शर्तें शामिल हैं। लेकिन, दिक्कत ये है, कि पिछले हफ्ते जैसे ही सरकार ने करेंसी एक्सचेंज को ओपन किया, पाकिस्तानी मुद्रा सिर्फ 2 दिनों में करीब 35 प्वाइंट गिरकर 270 को पार कर गया, जिससे देश में महंगाई आग की तरह फैल गई। वहीं, सरकार ने रसोई गैस की कीमत में 16 प्रतिशत की वृद्धि की है, वहीं पाकिस्तान सरकार अगर बिजली सब्सिडी हटाती है, तो फिर देश में हड़कंप मच जाएगा। लेकिन, शहबाज शरीफ सरकार के पास कोई और विकल्प नहीं हैं। गुरुवार को खुले बाजार में डॉलर एक दिन पहले के 275 रुपये की तुलना में 275.50 रुपये पर बंद हुआ है।

बाजार से निवेशकों का टूटा दिल

बाजार से निवेशकों का टूटा दिल

वहीं, जियो न्यूज की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कैपिटल मार्केट एक्सपर्ट साद अली ने कहा, कि सरकार द्वारा IMF को पेश किए गए सर्कुलर डेट मैनेजमेंट प्लान को खारिज करने की खबरों से बाजार का भरोसा डगमगा गया है। अली ने कहा, कि इन रिपोर्टों ने चल रही सरकार-IMF वार्ता में अड़चन की संभावना के बारे में संदेह पैदा किया है। इस बीच, IMF ने पाकिस्तान के संशोधित सर्कुलर डेट मैनेजमेंट प्लान को खारिज कर दिया है। IMF ने संशोधित सर्कुलर डेट मैनेजमेंट प्लान को "अवास्तविक" कहा है, जिसे कुछ गलत धारणाओं के आधार पर बनाया गया है। माना जा रहा है, कि पाकिस्तान सरकार आईएमएफ को झांसा देना चाहती थी, जो फेल हो गई। वहीं, द न्यूज इंटरनेशनल की रिपोर्ट के मुताबिक, बिजली क्षेत्र के नुकसान को सीमित करने के लिए पाकिस्तान सरकार को अपने नीतिगत नुस्खे में बदलाव करना होगा।

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