Pakistan News: आतंकी घटनाओं की कवरेज पर लगी रोक, वजह जानकर आप भी कहेंगे- बिल्कुल ठीक किया
Pakistan Banned Tv Channels: अधिसूचना में कहा गया है कि समाचार चैनल केवल लीड लेने और क्रेडिट लेने के लिए बेसिक जर्नलिज्म के नियमों और नैतिकता की अनदेखी करते हुए बड़े से प्रसारण का सहारा लेते हैं।

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पाकिस्तान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया रेगुलेटरी अथॉरिटी (PEMRA) ने देश की समाचार चैनलों को टेररिस्ट अटैक को कवर करने पर रोक लगा दिया है। इस बात की जानकारी पाकिस्तान में स्थित द न्यूज इंटरनेशनल न्यूज पेपर रिपोर्ट के हवाले से दिया गया है। मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि यह नया निर्देश टीवी चैनलों को इलेक्ट्रॉनिक मीडिया आचार संहिता 2015 का पालन करने के लिए पहले के आदेश के बाद आया है। PEMRA ने अपना बयान में कहा है कि क्राइम सीन की लाइव तस्वीरें और वीडियो चला कर के चैनल जर्नलिस्टिक एथिक्स का उल्लंघन करते हैं।
3 महीने में बढ़ीं आतंकी घटनाएं
PEMRA का ये निर्देश पिछले 3 महीनों में देश में बढ़ी आतंकी घटनाओं के बाद सामने आया है। अधिसूचना में कहा गया है कि समाचार चैनल केवल लीड लेने और क्रेडिट लेने के लिए बेसिक जर्नलिज्म के नियमों और नैतिकता की अनदेखी करते हुए बड़े से प्रसारण का सहारा लेते हैं। रेगुलेटरी बॉडी ने कहा कि बार-बार दिशा-निर्देश दिए जाने के बावजूद सैटेलाइट टीवी चैनल क्राइम प्लेस की लाइव इमेज को टेलीकास्ट करके चैनल जर्नलिज्म नैतिकता का उल्लंघन करते हैं। चैनल्स सबसे पहले और सबसे तेज खबर दिखाने की होड़ में लग जाते हैं।
पत्रकारिता का सिद्धांत भूल जाते हैं पत्रकार
ब्रेकिंग न्यूज दिखाने की रेस में वो पत्रकारिता के सिद्धांतों को भूल जाते हैं। PEMRA ने कहा कि क्राइम सीन से जुड़ी तस्वीरें दिखाना पत्रकारिता के सिद्धांतों का उल्लंघन है। टीवी चैनल्स के कर्मचारी अपनी जान को खतरे में डालते हैं, साथ ही उनके घटनास्थल पर होने से रेस्क्यू ऑपरेशन में भी दिक्कत आती है।
अराजकता पैदा करने वाली रिपोर्टिंग
PEMRA ने यह भी नोट किया कि इस तरह की रिपोर्टिंग घरेलू और विदेशी दर्शकों के बीच अराजकता पैदा करती है। ऐसी घटनाओं की रिपोर्टिंग से आतंकवादियों को मीडिया को राजनीतिक विज्ञापन के रूप में उपयोग करने का लाभ मिलता है और उनके अभियान का प्रचार-प्रसार करके उनके वैचारिक उद्देश्यों को पूरा करता है। इसके अलावा, इस तरह की घटनाओं का मीडिया कवरेज आतंकवादियों को एक विशिष्ट समूह को अपने प्रतिद्वंद्वियों की तुलना में अपनी ताकत और दुस्साहस दिखाने की अनुमति देकर एक संगठनात्मक लाभ देता है।
कई समस्याओं से जूझ रहा पाकिस्तान
बता दें कि पाकिस्तान आर्थिक बदहाली से उबरने की कोशिशों में जुटा हुआ है लेकिन आतंकवाद और राजनीतिक अशांति को और बढ़ा रहे हैं। देश की राजनीति पर सेना के ऐतिहासिक नियंत्रण के साथ-साथ शहबाज शरीफ प्रशासन अपदस्थ प्रधानमंत्री इमरान खान के साथ अपनी लंबी लड़ाई में व्यस्त है। ऐसे समय में जब कई पाकिस्तानी रोटी नहीं खरीद सकते, नवंबर में एक विरोध मार्च का नेतृत्व करते हुए पैर में गोली खाने वाले इमरान खान नए राष्ट्रीय चुनावों का आह्वान कर रहे हैं। ऐसे में निवेशक चिंतित हैं कि पाकिस्तान में हाल के आतंकवादी हमले बार-बार देश के वित्त मंत्री के बदलाव से न सिर्फ उग्रवाद की वापसी होगी बल्कि देश आर्थिक रूप से भी बर्बाद हो जाएगा।
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