पाकिस्तान में सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का फैसला पलटा, शहबाज नहीं कराएंगे चुनाव, गृहयुद्ध की आशंका तेज
पाकिस्तान में राजनीतिक और आर्थिक संकट गहराया हुआ है और इमरान खान की लोकप्रियता देखते हुए शहबाज शरीफ और उनका गठबंधन किसी भी हालत में चुनाव कराने के मूड में नहीं है। सेना भी इमरान के खिलाफ है।

Pakistan Political Crisis: पाकिस्तान को इस वक्त पैसे के साथ-साथ राजनीतिक स्थिरता की सख्त जरूरत है। हालांकि, देश अब तीव्र आर्थिक संकट के बीच गृहयुद्ध की तरफ भी बढ़ता जा रहा है, क्योंकि शहबाज शरीफ की सरकार ने देश की नेशनल असेंबली में एक प्रस्ताव लाकर सुप्रीम कोर्ट के पंजाब में चुनाव कराने का फैसले को पलट दिया है।
यानि, शहबाज शरीफ की सरकार पंजाब और खैबर पख्तूनख्वा में चुनाव कराएगी या नहीं, तय नहीं है। जबकि, इमरान खान ने चेतावनी दे दी है, कि अगर 90 दिनों के अंदर चुनाव नहीं होते हैं, तो फिर अंजाम बुरे होंगे।
नेशनल असेंबली ने गुरुवार को पंजाब चुनाव पर सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय बेंच के "अल्पसंख्यक" फैसले को खारिज करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया है और कहा है, कि अब प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और उनका मंत्रिमंडल सुप्रीम कोर्ट के फैसले को मानने के लिए बाध्य नहीं है।
यानि, शहबाज सरकार और सुप्रीम कोर्ट आमने सामने है। रिपोर्ट्स बताते हैं, कि इमरान खान की लोकप्रियता से घबराया शहबाज शरीप का गठबंधन पीडीएम, किस भी हालत में चुनाव कराने के लिए तैयार नहीं है।
पाकिस्तान में इस साल लोकसभा चुनाव भी होने हैं, लेकिन सरकार के रवैये को देखकर यही लगता है, कि सरकार लोकसभा चुनाव भी नहीं कराएगी। जाहिर सी बात है, तय वक्त पर चुनाव नहीं कराना, देश की संसद, जनता और संविधान के साथ धोखा होगा, लेकिन पाकिस्तान में कुछ भी हो सकता है।

पाकिस्तान संकट की वजह क्या है?
पाकिस्तान की सर्वोच्च अदालत ने देश के चुनाव आयोग के अक्टूबर में चुनाव कराने के आदेश को असंवैधानिक करार दिया और 14 मई को चुनाव कराने के आदेश दिए। जबकि, शहबाज शरीफ सरकार का कहना है, कि ये फैसला सुप्रीम कोर्ट के 3 सदस्यीय बेंच ने सुनाया है, जिसे सरकार स्वीकार नहीं करेगी।
बिलावल भुट्टो ने कहा, कि अगर सुप्रीम कोर्ट बाध्य करता है, तो देश में मार्शल लॉ लगाने की नौबत आ जाएगी। बिलावल ने सुप्रीम कोर्ट के जजों पर इमरान खान का साथ देने का आरोप लगा दिया।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला शहबज सरकार के लिए बहुत बड़ा झटका है, क्योंकि वो चुनाव में काफी देरी करना चाहती है। दूसरी तरफ इमरान खान जल्द चुनाव चाहते हैं, ताकि पंजाब जीतकर वो पूरे देश में अपने पक्ष में माहौल कर सके, लेकिन पाकिस्तान की सेना इमरान खान के खिलाफ है।
संविधान के मुताबिक, पंजाब विधानसभा, जिसे 13 जनवरी को भंग कर दिया गया था, वहां 90 दिनों के भीतर चुनाव कराने की आवश्यकता है। हालांकि, राजनीतिक तकरार के कारण समय सीमा को पूरा करना संभव नहीं हो सका और सुप्रीम कोर्ट ने थोड़ी देर की अनुमति दी है। लेकिन शहबाज शरीफ चुनाव करवाना ही नहीं चाहते हैं और ये बात इमरान खान जानते हैं, लिहाजा उन्होंने 90 दिनों का अल्टीमेटम दे दिया है।

शहबाज शरीफ क्यों नहीं चाहते हैं चुनाव
शहबाज शरीफ और उनकी सरकार में शामिल गठबंधन दलों को सबसे बड़ा डर चुनावी हार का है। इमरान खान देश की जनता को अपने पक्ष में करने में कामयाब साबित हुए हैं और तमाम सर्वे रिपोर्ट्स बताते हैं, कि अगर आज चुनाव हुए, तो इमरान खान एकतरफा जीत हासिल करेंगे।
लिहाजा, सरकार अब कई तरह के बहाने बना रही है।
सरकार ने चुनाव नहीं कराने के पीछे देश की खराब सुरक्षा व्यवस्था का हवाला दिया है। सरकार का कहना है, कि उसके पास इतने पुलिस और सेना के जवान नहीं हैं, कि देश में चुनाव होने पर सुरक्षा दी जा सके।
पाकिस्तान सरकार ने मार्च के मध्य में "देश के भीतर और सीमाओं पर मौजूदा सुरक्षा स्थिति" का हवाला देते हुए, चुनाव के दौरान सुरक्षा में किसी भी तरह की मदद की पेशकश से इनकार किया था। यानि, बिना सुरक्षा व्यवस्था के चुनाव आयोग कैसे चुनाव कराए।
पाकिस्तान के पूर्व प्रधान मंत्री इमरान खान की गिरफ्तारी पर भारी हंगामा और देशव्यापी विरोध ने पाकिस्तान की सुरक्षा के लिए चुनौती और बढ़ा दी है। दूसरी तरफ पिछले कुछ महीनों में, खैबर पख्तूनख्वा और अफगानिस्तान की सीमा से लगे इलाकों में पुलिस को निशाना बनाकर कई आतंकी हमले किए गये हैं। फिर भी, चुनाव कराने के लिए ये बहाना बनाना, किसी के पल्ले नहीं पड़ रहा है।
लेकिन, सुप्रीम कोर्ट ने शहबाज शरीफ की सरकार को आदेश दिया है, कि वो चुनाव आयोग को सारी सुविधाएं मुहैया करनाए। जिसमें सुरक्षा व्यवस्था से लेकर चुनावी खर्च भी शामिल है।
लिहाजा, अब सरकार ने नेशनल असेंबली के जरिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश को ही पलट दिया है। यानि, सुप्रीम कोर्ट के फैसले को मानने से पाकिस्तान की सरकार ने इनकार कर दिया है, जिससे ये संदेश जाता है, कि सरकार खुद देश की सर्वोच्च अदालत के फैसले का सम्मान नहीं करती है और एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ये एक खतरनाक ट्रेंड की शुरूआत है।

पाकिस्तान की बदहाल आर्थिक व्यवस्था
पाकिस्तान करीब करीब दिवालिया हो चुका है और देश में हालात बद से बदतर हो रहे हैं और इसका सबसे ज्यादा असर गरीबों पर पड़ रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल कई वीडियो में लोगों को आटा लेने के लिए लड़ते देखा गया है। मुफ्त आटा लेने के लिए अभी तक 16 लोगों की मौत हो चुकी है।
जबकि पाकिस्तानी रुपया डॉलर के मुकाबले 287.85 तक गिर गया है। स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान के पास विदेशी मुद्रा भंडार 24 मार्च तक 4.2 बिलियन डॉलर था, जो तीन-चार सप्ताह के आयात के लायक है। हालांकि, आयात पर एक साल पहले ही प्रतिबंध लगा हुआ है। लिहाजा, देश के कई सेक्टर तबाह हो चुके हैं और लाखों लोग बेरोजगार हो गये हैं।
डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को पंजाब और खैबर पख्तूनख्वा की विधानसभाओं के चुनावों के लिए 10 अप्रैल तक चुनाव आयोग को 21 अरब रुपये का चुनाव कोष जारी करने का निर्देश दिया है।
अदालत ने यह भी चेतावनी दी है, कि "यदि धन उपलब्ध नहीं कराया गया है या कोई कमी रखी गई, तो जैसा भी मामला हो, तो अदालत उस अधिकारी, संबंधित मंत्री के खिलाफ आदेश दे सकती है।" यानि, सुप्रीम कोर्ट भी अड़ी हुई है, तो फिर सुप्रीम कोर्ट का फैसला सीधे प्रधानमंत्री के खिलाफ है। लिहाजा, नेशनल असेंबली का फैसला बड़ा या सुप्रीम कोर्ट का, ये बहस भी शुरू हो गई है। रिपोर्ट यही हैं, कि सरकार किसी भी हालत में चुनाव नहीं करवाएगी, लिहाजा ये संकट देश में या तो मार्शल लॉ लगवा सकता है, या फिर गृहयुद्ध करवा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना?
पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के सांसद मोहसिन लेघारी ने प्रस्ताव का विरोध करते हुए चेतावनी दी है, कि सदन एक खतरनाक रास्ते पर चल रहा है। उन्होंने सरकार पर अदालत की अवमानना का आरोप लगाया है।
पीटीआई नेता ने कहा, कि "संविधान सदन में न्यायपालिका के खिलाफ बोलने पर रोक लगाता है।" उन्होंने कहा कि प्रस्ताव पारित करके, सदन "सामूहिक रूप से अदालत की अवमानना कर रहा है।"
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उन्होंने आगे चेतावनी दी, कि सर्वोच्च न्यायालय के साथ एक "युद्ध" "बहुत खतरनाक" होगा और उन्होंने कहा कि ये प्रस्ताव जुनून के प्रवाह के तहत पेश किया गया है, जिसके खतरनाक अंजाम होंगे। यानि, इमरान खान की पार्टी एक कदम भी पीछे हटने वाली नहीं है, लिहाजा देश में राजनीतिक हालात और भी बदतर होंगे।
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