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Elections in Pakistan: पाकिस्तानी फौज नवाज शरीफ को PM पद पर करेगी इंस्टॉल.. दिल्ली का नजरिया क्या होगा?

Pakistan Elections 2024: पाकिस्तान में कल 12वें आम चुनाव के लिए वोट डाले जाएंगे और देश के करीब 12.85 करोड़ मतदाता, यानि देश की करीब आधी आबादी (कुल आबादी 24.1 करोड़) एक नई असेंबली और चार विधानसभाओं में सरकार चुनने के लिए वोट डालने जा रही है।

भारत के समान फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट प्रणाली के जरिए ही पाकिस्तान के नेशनल असेंबली के लिए 266 संसद सदस्य चुने जाएंगे, जबकि 60 सीटें महिलाओं और 10 सीटें अल्पसंख्यक समुदाय के लिऐ आरक्षित होती हैं। लेकिन इन आरक्षित सीटों पर चुनाव नहीं होता, बल्कि नेशनल असमेंबली में जो पार्टी जितनी सीटें जीतती हैं, उस अनुपात पर इन सीटों का बंटवारा होता है।

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लेकिन, भारत के लिहाज से पाकिस्तान में होने वाला चुनाव नागरिक सरकार और सेना के बीच शक्ति संतुलन के तरीके के बारे में हैं।

साउथ ब्लॉक यानि भारतीय विदेश मंत्रालय, सेना प्रमुख के बदलाव को पाकिस्तान में सत्ता का वास्तविक परिवर्तन मानता है, लोकतंत्रों के विपरीत, जहां चुनावों के कारण सत्ता का शांतिपूर्ण हस्तांतरण होता है।

इमरान को सेना ने त्यागा

पाकिस्तान की राजनीति में सेना का बहुत बड़ा दखल है और उसे अपने पसंदीदा उम्मीदवार को जिताने के लिए चुनावों में हेरफेर करने वाले के रूप में देखा जाता है। 2018 में, जब पिछली बार चुनाव हुए थे, सेना ने पीएमएल (एन) के नेता नवाज शरीफ की जगह लेने के लिए क्रिकेट आइकन से नेता बने इमरान खान को "चयनित" किया था।

नवाज शरीफ को दोषी ठहराए जाने के बाद इमरान को प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठाया गया, लेकिन नवाज शरीफ को देश छोड़ने की इजाजत दे दी गई।

लेकिन अब 6 सालों के बाद इमरान खान जेल में बंद हैं, सजा पर सजा सुनाई जा रही है और नवाज शरीफ को लेकर सेना ने तय किया है, कि उन्हें इस बार प्रधानमंत्री की कुर्सी पर इंस्टॉल किया जाएगा। 71 साल के इमरान खान को ऑफिसियल सीक्रेट लीक करने और तोशाखाना मामले में कुल मिलाकर 24 साल की सजा सुनाई गई है। इमरान खान को चुनाव लड़ने से रोक दिया गया है।

मई 2023 में इमरान की गिरफ्तारी के बाद उनकी पार्टी, पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया था। प्रदर्शनकारियों ने एक वरिष्ठ जनरल के घर सहित कई सैन्य प्रतिष्ठानों पर हमला किया और तोड़फोड़ की। लेकिन, इसके बाद सेना का डंडा चला और इमरान खान की पार्टी को खत्म करने की सेना ने मुहिम चलाई। इमरान खान के नंबर 2, यानि पूर्व विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी को भी 10 सालों की सजा सुनाई गई है। पीटीआई के सैकड़ों लोग गिरफ्तार हैं, जिन्हें जेल में बंद रखा गया है।

इमरान खान को अब उनकी पार्टी के एक बड़े हिस्से ने छोड़ दिया है, और जहांगीर तरीन और कुछ अन्य नेताओं ने सेना के आशीर्वाद से अपनी अलग पार्टी बना ली है।

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इंस्टॉल होने के लिए तैयार नवाज शरीफ

सेना के पसंदीदा उम्मीदवार एक बार फिर से 74 साल के तीन बार प्रधान मंत्री रहे नवाज शरीफ हैं, जिन्हें प्रधानमंत्री बनाने के लिए पाकिस्तानी संविधान में बदलाव किए गये, सुप्रीम कोर्ट ने अपना पुराना फैसला बदला, यानि नये सिरे से रास्ता बनाई गई। नवाज को पहले भी दो बार सेना सत्ता से हटा चुकी है। एक बार 1999 में, जब जनरल परवेज़ मुशर्रफ ने उनके खिलाफ तख्तापलट किया था, और फिर 2017 में पनामा पेपर लीक में नाम आने के बाद उन्हें इस्तीफा देना पड़ा और फिर उन्हें सजा सुनाई गई।

नवाज शरीफ को लेकर सबसे बड़ी बात कारोबार को लेकर उनका उदारवादी रवैया, भारत और अमेरिका को लेकर सकारात्मक रवैया, और उनके भाई शहबाज शरीफ का कुशल प्रशासन है, जो पिछले साल अगस्त तक प्रधान मंत्री थे।

जरदारी की महत्वाकांझा बाकी है

आसिफ अली जरदारी फिर से राष्ट्रपति बनना चाहते हैं, और उनके बेटे बिलावल भुट्टो जरदारी - जो इमरान खान की सरकार के पतन के बाद शहबाज शरीफ की पीएमएल (एन)-पीपीपी गठबंधन सरकार में विदेश मंत्री थे, वो प्रधान मंत्री बनना चाहते हैं।

लेकिन पीपीपी अब वह पार्टी नहीं रही, जो तब थी जब जरदारी की पत्नी बेनजीर भुट्टो के हाथों में पार्टी की कमान थी और 2008 में हत्या के बाद पीपीपी को भारी बहमुत हासिल हुई थी। पीपीपी का आधार अभी भी सिंध तक ही सीमित है, लिहाजा सिंध को छोड़कर दूसरे हिस्से में बिलावल को जनता का समर्थन ज्यादा नहीं है।

स्वतंत्र चुनाव की संभावना नहीं

पाकिस्तान की चुनाव पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों के मुताबिक, देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव होने की कोई उम्मीद नहीं है।

इमरान खान अभी भी बेहद लोकप्रिय हैं, लेकिन उनके कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया और परेशान किया गया, पीटीआई को उसके चुनाव चिह्न, क्रिकेट बैट का उपयोग करने से मना कर दिया गया और उनके उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने से रोकने की खबरें आई हैं।

पाकिस्तान के चुनाव आयोग, अदालतों और पाकिस्तानी सेना.. तीनों ने एक साथ इमरान खान पर डंडे चलाए और पाकिस्तानी मीडिया पर इमरान खान पर रिपोर्ट करने पर साफ रोक लगा दी गई।

नवाज को लेकर क्या सोचती है दिल्ली?

भारत के लिहाज से, ये चुनाव पहले से कहीं ज्यादा पूर्वानुमानित हैं। सेना ने अपनी पसंद स्पष्ट कर दी है, लिहाजा कल होने वाले चुनाव को पहले से ही इलेक्शन की जगह सलेक्शन कहा जा रहा है। पाकिस्तान की अवाम भी जान रही है, कि नवाज शरीफ की सरकार बनवाई जाएगी।

भारत के लिए, पाकिस्तानी आतंकवाद सबसे बड़ा मुद्दा रहा है, लेकिन नवाज शरीफ की सरकार बनने के बाद एक बार फिर से दोनों देशों के बीच की रूकी हुई बातचीत शुरू हो सकती है। बहुत ज्यादा संभावना इस बात को लेकर है, कि महंगाई कंट्रोल करने के लिए नवाज शरीफ सबसे पहले भारत के साथ कारोबार शुरू कर सकते हैं।

हालांकि, मई में भारत में भी चुनाव होने वाले हैं, लिहाजा दोनों देश भारत में अगली सरकार के चुने जाने तक का इंतजार कर सकते हैं। मई के बाद भारत में पांच साल के जनादेश वाली सरकार होगी, जबकि पाकिस्तान की नागरिक सरकार कुछ महीने पुरानी होगी। संभावित रूप से दोनों पक्षों के लिए अपने तनावपूर्ण संबंधों को सामान्य करने के लिए थोड़ा वक्त लेना होगा।

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