इमरान खान को धोखा देंगे या बने रहेंगे वफादार? PTI के निर्दलीय उम्मीदवारों के पास 3 दिनों की डेडलाइन
Pakistan Election Result: पाकिस्तान की ताकत आर्मी ने इमरान खान को पूरी तरह से अपंग बनाकर चुनावी मैदान में लड़ने के लिए छोड़ दिया था, ना उनकी पार्टी प्रचार कर सकती थी, ना पार्टी के पास चुनाव लड़ने के लिए चुनावी निशान था, ना इमरान खान के पास उम्मीदवारों को चुनने की आजादी... मगर, इमरान खान के आजाद उम्मीदवारों ने आर्मी को बुरी तरह से धो डाला है।
खबर लिखे जाने तक इमरान खान के 99 निर्दलीय उम्मीदवार जीते हैं, जबकि नवाज शरीफ की पीएमएल-एन के 70 उम्मीदवार जीते हैं, बिलावल भुट्टो की पीपीपी के 53 सांसद जीते हैं, एमक्यूएम पार्टी के 15 सांसद जीते हैं, जेयूआई-एफ के 2 उम्मीदवार और कुछ सीटें अन्य के खाते में गई हैं।

वहीं, जियो न्यूज ने सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट दी है, कि शहबाज शरीफ और बिलावल भुट्टो एक गठबंधन सरकार बनाने के लिए तैयार हो गये हैं, जिसे एमक्यूएम से समर्थन मिलेगा। ये तीनों मिलकर सरकार बनाने के लिए जरूरी 133 के आंकड़े को पार कर रहे हैं।
इमरान के निर्दलीय उम्मीदवार क्या करेंगे?
चूंकी सरकार का गठन हो रहा है, लिहाजा अब यह देखना बाकी है, कि पीटीआई के नाम पर अपनी सीटें जीतने वाले कितने निर्दलीय अपने जेल में बंद प्रमुख इमरान खान के प्रति वफादार बने रहेंगे, क्योंकि कानूनन वे पार्टी के अनुशासन का पालन करने के लिए बाध्य नहीं होंगे।
ध्यान देने वाली बात यह है, कि सफल उम्मीदवारों में कुछ ऐसे भी शामिल हैं, जिन्हें उनकी पार्टी के ज्यादा पसंदीदा उम्मीदवारों की अस्वीकृति के बाद ही टिकट दिया गया था।

नवाज शरीफ, जो सेना के पूरे समर्थन के बाद भी अकेले दम पर बहुमत हासिल करने में नाकाम हो गये हैं, पीटीआई के निर्दलीय उम्मीदवारों ने उनके अरमानों को ध्वस्त कर दिया है। लिहाजा, उन्होंने पहले ही संकेत दिया है, कि वह "देश को चलाने के लिए" निर्दलीयों के साथ हाथ मिलाने के लिए तैयार हैं।"
तो क्या इमरान खान के निर्दलीय उम्मीदवारों को तोड़ने की कोशिश की जाएगी?
पीपीपी अध्यक्ष बिलावल भुट्टो-जरदारी, जो खुद भी प्रधानमंत्री की सीट के लिए घोषित दावेदार हैं, उन्होंने उम्मीद जताई है, कि कई निर्दलीय उनकी पार्टी में शामिल हो सकते हैं। इस चुनाव प्रचार में बिलावल ने पीएमएल-एन, यानि नवाज शरीफ के साथ गठबंधन सरकार बनाने से इनकार कर दिया था।
लिहाजा, पाकिस्तान में अगले कुछ दिनों में व्यस्त राजनीतिक होने की उम्मीद है, और संभावना है, कि दोनों दल निर्दलीयों से संपर्क करेंगे और सरकार में हिस्सेदारी की पेशकश करेंगे। विशेषज्ञों का मानना है, कि मंत्रिस्तरीय विभागों के अलावा, उन्हें विभिन्न स्थायी समितियों की अध्यक्षता और संसदीय सचिवों के रूप में नियुक्तियों की पेशकश की जा सकती है - दोनों कार्यालय कई भत्तों और विशेषाधिकारों के साथ आते हैं।
लिहाजा, निर्दलीयों जीते सांसदों की वफादारी की परीक्षा के अलावा, यह पीटीआई के चेयरमैन बैरिस्टर गोहर अली के नेतृत्व की भी परीक्षा होगी, और कई लोग यह देखने के लिए कड़ी नजर रखेंगे, कि क्या वह अपनी ब्रिगेड की कमान संभालने में सक्षम हैं या नहीं?
इमरान खान के बाद चेयरमैन बैरिस्टर गोहर अली पीटीआई की कमान संभाल रहे हैं।

निर्दलीय उम्मीदवारों के लिए डेडलाइन
पाकिस्तान के चुनाव नियमों के मुताबिक, नियम 92(6) के तहत, स्वतंत्र उम्मीदवारों को अपनी जीत की अधिसूचना के बाद किसी पार्टी में शामिल होने के लिए तीन दिन का समय मिलेगा। वहीं, उनके पास एक अन्य विकल्,प जो उनके लिए उपलब्ध होगा, वह यह है, कि वे अपनी पसंद के किसी भी पार्टी से जुड़ने या नई पार्टी भी बना सकते हैं।
यदि निर्दलीय सांसद एकजुट रहते हैं और विपक्ष में बैठने का फैसला करते हैं, तो वे नेशनल असेंबली में विपक्षी नेता का पद हासिल करने के लिए आरामदायक स्थिति में होंगे।
नियम के एक प्रावधान में कहा गया है, "बशर्ते कि यदि स्वतंत्र उम्मीदवार किसी राजनीतिक दल के नेता को या राजनीतिक पार्टी में शामिल होने के लिए आवेदन करता है, तो उस राजनीतिक दल का नेता तुरंत एक पत्र के माध्यम से ऐसे उम्मीदवार के शामिल होने की सूचना (चुनाव) आयोग को देगा।"
अगर एक बार निर्दलीय सांसद, किसी पार्टी में शामिल हो जाता है, तो फिर उसके लिए उस पार्टी से फिर निर्दलीय सांसद बनकर बाहर निकलने का रास्ता बंद हो जाता है।
यानि, बिना किसी चुनावी निशान के इलेक्शन में जाने के बाद इमरान खान की निर्दलीय ब्रिगेट टेक्निकल लिहाज से कोई भी फैसला लेने के लिए स्वतंत्र हैं। लिहाजा, बड़ा सवाल ये है, कि क्या ये निर्दलीय सांसद अपने नेता इमरान खान के साथ वफादारी दिखाएंगे या फिर आर्मी के डंडे के डर से या लालच के डर से पाकिस्तानी क्रिकेट टीम के विश्वविजेता कप्तान को धोखा देंगे।












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