Explainer: इमरान खान की पार्टी के 90% उम्मीदवारों के नामांकन खारिज.. चुनाव से पहले ही कप्तान कैसे हुए Out!
Pakistan Election 2024: एक वक्त था, जब इमरान खान को पाकिस्तान की सेना के अंदर 'नीली आंखों वाला लड़का' कहा जाता था और 2018 में उन्हें प्रधानमंत्री बनाने के लिए पाकिस्तान की सेना ने चुनाव में धांधली के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए, लेकिन पांच सालों के बाद वक्त बदल गया है।
इमरान खान की किस्मत ने पलटी खाई और 2018 में प्रधानमंत्री बनने वाला 'कप्तान' आज जेल में बंद है और शायद यही सोच रहा होगा, कि अवाम ने उसे याद रखा है या भुला दिया है। चुनाव आयोग उनका नामांकन पत्र खारिज कर चुका है और 8 फरवरी को होने वाले चुनाव से इमरान खान बाहर किए जा चुके हैं।

उनकी पार्टी का चुनाव चिन्ह बैट छीना जा चुका है, जिसकी वजह से उनकी पार्टी के सभी उम्मीदवार अब निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं और इमरान खान की पार्टी के हर नेता का चुनाव चिन्ह अलग अलग है।
इमरान खान की राजनीति
1952 में पाकिस्तानी पंजाब के लाहौर में जन्मे, इमरान खान पहली बार एक क्रिकेटर के रूप में प्रसिद्ध हुए, जिन्होंने 1992 में अपनी राष्ट्रीय क्रिकेट टीम को एकमात्र वनडे विश्व कप जीत दिलाई। क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद उन्होंने पीटीआई की स्थापना की। लेकिन, 1996 में पार्टी की स्थापना करने के बाद से साल 2011 तक सीमित राजनीतिक सफलता ही मिली, और 2011 के बाद बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और बेरोजगारी संकट का मुद्दा उठाने के बाद धीरे धीरे उन्होंने पाकिस्तान की निराश युवाओं का ध्यान आकर्षित करना शुरू कर दिया।
2013 के चुनावों के बाद, इमरान ने चुनाव में बड़े पैमाने पर धांधली का आरोप लगाया, और धांधली के विरोध में इस्लामाबाद में एक महीने तक धरना दिया गया, लेकिन पेशावर में आर्मी पब्लिक स्कूल पर घातक हमले के बाद उन्होंने अपने आंदोलन को स्थगित कर दिया।
2018 के चुनावों से पहले इमरान की लोकप्रियता बढ़ती रही और फिर इतनी बढ़ गई, कि सेना की तरफ से बतौर प्रधानमंत्री की तरह प्रोजेक्ट किया जाने लगा। आम चुनावों में विवादास्पद जीत के बाद, उन्होंने गठबंधन सरकार बनाई और 18 अगस्त 2018 को पाकिस्ता के 22वें प्रधान मंत्री के रूप में शपथ ली।
सत्ता से बर्खास्तगी और आरोप-प्रत्यारोप
प्रधानमंत्री बनने के बाद एक साल तक तो इमरान खान के लिए सब ठीक रहा, लेकिन धीरे धीरे उनका बड़बोलापन बढ़ने लगा और वो सेना की आंख के किरकिरी बनने लगे।
कोविड महामारी के बाद पाकिस्तान अभूतपूर्व आर्थिक संकट में फंस गया और इमरान खान देश में बढ़ते घाटे के साथ-साथ अपने ही सहयोगियों के साथ मतभेद में फंस गये। अक्टूबर 2021 में नए आईएसआई चीफ की नियुक्ति को लेकर सरकार और सैन्य नेतृत्व के बीच गतिरोध बढ़ गया और जो सेना इमरान खान को सत्ता में लेकर आई थी, वही सेना अब इमरान खान के खिलाफ हो गई।
उन्हें सत्ता से बाहर करने के लिए, विपक्षी दलों ने एकजुट होकर पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (पीडीएम) शुरू किया, जिसने उनके खिलाफ अविश्वास विधेयक पेश किया। और 10 अप्रैल 2022 की आधी रात के तुरंत बाद इमरान का प्रधान मंत्री पद समाप्त हो गया।
इसके बाद, इमरान खान ने अपनी पार्टी के सदस्यों को नेशनल असेंबली में अपनी सीटों से इस्तीफा देने का निर्देश दिया और सत्तारूढ़ पीडीएम गठबंधन को जल्दी चुनाव कराने के लिए मजबूर करने के लिए पंजाब और खैबर पख्तूनख्वा की प्रांतीय विधानसभाओं को भंग करने की घोषणा की, लेकिन इस रणनीति का पाकिस्तान में कोई असर नहीं हुआ।
इससे हताशा बढ़ा और इमरान खान ने अमेरिका और पूर्व सेना प्रमुख कमर जावेद बाजवा पर जमकर हमला बोला और उन पर उनके खिलाफ साजिश रचने का आरोप लगाया। पद से हटाए जाने के बाद के महीनों में, पूर्व पीटीआई प्रमुख तोशाखाना मामले सहित कई मामलों में कई बार गिरफ्तारी से बचने में कामयाब रहे, जिसमें उन पर अवैध रूप से सरकारी उपहार बेचने का आरोप लगाया गया था।
अक्टूबर 2022 में, इमरान ने हक़ीक़ी आज़ादी (सच्ची आज़ादी) के लिए इस्लामाबाद तक एक लंबा मार्च शुरू किया, जिसमें इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल नदीम अंजुम की भारी आलोचना की और दो अन्य खुफिया अधिकारियों के इस्तीफे की मांग की।
उसी साल 3 नवंबर को, जैसे ही पीटीआई का काफिला वजीराबाद पहुंचा, इमरान खान के ऊपर गोली चला दी गई और गोलियां इमरान खान के पैरों पर लगी। जिसको लेकर इमरान खान ने आरोप लगाया, कि आईएसआई के ही इशारे पर उनकी हत्या की कोशिश की गई है।
सेना को हरा पाएंगे इमरान खान?
पाकिस्तान की सेना, जो किंगमेकर की भूमिका में है, देश के सबसे लोकप्रिय राजनेता और उनकी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) पार्टी को किनारे करने के लिए हर हथकंडा अपना रहे हैं। हाल के महीनों में, हजारों पीटीआई कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया है, दर्जनों पार्टी नेताओं ने लंबी पूछताछ के बाद इस्तीफा दे दिया, इमरान खान के नाम को मुख्यधारा के मीडिया से प्रतिबंधित कर दिया गया है।
जिसको लेकर वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया यूनिवर्सिटी में सेंटर फ़ॉर मुस्लिम स्टेट्स एंड सोसाइटीज़ की निदेशक समीना यास्मीन कहती हैं, कि "चुनाव हो रहे हैं, लेकिन मुझे गंभीर संदेह है कि वास्तविक लोकतंत्र या लोकतांत्रिक सिद्धांतों का पालन किया जा रहा है या नहीं।"
इमरान खान से उनका चुनाव चिन्ह बैट छिन चुका है, और अब उनके सभी उम्मीदवार अलग अलग चुनाव चिन्ह से चुनाव लड़ेंगे, जिससे देश की 40 प्रतिशत अनपढ़ आबादी, जिनके बीच इमरान खान काफी ज्यादा प्रसिद्ध हैं, उनके लिए इमरान खान की पार्टी के नेताओं को पहचानना काफी मुश्किल हो गया है।
पीटीआई के मुख्य प्रवक्ता और इमरान खान के पूर्व विशेष सहायक रऊफ हसन ने टाइम को बताया, कि "चुनाव चिन्ह निष्पक्ष चुनाव का एक अभिन्न अंग है, लेकिन चुनाव चिन्ह छीन लिए जाने से पार्टी दंतहीन हो चुकी है।"
इसके अलावा, पीटीआई उम्मीदवार, जो अलग अलग संसदीय सीटों से निर्दलीय चुनाव में खड़े हुए हैं, उनमें से कई प्रसिद्ध नेताओं के कागजात को गलत बताकर उनकी उम्मीदवारी रद्द कर दी गई है। इमरान खान की पार्टी के दर्जन भर से ज्यादा उम्मीदवारों के नामांकन खारिज कर दिए गये हैं, जिनका इलेक्शन में जीत तय माना जा रहा था।
टाइम की रिपोर्ट के मुताबिक, नामांकन दाखिल करने के लिए चुनाव आयोग जाने की जरूरत होती है और उम्मीदवार के व्यक्तिगत तौर पर पेश होने के सात साथ प्रस्तावक और अनुमोदक की भी जरूरत होती है। लेकिन ऐसी रिपोर्ट है, कि जिस दिन इमरान खान की पार्टी के किसी नेता को चुनाव आयोग जाना होता है, उस दिन प्रस्तावक या फिर अनुमोदक का अपहरण कर लिया गया।
टाइम मैग्जीन की रिपोर्ट के मुताबिक, इमरान खान की पार्टी के 90 प्रतिशत उम्मीदवारों के नामांकन पत्र खारिज हो चुके हैं। यानि, चुनाव से पहले ही इमरान खान को चुनाव से बाहर किया जा चुका है।
नवाज शरीफ के साथ पाकिस्तानी सेना
यह कोई रहस्य नहीं है, कि पाकिस्तान के सैन्य किंगमेकर्स ने नवाज़ शरीफ को अपना समर्थन दे दिया है, जिसका अंततः मतलब है, कि वह सत्ता में वापसी के लिए दावेदार हैं। लेकिन, इमरान खान की स्थायी लोकप्रियता का मतलब है, कि अधिक कठोर रणनीति की आवश्यकता होगी।
पीटीआई की सभी विपरीत परिस्थितियों और सत्ता में रहते हुए बेहद खराब शासन रिकॉर्ड के बावजूद, दिसंबर के गैलप जनमत सर्वेक्षण से पता चलता है, कि जेल में बंद इमरान खान की अनुमोदन रेटिंग 57% है, जबकि शरीफ के लिए यह 52% है। पीटीआई को भरोसा है, कि अगर निष्पक्ष लड़ाई में प्रतिस्पर्धा करने की अनुमति दी गई तो वे जीतेंगे।
पॉलिटिकल विश्लेषक यासमीन कहती हैं, " जमीनी स्तर पर इमरान खान काफी ज्यादा लोकप्रिया हैं और अगर इमरान खान उन्हें फर्नीचर को भी वोट देने के लिए कहते हैं, तो वो फर्नीचर को भी वोट दे देंगे।" कुल मिलाकर कहा जा सकता है, कि इमरान खान का खेल खत्म किया जा चुका है और पाकिस्तान में अगला प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ही होंगे।












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