पाकिस्तान में गिर सकती है शहबाज शरीफ की सरकार, दो सहयोगी पार्टियां नाराज, समर्थन ले सकती हैं वापस

अप्रैल महीने में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बनने वाले शहबाज शरीफ कैबिनेट में पेश किए गये एक बिल को लेकर मुसीबत में फंस गये हैं और दो अहम सहयोगियों ने सरकार से समर्थन वापस लेने की चेतावनी दी है।

Pakistan News: पाकिस्तान में पिछले एक साल से राजनीतिक उठापटक के बीच शहबाज शरीफ की सरकार बनने के बाद कुछ राजनीतिक स्थिरता दिखाई देने लगी थी, लेकिन अब शहबाज शरीफ की सरकार भी खतरे में दिखाई दे रही है। शहबाज सरकार को समर्थन देने वाली दो सहयोगी पार्टियों ने कैबिनेट की बैठक का बहिष्कार कर दिया है। पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मंगलवार को शहबाज शरीफ की कैबिनेट की बैठक थी, जिसमें दो सहयोगी पार्टियों ने हिस्सा लेने से इनकार कर दिया और सरकार से समर्थन वापस लेने की चेतावनी दी है।

शहबाज सरकार पर भी संकट

शहबाज सरकार पर भी संकट

डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, पहली बार सत्तारूढ़ गठबंधन में दरारें दिखाई दे रही हैं और दो सहयोगी दलों ने बलूचिस्तान में 'रेको दीक' बिल के खिलाफ कैबिनेट की बैठक में हिस्सा नहीं लिया। बलूचिस्तान से तांबा और सोने की खदान परियोजना को लेकर शहबाज शरीफ ये बिल लेकर आई थी, जिसका भारी विरोध गठबंधन में शामिल दो पार्टियों ने किया है और दोनों पार्टियों ने कैबिनेट की बैठक में हिस्सा नहीं लिया। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक से जुड़े सूत्रों ने डॉन को बताया कि, दो सहयोगी पार्टियां, जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (जेयूआई-एफ) और बलूचिस्तान नेशनल पार्टी-मेंगल (बीएनपी-मेंगल) ने बैठक का बहिष्कार किया है। हालांकि, सूत्रों ने कहा कि, बाद में वो बैठक में शामिल हो गये।

आश्वासन से बनेगी बात?

आश्वासन से बनेगी बात?

रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों ही पार्टियों का रूख इस बिल को लेकर काफी सख्त है और वो शहबाज शरीफ से आश्वासन मिलने के बाद कैबिनेट की बैठक में आखिर में जाकर शामिल हुए। वहीं, स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए पीएम शहबाज शरीफ ने JUI-F और BNP-M की शिकायतों को दूर करने के लिए एक कैबिनेट समिति का गठन किया और आश्वासन दिया, कि दोनों सहयोगियों से परामर्श के बाद जल्द ही संसद में एक संशोधन विधेयक पेश किया जाएगा। नाराज पार्टियों का कहना है, कि सरकार जो बिल लेकर आई है, वो बलूचिस्तान की जनता के खिलाफ है और दोनों ही पार्टियों को इस बिल को बनाने से पहले कोई चर्चा नहीं की गई। इस बिल के तहत बलूचिस्तान में खनन कार्य में विदेशी निवेश की सुरक्षा की गारंटी दी गई है और माना जा रहा है, कि चीनी मजदूरों को सुरक्षा देने के लिए इस बिल को लाया गया है, जिससे बलूचिस्तान के लोगों के ही कई अधिकार खत्म हो जाएंगे।

सरकार से वापस ले सकते हैं समर्थन

डॉन के मुताबिक, कैबिनेट की बैठक के बाद, जेयूआई-एफ और बीएनपी-एम दोनों ने अपनी- अपनी पार्टी में अलग-अलग बैठकें कीं, जिसमें उन्होंने अपनी मांगें पूरी नहीं होने पर गठबंधन छोड़ने के विकल्प पर चर्चा की है। हालांकि, सूचना मंत्री मरियम औरंगजेब ने कैबिनेट बैठक के बाद के बयान में कहा कि, कैबिनेट ने नाराज दलों की शिकायतों को हल करने के लिए एक समिति का गठन किया है। उन्होंने कहा कि, कैबिनेट ने रेको दीक प्रोजेक्ट फंडिंग योजना और दो अंतरराष्ट्रीय फर्मों के साथ परियोजना के अंतिम सौदे को मंजूरी दे दी है, जिस पर गुरुवार को हस्ताक्षर किए जाएंगे। वहीं, दोनों नाराज पार्टियों ने कहा कि, अगर हस्ताक्षर से पहले उनकी मांगों के नहीं माना गया, तो वो गठबंधन छोड़ देंगे और ऐसी स्थिति में शहबाज शरीफ की सरकार खतरे में आ जाएगी।

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