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पाकिस्तानी अखबार का बड़ा दावा, भारत के साथ बड़े विवाद पर बनी सहमति

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नई दिल्ली/इस्लामाबाद, जून 14: भारत और पाकिस्तान के बीच बहुत बड़े विवाद का शांतिपूर्वक हल हो गया है। इसका दावा पाकिस्तान की तरफ से किया गया है। हालांकि लंबे समय से प्रतिद्वंदी रहे भारत और पाकिस्तान पहले से ही जमीन और समुद्री विवादों में घिरे हुए हैं, और दोनों देशों के बीच किसी मसले पर इतनी जल्दी सहमति बन जाना आश्चर्य से कम नहीं है। पाकिस्तानी अखबार द ट्रिब्यून ने दावा किया है कि बासमती चावल पर अधिकार को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच समझौता हो गया है। दोनों देशों ने बातचीत के आधार पर इस बड़े विवाद का निपटारा कर दिया है।

    पाकिस्तानी अखबार का बड़ा दावा, भारत के साथ बड़े विवाद पर बनी सहमति
    बासमती चावल पर था विवाद

    बासमती चावल पर था विवाद

    बासमती चावल पर जीआई टैग हासिल करने के लिए भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद शुरू हो गया था। दरअसल, भारत ने बासमती चावल के विशेष ट्रे़डमार्क के लिए यूरोपीयन यूनियन में आवेदन दिया था, ताकि भारत को बासमती चावल के टाइटल का मालिकाना हक प्राप्त हो जाए। लेकिन जैसे भी मालिकाना हक के लिए भारत यूरोपीयन यूनियन पहुंचा, ठीक वैसे ही पीछे पीछे पाकिस्तान भी भारत के दावे का विरोध करने के लिए पहुंच गया। पाकिस्तान का कहना था कि अगर भारत को बासमती चावल के मालिकाना हक का टाइटल मिल जाता है तो उससे पाकिस्तान को काफी नुकसान होगा। पाकिस्तान के लाहौर में अल-बरकत राइस मिल्स चलाने वाले गुलाम मुर्तजा ने तो यहां तक कहा था कि ''यह हमारे ऊपर परमाणु बम गिराने जैसा है''। यूरोपीयन यूनियन में पाकिस्तान ने भारत के प्रोटेक्टेड ज्योग्राफिकल इंडिकेशन यानि पीजीई हासिल करने के भारत के कदम का विरोध किया था।

    भारत-पाकिस्तान में समझौता?

    भारत-पाकिस्तान में समझौता?

    बासमती चावल को लेकर यूरोपीयन यूनियन तक विवाद पहुंच गया था और यूरोपीयन यूनियन ने कहा था कि दोनों देश आपसी बातचीत में इस समस्या का समधान निकाल लेंगे। और पाकिस्तानी अखबार द ट्रिब्यून ने दावा किया है कि 'भारतीय और पाकिस्तानी चावल निर्यातक बासमती चावल के सामूहिक मालिकाना हक के लिए तैयार हो गये हैं।' कराची के चावल उत्पादक फैजान अली ने कहा कि 'दोनों देशों को बासमती चावल का मालिकाना हक मिलना चाहिए था और वही इस विवाद का समाधान भी था।' आपको बता दें कि नई दिल्ली और इस्लामाबाद लंबे समय से बासमती चावल पर मालिकाना हक होने का दावा करते रहे हैं, जो दोनों देशों में बड़े पैमाने पर उत्पादन किया जाता है। पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में बड़े पैमाने पर बासमती चावल की पैदावार होती है। फैजान अली ने कहा कि 'बासमति चावल के मालिकाना हक के लिए दोनों देशों ने आवेदन कर रखा था, जो गलत है। बासमति चावल का मूल पंजाब है और इसकी पैदावार दोनों देशों में की जाती है। लिहाजा दोनों देशों को बासमति चावल का मालिकाना हक मिलना चाहिए था'

    क्या होता है पीजीआई का दर्जा ?

    क्या होता है पीजीआई का दर्जा ?

    आपको बता दें कि पीजीई यानि प्रोटेक्टेड ज्योग्राफिकल इंडिकेशन का दर्जा भौगोलिक उत्पादों को लेकर इंटलेक्च्वल प्रॉपर्टी का अधिकार मुहैया कराता है। भारत के दार्जिलिंग चाय, कोलंबिया कॉफी और कई फ्रांसीसी उत्पादों को पीजीआई का टैग मिला हुआ है और भारत चाहता था कि बासमती चावल को लेकर भी उसे पीजीआई का टैग मिले। इसके लिए भारत की तरफ से यूरोपीय यूनियन में आवेदन दिया गया था। जिन उत्पादों को पीजीआई का टैग मिल जाता है, उनके नकल को लेकर सिक्योरिटी मिली हुई होती है, यानि उसका नकल कोई और देश नहीं कर सकता है और पीजीआई टैग मिलने के बाद उस उत्पाद का बाजार में कीमत और ज्यादा बढ़ जाता है। अगर भारत को पीजीआई का टैग मिल जाता तो पाकिस्तान के लिए ये एक बड़ा झटका होगा। हालांकि, अब पाकिस्तान की तरफ से दावा किया गया है कि दोनों देशों को इसका मालिकाना हक मिलेगा और दोनों देश इसके लिए तैयार हो गये हैं।

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    English summary
    Pakistan has claimed that an agreement has been reached with India on the ownership of Basmati rice.
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