पाकिस्तान में केयरटेकर प्रधानमंत्री बनाने के लिए पांच नामों पर चर्चा, शहबाज के करीबी लिस्ट से बाहर
Pakistan News: पाकिस्तान में केयरटेकर बनाने के लिए जिन पांच नामों पर चर्चा चल रही है, उसमें वित्त मंत्री इशाक डार का नाम नहीं है और इसके साथ ही तय हो गया है, कि शहबाज शरीफ के बेहद खास माने जाने वाले इशाक डार, इस रेस से बाहर कर दिए गये हैं।
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के मुताबिक, पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) ने फैसला किया है, कि कार्यवाहक प्रधान मंत्री के प्रतिष्ठित पद के लिए एक राजनेता का चयन किया जाएगा और इसके लिए पांच नामों को शॉर्टलिस्ट किया है।

द न्यूज ने शनिवार को इसकी जानकारी देते हुए कहा है, कि "पीपीपी और पीएमएल-एन ने मिलकर चार से पांच नामों को अंतिम रूप दिया है, जिन पर अन्य दलों के साथ चर्चा की जाएगी।" रिपोर्ट के मुताबिक, ख्वाजा आसिफ ने कहा है, कि एक नाम को एक हफ्ते के भीतर अंतिम रूप दे दिया जाएगा।
शहबाज शरीफ को क्यों लगा है झटका
रिपोर्ट में इशाक डार का नाम नहीं दिखना, शहबाज शरीफ के लिए झटका माना जा रहा है, क्योंकि इशाक डार को अंतरिम प्रधानमंत्री बनाकर, शहबाज शरीफ सत्ता की लगाम अपने हाथों में रखना चाह रहे थे। लेकिन, उनके गठबंधन दल के प्रमुख घटक, बिलावल भुट्टो की पार्टी पीपीपी को इससे सख्त ऐतराज था।
जब से इशाक डार का नाम चर्चा में आया था, उस वक्त से ही बिलावल भुट्टो की पार्टी इसका सख्त विरोध कर रही थी और दोनों पार्टियों में तनाव भी दिखने लगा था।

लेकिन अब, रक्षा मंत्री ने यह भी कहा है, कि "सहयोगी दलों का नेतृत्व इस संबंध में अंतिम फैसला लेगा। मेरे विचार से, चुनाव 90 दिनों में होना चाहिए और यह हमारे लिए उपयुक्त भी है।"
उन्होंने कहा, कि "मेरी निजी राय है, कि चुनाव 90 दिनों से पहले हो जाने चाहिए और मुझे लगता है, कि विधानसभाएं अपने कार्यकाल से दो दिन पहले ही भंग कर दी जाएंगी।"
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया, कि उन्होंने न तो कार्यवाहक प्रधानमंत्री के पद के लिए वित्त मंत्री इशाक डार का नाम प्रस्तावित किया था और न ही किसी भी स्तर पर इसकी इच्छा व्यक्त की थी।

केयरटेकर प्रधानमंत्री को लेकर कलह
आपको बता दें, कि केयरटेकर प्रधानमंत्री को लेकर शहबाज शरीफ के गठबंधन में भारी कलह चल रही है और इससे पहले, बिलावल भुट्टो के पिता आसिफ अली जरदारी का नाम भी सामने आया था, लेकिन शहबाज की पार्टी की तरफ से कहा गया, कि आसिफ अली जरदारी भरोसेमंद नहीं हैं।
दरअसल, जो भी कार्यवाहक प्रधानमंत्री बनेगा, वो चुनाव को प्रभावित करेगा और ये बात दोनों ही पार्टियां जानती हैं। लिहाजा, दोनों को इस बात का डर है, कि कहीं चुनाव में उनकी पार्टी को नुकसान ना हो जाए और नुकसान होने की स्थिति में चुनाव के बाद प्रधानमंत्री की कुर्सी उस पार्टी को नहीं मिल पाएगी।
एक तरफ बिलावल भुट्टो पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बनना चाहते हैं, तो दूसरी तरफ शहबाज शरीफ को अब प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठने की आदत हो चुकी है और अब वो कुर्सी का मोह छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं, लिहाजा ये विवाद बढ़ता ही जा रहा है।












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