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Pakistan को ऐसे ही नहीं कहते भिखारी देश, हर 6 में से एक मांग रहा भीख, कई देशों की आबादी से ज्याद हैं भिखारी

Paksitan में यूं तो नेताओं का भीख मांगना आम है। कभी चीन से, कभी अमेरिका से तो कभी वर्ल्ड बैंक से। इस देश के पास अपनी भिखारियों की इंटरनेशनल फौज भी है जो हज के नाम सऊदी अरब जाती है वहां अपना पेटेंटेड कटोरा निकाल शुरू हो जाती है। लेकिन अब पाकिस्तान ने खुद बताया कि उनके यहां कुल भिखारी कितने हैं।

कई देशों की आबादी से ज्यादा पाक में भिखारी

पाकिस्तान में भिखारियों की संख्या हैरान कर देने वाली बताई जा रही है। अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय और स्थानीय रिपोर्ट्स के मुताबिक, देश में पेशेवर भिखारियों की तादाद करीब 3.8 करोड़ तक पहुंच चुकी है। यह आंकड़ा कई छोटे देशों की कुल आबादी से भी ज्यादा है। इतनी बड़ी संख्या अपने आप में एक गंभीर सामाजिक और आर्थिक संकट की ओर इशारा करती है।

Pakistan

हर छह में से एक व्यक्ति भीख मांगने से जुड़ा

अगर कुल आबादी के प्रतिशत के हिसाब से देखें, तो पाकिस्तान में लगभग 16% लोग किसी न किसी रूप में भीख मांगने से जुड़े हुए हैं। यानी हर छह में से एक व्यक्ति इस पेशे का हिस्सा बताया जाता है। यह आंकड़ा इस समस्या की गहराई को दर्शाता है और बताता है कि यह केवल कुछ लोगों तक सीमित मुद्दा नहीं, बल्कि एक व्यापक सामाजिक चुनौती है।

भीख मांगना बना रोजगार

यह स्थिति अब सिर्फ मजबूरी की कहानी नहीं रही, बल्कि इसे एक संगठित उद्योग के रूप में देखा जा रहा है। अनुमान है कि पाकिस्तान में भिखारी रोजाना करीब 32 अरब पाकिस्तानी रुपये तक कमा लेते हैं। इतनी बड़ी रकम देश की औपचारिक अर्थव्यवस्था से बाहर रहकर समानांतर काले धन का एक बड़ा नेटवर्क तैयार करती है।

बड़े शहरों में ज्यादा कमाई

बड़े शहरों में भिखारियों की आय कई बार दिहाड़ी मजदूरों से भी ज्यादा बताई जाती है। कराची में एक भिखारी औसतन प्रतिदिन 2,000 पाकिस्तानी रुपये तक कमा सकता है। वहीं लाहौर और इस्लामाबाद जैसे शहरों में यह कमाई 1,000 से 1,500 रुपये प्रतिदिन के बीच बताई जाती है। ये आंकड़े इस पेशे की आर्थिक हकीकत को सामने लाते हैं।

विदेशों में भी खराब हो रही छवि

यह समस्या सिर्फ देश के अंदर तक सीमित नहीं है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पाकिस्तान की छवि को प्रभावित कर रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, खाड़ी देशों में पकड़े गए करीब 90% भिखारी पाकिस्तानी नागरिक होते हैं। सऊदी अरब और यूएई जैसे देशों ने इस मुद्दे पर कड़ी आपत्ति जताई है, जिससे पाकिस्तान को कूटनीतिक और सामाजिक स्तर पर शर्मिंदगी का सामना करना पड़ता है।

उमराह वीजा और 'भिखारी एक्सपोर्ट'

बताया जाता है कि हर साल हजारों लोग उमराह वीजा पर सऊदी अरब जाते हैं, लेकिन वहां पहुंचकर भीख मांगना शुरू कर देते हैं। इस स्थिति को कुछ लोग 'भिखारी एक्सपोर्ट' भी कहने लगे हैं। इसे रोकने के लिए पाकिस्तानी सरकार ने हजारों पासपोर्ट ब्लॉक किए हैं, ताकि इस तरह की गतिविधियों पर लगाम लगाई जा सके।

'बेगिंग माफिया' का नेटवर्क

पाकिस्तान में भीख मांगना अब सिर्फ व्यक्तिगत स्तर की मजबूरी नहीं रहा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह काम कई जगह संगठित माफिया के नियंत्रण में है। 'बेगिंग माफिया' अलग-अलग इलाकों का बंटवारा करते हैं और बच्चों तथा विकलांग लोगों को जबरन भीख मांगने के लिए मजबूर करते हैं। यह पहलू इसे और भी गंभीर सामाजिक अपराध बना देता है।

अर्थव्यवस्था पर सीधा असर

इतनी बड़ी आबादी का उत्पादक काम करने के बजाय भीख मांगने में लगे रहना देश की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा खतरा माना जा रहा है। इससे जीडीपी और विकास दर पर सीधा नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। जब कार्यबल का बड़ा हिस्सा औपचारिक रोजगार से बाहर रहता है, तो समग्र विकास भी प्रभावित होता है। यही वजह है कि यह मुद्दा सिर्फ सामाजिक नहीं, बल्कि आर्थिक दृष्टि से भी बेहद अहम बन चुका है।

इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।

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