Pakistan: नरसंहार के खिलाफ उठ खड़े हुए बलोच, इस्लामाबाद में डटे, क्या पाक के हाथ से निकल जाएगा बलूचिस्तान?

बलूचिस्तान (Balochistan) ही नहीं पाकिस्तान के अन्य हिस्सों में भी बलूच नरसंहार के खिलाफ लंबे समय से आवाजें उठती रहीं हैं। लेकिन इसका हल ढूंढने के बचाय पाकिस्तान ने बलोच लोगों की अवाज को दबाना ही उचित समझा। पिछले डेढ़ महीन से अधिक समय से इस्लामाबाद में बलूच लोगों का धरना जारी है। जुल्म और हिंसा के खिलाफ धरने पर बैठे लोगों ने विरोध खत्म करने का दबाव बनाए जाने का आरोप लगाया है। ये विरोध पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में नेशनल प्रेस क्लब के बाहर चल रहा है।

इस्लामाबाद पहुंचे बलोच लोगों ने आरोप लगाया है कि सत्ता और प्रशासन लगातार उन्हें नुकसान पहुंचाने की साजिश कर रहा है। इससे पहले क्वेटा और मालिर में भी बलूच लोगों ने बड़ी संख्या में विरोध प्रदर्शन किया। अब दावा किया जा रहा है कि बलूच लोगों का ये विरोध अब थमने वाला नहीं है। लंबे समय से लगातार अपनों को खोने और बलूचिस्तान में जुल्म सह रहे लोग अब पीछे हटने वाले नहीं है। यही नहीं पाकिस्तान के खिलाफ बलोच लोगों की हिंसा को लेकर यूएस में भी विरोध किया गया है।

Pakistan Baloch stood up against massacre

पाकिस्तान और बलूच लोगों को जबरन गायब करने के खिलाफ बलूचिस्तान प्रवासी के सदस्यों ने व्हाइट हाउस के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बीच वहीद बलूच ने कहा कि हम पिछले 75 वर्षों से पाकिस्तान द्वारा बलूचिस्तान पर किए जा रहे अत्याचारों का विरोध कर रहे हैं।हम यहां उन बलूच परिवारों के समर्थन में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं जिनका अपहरण कर लिया गया था और वे लापता हैं।

ऐसे में बलूच महिलाओं ने शनिवार (7 जनवरी) को एक मार्च निकाला। ये मार्च बलूचिस्तान में मकरान तट पर तुरबत से 2,000 किलोमीटर से अधिक की यात्रा कर चुकी हैं। बलूच यकजेहती काउंसिल (बीवाईसी) के बैनर तले ये विरोध जारी है। इस पैदल मार्च का नेतृत्व डॉ. महरंग बलूच कर रहे हैं। जिसमें बलोच प्रांत में बड़े पैमाने पर होने वाली अपहरण और हत्याओं को नियंत्रण के प्रबंध करने की मांग की जा रही है।

पाकिस्तान हमेशा से बलोच लोगों पर अत्याचार ढाता रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक बलूचिस्तान में हजारों लोग गायब हो गए हैं। हत्या और अपहरण की घटनाएं यहां आम हो चुकी हैं।

दरअसल, सुरक्षा बलों की तरफ से एक बलूच युवक की हत्या के बाद 6 दिसंबर को तुरबत में विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ। दो सप्ताह के विरोध के बाद, धरना क्वेटा में स्थानांतरित कर दिया गया। जिसके बाद अब बलोच लोग इस्लामाबाद पहुंच गए हैं। हालांकि यहां शुरू में उन्हें उन्हें घुसने से मना कर दिया गया। बाद में जब उन्हें प्रवेश दिया गया तो नेशनल प्रेस क्लब में शांतिपूर्ण विरोध शुरू हुआ। विरोध की अनुमति मिलने के बावजूद शिविर में प्रशासन ने आंसू गैस के गोले, पानी की बौछारें, धमकी और पिटाई करके विरोध को कुचलने का प्रयास किया गया।

आरोप है कि बलोच लोगों को इस्लामाबाद में लगातार धमकियां मिल रही हैं। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारी बचोच प्रदर्शनकारियों को आतंकवादी समर्थक के रूप में देख रहे हैं। सभी बलोच लोगों को इस्लामाबाद से क्वेटा भेजने की तैयारी थी। ऐसे में बलोच लोगों को अदालत की शरण लेनी पड़ी। कोर्ट ने आदेश दिया की बलोच लोगों को जबरन ना हटाया जाय। इस आदेश के बाद इस्लामाबाद में उनके विरोध को बल मिल सका है।

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