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Pakistan Army Video: घबराहट या साजिश? पाकिस्तानी सेना ने भारत के इन पत्रकारों को बताया RAW एजेंट?

Pakistan Army DG ISPR Press Conference: पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी की हालिया प्रेस कॉन्फ्रेंस ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। डीजी आईएसपीआर (DG ISPR) ने भारतीय पत्रकारों और सोशल मीडिया हैंडल्स को सीधे तौर पर 'RAW एजेंट' बताते हुए उन पर पाकिस्तान के खिलाफ डिजिटल आतंकवाद फैलाने का आरोप लगाया। साक्ष्यों के रूप में टीवी क्लिप्स और स्क्रीनशॉट पेश करना पाकिस्तानी सैन्य प्रतिष्ठान की एक आक्रामक रणनीति को दर्शाता है।

हालांकि, रक्षा विशेषज्ञों का तर्क है कि यह सार्वजनिक हमला पाकिस्तानी सेना के भीतर बढ़ती संस्थागत घबराहट और आंतरिक दबाव का परिणाम है। विदेशी प्रोपेगेंडा का नाम लेकर सेना संभवतः देश के भीतर गिरती अपनी लोकप्रियता और राजनीतिक अस्थिरता से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है।

Pakistan Army DG ISPR Press

Pakistan Army viral video: फिल्मी डायलॉगबाजी और मदारी जैसा लहजा

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अहमद शरीफ चौधरी का लहजा किसी जिम्मेदार सैन्य अधिकारी जैसा नहीं, बल्कि सड़क छाप फिल्मों के विलेन या किसी मदारी जैसा दिखा। उन्होंने भारत को चुनौती देते हुए कहा, "दाएं से आना, बाएं से आना... एक बार मजा नहीं कर दिया ना, तो पैसे वापस।" उनके इस 'गारंटी कार्ड' वाले बयान ने पाकिस्तानी सेना की परिपक्वता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर लोग पूछ रहे हैं कि क्या यह किसी परमाणु शक्ति संपन्न देश की सेना का प्रवक्ता है या कोई सब्जी बेचने वाला?

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पत्रकारों को बताया RAW एजेंट: हताशा का चरम

प्रेस कॉन्फ्रेंस में उस वक्त अजीब स्थिति पैदा हो गई जब डीजी ISPR ने कुछ भारतीय पत्रकारों और यूट्यूबर्स के वीडियो चलाकर उन्हें सीधे तौर पर भारतीय खुफिया एजेंसी RAW का हिस्सा बता दिया। बिना किसी ठोस सबूत के पत्रकारों पर इस तरह के आरोप लगाना यह दर्शाता है कि पाकिस्तानी सेना डिजिटल सूचनाओं और स्वतंत्र आवाजों से कितनी डरी हुई है। उन्हें डर है कि भारत का सॉफ्ट पावर और जमीनी सच्चाई उनकी 'इमेज बिल्डिंग' की कोशिशों को तबाह कर रही है।

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भारत के प्रमुख पत्रकारों को बताया RAW एजेंट

पाकिस्तानी सेना की प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारत के वरिष्ठ पत्रकार सिद्धांत सायबल को सोशल मीडिया पोस्ट और सुशांत सिन्हा के टीवी फुटेज के आधार पर RAW एजेंट बताने का दावा किया गया। उनके कई ट्वीट दिखाकर भारत पर गंभीर आरोप लगाए गए। इस दौरान प्रवक्ता अहमद शरीफ चौधरी का लहजा किसी जिम्मेदार सैन्य अधिकारी जैसा नहीं, बल्कि अतिरंजित और उत्तेजक नजर आया, जिससे पूरे बयान की विश्वसनीयता और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए।

जंग कभी जीती नहीं, चुनाव कभी हारा नहीं

सोशल मीडिया पर इस बयान के बाद पाकिस्तान के पुराने इतिहास को याद किया जा रहा है। यूजर्स 1971 के सरेंडर की तस्वीरें साझा कर रहे हैं, जब जनरल नियाजी ने आत्मसमर्पण से ठीक पहले इसी तरह की शेखी बघारी थी। लोगों का कहना है कि "पाकिस्तानी सेना कभी जंग नहीं जीतती और कभी चुनाव नहीं हारती।" अहमद शरीफ की इस प्रेस कॉन्फ्रेंस को उनकी हताशा के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि देश के भीतर ही सेना को भारी विरोध और आर्थिक तंगहाली का सामना करना पड़ रहा है।

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