पाकिस्तान डूबने के कगार पर मगर रईसी नहीं छोड़ रहे अधिकारी, आदेश के बावजूद नही लौटा रहे लग्जरी कारें
Economic crisis: सरकार ने कैबिनेट सदस्यों और अन्य अधिकारियों को आदेश दिया था कि जल्द से जल्द लग्जरी वाहनों को लौटा दिया जाए। लेकिन अभी तक आधे से अधिक ने वाहनों को वापस नहीं किया गया है।

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पाकिस्तान धीरे-धीरे कंगाल होता जा रहा है। देश की अर्थव्यवस्था बेपटरी हो चुकी है। कुछ दिन पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सालाना 200 अरब रुपये बचाने के लिए कई मितव्ययिता उपायों की घोषणा की थी। उन्होंने 'खर्च कम करने की नीति' की बात करते हुए मंत्रियों और सरकारी अधिकारियों से अपने वेतन का त्याग करने और लग्जरी गाड़ियों को लौटाने और खर्च में कटौती करने को कहा था लेकिन लगता नहीं है कि उनकी बातों का कोई असर हुआ है। अभी भी कई अधिकारी लग्जरी गाड़ियों की सवारी कर रहे हैं।
अभी भी ठाठ में जी रहे मंत्री
पाकिस्तानी अखबार डॉन ने अपनी एक रिपोर्ट में खुलासा किया है कि कई पाकिस्तानी वरिष्ठ अधिकारी अभी लग्जरी एसयूवी की सवारी कर रहे हैं। फरवरी में सरकार द्वारा जारी आदेशों के बावजूद उन्होंने अपनी लग्जरी गाड़ियों को नहीं लौटाया है। डॉन न्यूज की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कई वरिष्ठ नौकरशाह अभी भी एसयूवी और 1800cc से ऊपर की सेडान कारों का उपयोग कर रहे हैं।
आधे से अधिक वाहन लौटाने बाकी
डॉन ने अपनी रिपोर्ट में कहा, 'पाकिस्तान के वित्त मंत्री इशाक डार की अध्यक्षता में एक मीटिंग बुलाई गई थी। इस बैठक में कहा गया कि केंद्रीय मंत्रियों के द्वारा सिर्फ 14 एसयूवी लौटाए गए हैं। 16 लग्जरी कारें अभी भी उनके द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे हैं।' बैठक में कैबिनेट मंत्रियों व अन्य पदाधिकारियों द्वारा लग्जरी वाहनों की वापसी नहीं करने पर चिंता व्यक्त करते हुए कैबिनेट संभाग को तीन दिन के भीतर लग्जरी कारों को वापस करने का निर्देश दिया गया है।
डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, मंत्रियों और अधिकारियों के द्वारा सुरक्षा वाहनों के उपयोग को वापस लेने पर भी विचार-विमर्श किया गया है। पाकिस्तान में सभी मंत्रियों और सरकारी कार्यालयों को अपने खर्चे में 15% की कमी करने के लिए कहा गया है। इसके अलावा वेतन, भत्ते, लक्जरी कारों, विदेश यात्राओं और बिजनेस क्लास यात्रा को छोड़ने का निर्देश भी दिया गया था।
कर्ज की किस्त फिर ले लटकी
इस बीच IMF ने पाकिस्तान को दी जाने वाली कर्ज की किस्त फिर से लटका दी है। डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, राजनयिक सूत्रों ने बताया है, कि पाकिस्तान में राजनीतिक अस्थिरता की वजह से IMF पाकिस्तान को लोन नहीं दे रहा है। राजनयिक सूत्रों ने कहा है, कि IMF के साथ लोन पर बात नहीं बनने की सबसे बड़ी वजह राजनीतिक लड़ाई है, जो देश की इकोनॉमी को अस्थिर कर सकता है।
IMF से धनराशि मिलनी जरूरी
आपको बता दें, कि पाकिस्तान और आईएमएफ पिछले कई महीनों से 7 अरब डॉलर के आईएमएफ कार्यक्रम को फिर से शुरू करने के लिए बातचीत कर रहे हैं, लेकिन अभी तक एक समझौते पर नहीं पहुंचे हैं। अगर बातचीत फाइनल होती है, तो इस बार आईएमएफ से पाकिस्तान को 1.1 अरब डॉलर की एक किश्त मिलेगी और फिर आगे जाकर अगली किश्त मिलेगी।












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