चीन में कोरोना के नाम पर कोहराम, 2 अस्पतालों को भी किया बंद
बीजिंग, 13 जनवरी: चीन के कई शहरों में सख्त लॉकडाउन के बाद गुरुवार को तीन हफ्तों से पूरी तरह तालाबंदी झेल रहे शीआन शहर को दो अस्पतालों को भी बंद कर दिया गया है। उन दोनों अस्पतालों पर आरोप है कि उन्होंने कोविड की सरकारी नियमों को लेकर अपनी ड्यूटी को नजरअंदाज किया। इसमें से एक अस्पताल पर आरोप है कि उसकी गलती से एक महिला का गर्भपात हो गया। गौरतलब है कि चीन में शी जिनपिंग की सरकार किसी तरह से विंटर ओलंपिक को सफल बनाकर अपनी नाक बचाने के लिए जीरो-कोविड की रणनीति अपनाए हुए है, लेकिन इसके चक्कर में वहां ना सिर्फ जनता को ज्यादतियां झेलनी पड़ रही हैं, बल्कि उन्हें जानवरों की तरह लोहे के बड़े-बड़े बक्सों में भी ठूंसा जा रहा है।

पहले नागरिकों पर ज्यादती
तीन हफ्तों से सख्त लॉकडाउन झेल रहे चीन के शीआन शहर में अब दो अस्पतालों में भी ताला लगा दिया गया है। एक विदेशी न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक इनमें से एक वह अस्पताल भी है, जिसने 8 महीने की गर्भवती महिला का इलाज करने से इनकार कर दिया और बाद में उसका गर्भपात हो गया था। चीन का यह ऐतिहासिक शहर उन शहरों में शामिल है जो पिछले दिसंबर से कोरोना वायरस का प्रकोप झेल रहा है और शी जिनपिंग सरकार की 'जीरो-कोविड' रणनीति के चलते यहां की 1.3 करोड़ से ज्यादा की आबादी अपने घरों में बंद रहने को मजबूर है। ना जाने कितने कोविड संक्रमितों को तो लोहे के बक्सों में ठूंसने का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

दो अस्पतालों पर गिरी गाज
दरअसल, पिछले हफ्ते उस पीड़ित महिला की गाओक्शिन अस्पताल के बाहर खून से लथपथ स्टूल पर बैठे हुए वाली तस्वीर और वीडियो वायरल हुआ था, जिसके बाद इस शहर में लगे कोविड के सख्त नियमों के खिलाफ लोगों में एक गुस्सा देखा जाने लगा था। अस्पताल ने उस महिला का इलाज करने से सिर्फ इसलिए इनकार कर दिया गया था, क्योंकि वह जो कोविड-19 निगेटिव रिपोर्ट लेकर आई थी, वह 48 घंटे के नियम से थोड़े पहले की थी। दूसरी घटना में शीआन की एक निवासी ने आरोप लगाया कि उसके पिता ने पिछले हफ्ते इसलिए दम तोड़ दिया, क्योंकि दूसरे अस्पताल में 'महामारी के सख्त नियमों' के चलते उसके हृदय रोग का उपचार नहीं हो पाया।

ड्यूटी में लापरवाही का आरोप
अधिकारियों के मुताबिक दोनों अस्पतालों को चेतावनी देने के बाद सुधरने के लिए तीन महीने का वक्त देते हुए संचालन बंद कर दिया गया है और उन्हें जरूरी मंजूरी मिलने के बाद ही फिर से खोलने की इजाजत दी जाएगी। शहर के स्वास्थ्य आयोग ने गुरुवार को बयान में कहा है कि दोनों अस्पताल 'जान बचाने और पीड़ितों की हिफाजत करने के अपने कर्तव्यों का पालन करने में विफल रहे।' स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक, 'इसकी वजह से गंभीर रूप से बीमार मरिजों को बचाने, जांच करने और इलाज करने में देरी हुई, जिसके चलते व्यापक रूप से लोगों का इसपर ध्यान गया और समाज पर बुरा प्रभाव पड़ा।'

दिसंबर से सख्त लॉकडाउन झेल रहा है शीआन
यही नहीं, गाओक्शिन अस्पताल से इसके जनरल मैनेजर और कई कर्मचारियों को सस्पेंड करने को कहा गया है और दूसरे अस्पताल को तो उसके चेयरमैन को बर्खास्त करने, डिप्टी चीफ को निलंबित करने और ओपीडी डिपार्टमेंट की हेड नर्स को हटाने तक का फरमान दे दिया गया है। गौरतलब है कि शीआन में लॉकडाउन की भयानकता इतनी ज्यादा हो चुकी है कि लोगों ने स्थानीय सरकार की आलोचना करनी शुरू कर दी है। कई निवासी तो खाने-पीने की चीजों और रोजमर्रे के वस्तुओं की भी किल्लत की शिकायत कर रहे हैं, क्योंकि उन्हें घरों से निकलने की इजाजत ही नहीं है। जबकि, हाल के दिनों में शीआन में कोविड के मामले काफी कम हो चुके हैं और गुरुवार को यहां सिर्फ 6 मामले ही सामने आए हैं। 9 दिसंबर से इस शहर में स्थानीय कोविड संक्रमण के 2,000 से ज्यादा मामले सामने आए हैं। लेकिन, लगता है कि शीतकालीन ओलंपिक को सफल बनाने के लिए बीजिंग जनता की इन परेशानियों को पूरी तरह से नजरअंदाज कर चुका है।(अंतिम तस्वीर-सोशल मीडिया वीडियो से)












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