चीन सख़्त कोविड पॉलिसी के ख़िलाफ़ आक्रोश, विरोध प्रदर्शन कैसे दबा रहा है?

चीन में कोरे कागज के साथ प्रदर्शन करते लोग
Getty Images
चीन में कोरे कागज के साथ प्रदर्शन करते लोग

चीन की 'सेंसरशिप मशीन' देश के कई शहरों में कोविड पाबंदियों के ख़िलाफ़ जारी प्रदर्शनों को रोकने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार दिख रही है. पिछले साप्ताहांत से ही लोग चीन में तीन साल से जारी सख़्त कोविड नियमों के खिलाफ गुस्से में हैं और लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं.

लोगों के उग्र प्रदर्शन की वजह से चीन की किरकिरी घरेलू मोर्चे के साथ बाहर की दुनिया में भी हो रही है. चीन इसे हर कीमत पर रोकना चाहता है.

चीन में ऐसे व्यापक प्रदर्शनों का सिलसिला उरुमची शहर में पिछले हफ्ते हुए एक हादसे के बाद शुरू हुआ. आग लगने की उस घटना में 10 लोगों की दर्दनाक मौत हुई थी. बहुत से लोगों का ये मानना था कि कोरोना को लेकर सख़्त प्रतिबंधों की वजह से लोग आग लगने के बाद वक्त रहते बाहर नहीं आ सके. लेकिन प्रशासन का कहना था, ऐसी कोई बात नहीं.

जैसा की चीन में हमेशा से ये देखा जाता है, छोटे बड़े किसी भी मुद्दे पर लोगों के प्रदर्शन को चीनी मीडिया जगह नहीं देती. पिछले कुछ दिनों में कोरोना के मामले तेजी से बढ़े, इस खबर को भी मीडिया ने दबाया. इसकी जगह अंतरिक्ष में चीन की नई उपलब्धियों को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया. ट्विटर जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रोटेस्ट की तस्वीरें और वीडियो ट्रेंड करते रहे, लेकिन चीनी मीडिया ने इसकी भी अनदेखी की.

बढ़ती जा रही है सेंसर किए गए शब्दों की सूची

चीन की पुलिस
EPA
चीन की पुलिस

चीन की सेंसर लिस्ट में शंघाई और उरुमची जैसे नए शब्द हैं जो हाल में डाले गए हैं. ऐसा इसलिए कि लोग कोविड नीतियों के खिलाफ चल रहे प्रदर्शनों के बारे में बात नहीं कर सकें. वीबो जैसा सर्च प्लेटफ़ॉर्म, जो चीन का गूगल कहा जाता है, यहां शंघाई और उरुमची जैसे शब्दों को सर्च करने पर 'सेंसर्ड सर्च' दिखाता है, जबकि यही प्लेटफ़ॉर्म इन शब्दों से जुड़े लाखों सर्च रिजल्ट दिखाता था.

ऐसे सेंशरशिप से बचने के लिए प्रदर्शनकारियों ने भी नई तरक़ीब निकाली थी. विरोध जताने के लिए लोगों ने 'व्हाइट पेपर' या 'A-4' जैसे टर्म्स का इस्तेमाल करना शुरू किया, जो चीन में प्रदर्शन का प्रतीक बन चुका है. लेकिन अब ये टर्म्स भी वीबो सर्च में सेंसर्ड सर्च की लिस्ट में दिखाए जाने लगे हैं.

सेंसरशिप के ऐसे तरीकों के आगे चीनी सोशल मीडिया यूजर्स हार नहीं मान रहे, बल्कि प्रदर्शनकारियों के बीच एकता और एकजुटता बढ़ाने के लिए नए शब्द और तरीक़े ईजाद कर रहे हैं. ऐसे ही शब्दों में से एक है 'A3' जो व्हाइट पेपर का ही एक साइज़ है.

दूसरा तरीका जो चीनी सोशल मीडिया यूजर्स सबसे ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं वो है ट्विटर और फेसबुक जैसे विदेशी प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल. चीन में हालांकि ये दोनों ही प्लेटफॉर्म ब्लॉक्ड हैं, लेकिन VPN जैसे एक छोटे सॉफ़्टवेयर की मदद से इन्हें ऑपरेट किया जा सकता है. इसी तरीके से तमाम लोग चीन में चल रहे प्रदर्शनों को दुनिया के सामने ला रहे हैं.

इसके अलावा विदेशों में रहने वाले चीन के लोग भी लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं. अलग-अलग देशो में चीनी दूतावासों के सामने लोग सादे कागज़ और कैंडल्स के साथ लगातार जमा हो रहे हैं. चीन की कम्युनिस्ट सरकार नहीं चाहती कि इन प्रदर्शनों की तस्वीरें और वीडियो दुनिया के सामने आएं.

टोक्यो में चीनी दूतावास के सामने सांकेतिक प्रदर्शन
AFP
टोक्यो में चीनी दूतावास के सामने सांकेतिक प्रदर्शन

इसे रोकने के लिए ट्विटर जैसे प्लेटफ़ॉर्म्स पर शंघाई और उमरुची के हैशटैग के साथ बड़े पैमाने पर पोर्न और गैंबलिंग से जुड़े कंटेंट डाले जा रहे हैं, ताकि लोग प्रदर्शन से जुड़ी तस्वीरें और वीडियो ना देख पाएं. चीन का ये हथकंडा कोई नया नहीं है.

2019 के हांगकांग प्रदर्शनों के दौरान ट्विटर, फेसबुक और यूट्यूब ने इस बात की तस्दीक की थी कि प्रदर्शन के दौरान उनके प्लेटफॉर्म पर चीन सरकार की तरफ से भ्रामक कंटेट डालने की एक नियोजित कोशिश की गई. इसके लिए तमाम फर्जी एकाउंट्स बनाए गए, जिन्हें बाद में ब्लॉक करना पड़ा

दोषी ठहराए जाएंगे विदेशी?

फ़िलहाल तो चीन का मीडिया विरोध प्रदर्शन से जुड़ी खबरों की अनदेखी कर रहा है, लेकिन इसके साथ एक नया नैरिटिव गढ़े जाने के संकेत अभी से मिल रहे हैं. वो है चीन में विरोध प्रदर्शनों को भड़काने का ठीकरा विदेशी नागरिकों पर फोड़ना. सोशल मीडिया पर इस तरह के पोस्ट अभी से दिखने लगे हैं.

चीन का सरकारी मीडिया ढीले कोविड नियमों का आरोप लगाकर पश्चिमी देशों की आलोचना करता रहा है. इसके अलावा कोरोना को लेकर अमेरिकी रुख़ के ख़िलाफ़ भी तमाम देशों को चेताता रहा है.

पिछले हफ्ते ही क़तर में फ़ुटबॉल वर्ल्ड कप के दौरान जश्न को लेकर स्थानीय गुस्सा भड़का तो चीन के सरकारी प्रसारण CCTV ने अपनी कवरेज में कटतर में फुटबॉल का आनंद ले रहे दर्शकों को दिखाना रोक दिया.

https://twitter.com/StephenMcDonell/status/1597119441942155264

इसके अलावा नवंबर की शुरुआत में चीन ने कोरोना गाइडलाइंस की सख़्ती में थोड़ी ढील दी. मसलन क्वारंटीन के समय में थोड़ी कटौती. इसकी वजह से उन लोगों को आसानी हुई जो कम समय के लिए चीन आए. इन वजहों से मौजूदा तेजी से कोरोना फैलने और विरोध प्रदर्शनों को भड़काने में विदेशियों का हाथ साबित करना आसान हो जाएगा.

हाल के कुछ हफ़्तों में कोरोना के मामले रिकार्ड स्तर तक बढ़े हैं. ऐसे मामले कुछ शहरों में सोमवार को 40 हज़ार तक रिकॉर्ड किए गए. इस हालत में ना तो चीन की ज़ीरो कोविड पॉलिसी में ढील की संभावना नजर आ रही है और ना ही इसके ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शनों में कमी आने के संकेत मिल रहे हैं.

पिछले कुछ महीनो में लॉकडउन वाले इलाक़ों और शहरों की तादाद बढ़ी है, क्योंकि जो भी कोरोना पॉजिटिव पाया जा रहा है, उसे क्लोज कॉन्टैक्ट के साथ क्वारंटीन किया जा रहा है. चीन में ये नियम कोरोना की शुरुआत से ही नहीं बदला. इसकी वजह से लोग बड़ी संख्या में लोग निराश हो रहे हैं.

ऐसे में ये पहली बार नहीं होगा जब चीन में चल रहे व्यापक विरोध प्रदर्शनों का जिम्मेवार पश्चिमी देशों को बताया जाए. 2019 में जब हांगकांग को लेकर चीन में बड़े प्रदर्शन हुए तो इसका दोष पश्चिमी देशों पर मढ़ा गया.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+