Opioids Research: पेन किलर नहीं अब नेचुरल तरीके से दूर होगा दर्द, Peptides कैसे अदा करेंगे अहम रोल?
ताजा शोध पर अगर मेडिसिन डवलपर्स ध्यान दें तो पेन किलर दवाओं से होने वाले स्वास्थ्य को खतरे को दूर किया जाता है। अमेरिका और चीन के साइंटिस्ट्स ने अपनी ताजा रिसर्च में बड़ा दावा किया है।

Opioids Research: दुनिया में इंसानों की घटती इम्युनिटी भविष्य में एक भयावह स्थिति पैदा कर सकती है। पिछले दिनों कोरोना महामारी में हम सबने यह देखा भी है। विश्व शायद ही कोई ऐसा देश नहीं बचा जहां पेन किलर दवाओं की मांग बढ़ने का क्रम पिछले कई दशकों के बीच में जारी ना हो। यानी दर्द निवारक दवाओं को सबसे अधिक मांग है। हम इसके दुष्प्रभावों के विषय में जानते हुए भी कोई विकल्प ना होने पर पेन किलर दवाएं अक्सर लेते रहते हैं। लेकिन अब स्वास्थ्य को इस तरह की दवाओं से नुकसान को देखते हुए मेडिकल साइंस के एक्पर्स्ट्स ने एक शोध किया है, जिसके तहत अब दर्द को बिना किसी साइड इफेक्ट के दूर किया जा सकेगा।
Opioid Receptors पर रिसर्च
साइंस पत्रिका 'जर्नल सेल' में प्रकाशित एक नए शोध लेख के मुताबिक नई रिसर्च से यह समझने में मदद मिला है कि रिसेप्टर्स विशिष्ट पेप्टाइड्स कैसे सेलेक्टज करते हैं। दवाओं से उनके द्वारा मस्तिष्क को भेजे जाने वाले संकेत में क्या बदलाव आता है। दरअसल, पेप्टाइड्स सुरक्षित ओपिओइड प्रदान करने में मदद कर सकते हैं। ये सतत होने वाली एक प्रक्रिया है। जिसको ताजा शोध में नजदीकी से समझने का प्रयास किया है।
पेन किलर के दुष्प्रभाव
वर्तमान में दुनिया में सबसे प्रभावी और शक्तिशाली दर्दनिवारक उपलब्ध हैं। लेकिन इसके कई दुष्प्रभाव भी होते हैं। पेन किलर से साइड इफेक्ट में मामले में तो कुछ केस बेहद गंभीर होते हैं। इनमें सुन्नता, व्यसन और सांस लेने की समस्याएं शामिल हैं। जिसके घातक परिणाम होते हैं। पिछले कई वर्षों से शोधकर्ता इसी साइड इफेक्ट के विषय का लेकर चिंतित थे और वे पेन किलर का विकल्प खोज रहे थे। जिसके तहत कई प्रयोग भी किए गए। हाल में साइंटिस्ट्स ने चार ओपिओइड रिसेप्टर (Opioid Receptor) को लेकर प्रयोग किया। हालांकि अभी इसको लेकर पूरी तरह सफलता नहीं मिल पाई है। लेकिन साइंटिस्ट्स ने इसको लेकर बड़ा दावा किया है।
क्या है एनाल्जेसिक इफेक्ट?
दर्द निवारक प्रभाव पैदा करने के लिए सेल सतहों पर ओपिओइड रिसेप्टर्स से जुड़ते हैं। इसे ही एनाल्जेसिक प्रभाव कहा जाता है। दरअसल, ओपिओइड रिसेप्टर्स प्रोटीन-युग्मित रिसेप्टर्स का एक समूह है । करीब 40 प्रतिशत सोमैटोस्टैटिन के समान गुणों वाले होते हैं। एनाल्जेसिक एनेस्थेटिक्स से अलग प्रभाव डालते हैं। ये शरीर को सुन्न करने या किसी की चेतना की स्थिति को बदलने के लिए नसों के बंद नहीं करते।
पेप्पटाइड्स क्या होते हैं?
अमेरिका और चीन के साइंटिस्ट्स ने मस्तिष्क में दर्द के कारणों और इलाज को लेकर शोध किया। जिसमें पेप्पटाइड्स का अहम रोल था। दरअसल, अमीनो अम्लों की एक छोटी श्रृंखलाओं को पेप्टाइड कहा जाता है। प्रोटीन के निर्माण में कई पेप्टाइड्स का गठन होता है। प्रोटीन एवं पेप्टाइड में आकार का ही अंतर है। इसमें अमीनो अम्ल जिस बंध से जुड़े होते हैं उसे पेप्टाइड बंध कहते हैं।
शोध में साइंटिस्ट्स ने क्या पाया?
शोधकर्ताओं मानना है कि ओपियड्स से जुड़ी जानकारी एक दिन ड्रग डेवलपर्स को गंभीर दर्द से राहत के लिए सुरक्षित दवाएं बनाने में मदद कर सकती है। क्रायोजेनिक इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी (क्रायो-ईएम) नामक तकनीक और कोशिकाओं पर प्रयोगों की एक श्रृंखला का उपयोग करते हुए, शोधकर्ताओं ने प्राकृतिक पेप्टाइड्स की विस्तृत संरचनाओं को देखा। शोध में दावा किया गया कि पेप्टाइड्स की सभी चार ओपिओइड रिसेप्टर्स से जुड़े थे। क्रायो-ईएम छवियों में देखा गया कि कैसे पेप्टाइड्स और रिसेप्टर्स कैसे इंटरैक्ट करते हैं। इंटिस्ट्स जेफरी एफ डिबेर्टो ने रहा, "हम ओपिओइड पेप्टाइड्स और रिसेप्टर्स के बीच बातचीत का अनुमान लगा सकते हैं, जो बदले में जैव रासायनिक अध्ययनों को निर्देशित करते थे, हम यह समझते थे कि ये इंटरैक्शन रिसेप्टर सक्रियण की ओर कैसे ले जाते हैं।"
नेचुरल तरीकों से मिलेगी दर्द से राहत
पेप्पटाइड्स को लेकर ताजा शोध अमेरिका और चीन के मेडिकल एक्सपर्ट्स ने किया है। शोध में क्रायोजेनिक इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी तकनीक का इस्तेमाल किया गया। अमेरिका साइंटिस्ट्स जेफरी एफ डिबेर्टो ने एक इंटरव्यू में कहा, "मानव शरीर में ओपिओइड रिसेप्टर चार तरह के होते हैं, जो ओपिओइड पेप्टाइड्स द्वारा सक्रिय होते हैं। ये पेप्टाइड्स इन उपप्रकारों को चयनात्मकता के विभिन्न स्तरों के साथ बांधते हैं। जिसके परिणामस्वरूप शख्स का मस्तिष्क दर्द, उत्तेजना की प्रतिक्रियाओं के लिए तैयार होता है। साइंटिस्ट्स ने दावा किया कि इस शोध जुड़ी जानकारियों को लेकर नेचुरल तरीके से दर्द के दवाओं को विकल्प को तलाशा जा सकता है।
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