गैर मुस्लिम अल्लाह शब्द का इस्तेमाल नहीं कर सकते: मलेशियाई कोर्ट

गौर हो कि सरकार ने एक कैथोलिक समाचार पत्र 'द हेराल्ड' से इस शब्द का प्रयोग न करने के लिए कहा था। जिसके बाद समाचार पत्र ने कोर्ट में यह कहकर अपील की थी कि ईसाई इस शब्द का इस्तेमाल मलय भाषा में दशकों से कर रहे हैं और अब उन्हें इस शब्द का प्रयोग करने से रोंकना उनके अधिकारों का हनन है। जिस पर कोर्ट ने समाचर पत्र के पक्ष में अपना निर्णय सुनाया था।
निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश मोहम्मद अपांदी अली ने कहा, 'अल्लाह शब्द ईसाइयत का अभिन्न अंग नहीं है। गैर मुस्लिमों द्वारा इस शब्द के इस्तेमाल से लोगों में भ्रम फैलेगा। वहीं समाचार पत्र के संपादक रेवरेंड लॉरेंस एंड्रयू का कहना है कि 'मैं इस निर्णय से हताश हूं। समाचार पत्र का समर्थन करने वालों का कहना है कि मलेशिया के संघीय राष्ट्र बनने से पहले मलय भाषा की बाइबिल में भगवान के लिए अल्लाह शब्द का प्रयोग किया गया था।
इसी निर्णय पर कुछ मुस्लिमों का कहना है कि वह अदालत के इस निर्णय का स्वागत करते हैं, क्योंकि ईसाई लोग अल्लाह शब्द का इस्तेमाल कर मुस्लिमों को ईसाई बनने के लिए प्रेरित कर सकते हैं। यह ध्यान देने योग्य है कि मलेशिया की जनसंख्या का दो तिहाई मुसलमान हैं ऐसे में सत्ताधारी मलय मुस्लिम पार्टी इस मुद्दे का इस्तेमाल मुस्लिम मतदाताओं के बीच अपनी पैठ मजबूत करने के लिए कर रही है। कोर्ट के फैसले के बाद कोर्ट के बाहर मौजूद लोगों ने खुशी जताई, लोगों ने बैनर भी लहराये जिन पर लिखा था कि 'अल्लाह शब्द मुख्य रूप से इस्लाम से ही संबंधित है।












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