ओमिक्रॉन प्रभावित तीन प्रमुख देशों की क्या है स्थिति और क्या भारत ने फिर जानलेवा गलती कर दी है?
दक्षिण अफ्रीका, डेनमार्क, यूनाइटेड किंगडम में ओमिक्रॉन वेरिएंट हर दिन नये रिकॉर्ड बना रहा है, क्या है इन देशों की स्थिति और क्या भारत ने एक बार फिर से गलती कर दी है?
नई दिल्ली, दिसंबर 18: दक्षिण अफ्रीका, यूनाइटेड किंगडम और डेनमार्क...ये तीन देश वर्तमान में ऐसे हैं, जहां कोरोना वायरस का ओमिक्रॉन वेरिएंट काफी तेजी से बढ़ा है, वो भी सिर्फ एक महीने के अंदर, जब पहली बार ओमिक्रॉन वेरिएंट का पता लगा था। ब्रिटेन ज्यादा से ज्यादा लोगों को वैक्सीन का टीका लगाकर ओमिक्रॉन से बचन की कोशिश कर रहा था, लेकिन स्थिति की गंभीरता का अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं, कि ब्रिटेन में पिछले 24 घंटे में करीब 93 हजार कोरोना के नये मरीज मिले हैं, यानि ओमिक्रॉन वेरिएंट भयावह तरीके से फैलने लगा है। दक्षिण अफ्रीका में कोरोना के नये मामले तो तेजी से बढ़े हैं, लेकिन मरीजों में कोरोना के कमजोर लक्षण दिख रहे हैं, लेकिन अभी तक साफ नहीं हो पाया है, कि अभी तक लोगों में इम्यूनिटी का स्तर कितना है और वायरस पर वैक्सीन का असर कितना है, जबकि मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ने के साथ ही डेनमार्क ने सख्त प्रतिबंधों की घोषणा कर दी है।

क्या ओमिक्रॉन को कंट्रोल करने में देर हो गई?
कई देशों ने इंटरनेशनल यात्राओं पर प्रतिबंध जरूर लगाने शुरू कर दिए हैं, लेकिन जब तक प्रतिबंध लगाए जाते और सरकारें जागतीं, तब तक वायरस फैल चुका था। डब्ल्यूएचओ के डायरेक्टर ने मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा था कि, ''कोरोना वायरस का ओमिक्रॉन वेरिएंट अब तक 77 देशों में फैल चुका है और संभावना इसी बात की है कि ओमिक्रॉन 77 से ज्यादा देशों में फैला हुआ है, भले ही अभी वहां से मामले रिपोर्ट नहीं किए गये हों''। डब्ल्यूएचओ के डायरेक्टर ने कहा कि, ओमिक्रॉन वेरिएंट जिस रफ्तार से फैल रहा है, वो रफ्तार काफी ज्यादा है और इससे पहले जो वेरिएंट पाए गये हैं, उनकी रफ्तार की तुलना में ओमिक्रॉन के फैलने की रफ्तार अविश्वसनीय है। डब्ल्य्यूएचओ डायरेक्टर ने कहा कि, ओमिक्रॉन वेरिएंट को लोग 'कमजोर' समझने की गलती कर रहे हैं और ये सबसे बड़ी चिंता की बात है। डब्ल्यूएचओ डायरेक्टर ने साफ तौर पर कहा कि, ''हम अब समझ पा रहे हैं कि, हमने इस वायरस को समझने में गलती कर दी है''।

''मरीजों की संख्या बढ़ना चिंताजनक बात''
डब्ल्यूएचओ डायरेक्टर ने कहा कि, ''भले ही ओमिक्रॉन से पीड़ित मरीजों में लक्षण कमजोर हैं, बावजूद अगर काफी ज्यादा संख्या में लोग संक्रमण के शिकार होंगे, तो स्थिति काफी चिंताजनक हो सकती है और हमारे हेल्थ सिस्टम को बुरी तरह प्रभावित कर सकते हैं''। ओमिक्रॉन वेरिएंट की बढ़ती रफ्तार के बावजूद यूनाइटेड किंगडम सरकार ने अफ्रीका के 11 देशों को ट्रेवल 'रेड लिस्ट' से बाहर निकाल लिया है, यानि, अब अफ्रीका के 11 देशों से आने वाले यात्रियों के लिए होटल में क्वारंटाइन होना जरूरी नहीं है। इसके साथ ही ओमिक्रॉन वेरिएंट पहले ही अमेरिका के 40 राज्यों में फैल चुका है और कई अमेरिकी राज्य में अस्पताल व्यवस्था मरीजों की संख्या बढ़ने से चरमराने लगी है।

पूरी दुनिया के लिए सबसे बड़ा खतरा ओमिक्रॉन?
27 नवंबर को ओमिक्रॉन वेरिएंट के दो मरीज यूनाइटेड किंगडम में मिले थे और 18 दिसंबर को यूनाइटेड किंगडम में कोरोना वायरस के 93 हजार से ज्यादा मामले सामने आए हैं, जिनमें ज्यादातर मरीज ओमिक्रॉन संक्रमित हो सकते हैं। लंदन के सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्रीय निदेशक केविन फेंटन ने ट्वीट करते हुए कहा कि, "अब, पहले से कहीं अधिक, अपनी पहली, दूसरी खुराक या बूस्टर जल्द से जल्द लगवाना बेहद जरूरी है। कृपया इसे मौका पर न छोड़ें।" यूके के स्वास्थ्य सचिव साजिद जाविद ने मंगलवार को कहा कि, देश में हर दो दिनों में ओमिक्रॉन के मामले दोगुने हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि, "यूके में ओमिक्रॉन के मामलों में वृद्धि वही सिगनल दिखा रहा है, जो हम दक्षिण अफ्रीका में देख रहे हैं।"

कंट्रोल नहीं हो पा रहा है ओमिक्रॉन
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, शुक्रवार को यूनाइटेड किंगडम ने 93,045 नए कोरोनोवायरस मामले दर्ज किए थे, जो महामारी शुरू होने के बाद से सबसे अधिक दैनिक संख्या है। दक्षिण अफ्रीका ने भी बुधवार को अपने सबसे अधिक दैनिक मामले दर्ज किए हैं। डेनमार्क के स्टेटन्स सीरम इंस्टीट्यूट (एसएसआई) ने कहा कि इस सप्ताह ओमिक्रॉन के प्रमुख कोरोनावायरस संस्करण बनने की आशंका थी। एसएसआई ने गुरुवार को कहा कि पिछले 24 घंटों में देश में संक्रमण के लगभग 10,000 मामलों की पुष्टि हुई है। डेनिश प्रधान मंत्री मेटे फ्रेडरिकसन ने कहा कि मामले "बहुत, बहुत अधिक" हैं और उन्हें "इसमें कोई संदेह नहीं था कि संक्रमण के चेन को तोड़ने के लिए नए उपायों की आवश्यकता होगी।"

ओमिक्रॉन कमजोर है, ये कहना जल्दबाजी है?
दक्षिण अफ्रीका के डेटा की जांच की जा रही है ताकि सुराग मिल सके कि ओमिक्रॉन का प्रसार कहीं और कैसे हो सकता है। दक्षिण अफ्रीका के नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर कम्युनिकेबल डिजीज (एनआईसीडी) ने सतर्कता से आशावादी रुख अपनाया है। इंस्टीट्यूट का कहना है कि, "हालांकि डेटा अभी भी इकट्ठा किया जा रहा है, लेकिन 'कुछ' सबूत बताते हैं कि वर्तमान लहर मामूली हो सकती है"। डिस्कवरी हेल्थ द्वारा मंगलवार को जारी एक स्टडी में दक्षिण अफ्रीका में 3.7 मिलियन लोगों को कवर करने वाली एक बड़ी स्वास्थ्य बीमा कंपनी ने पाया कि, टीके नए वेरिएंट के खिलाफ कम सुरक्षा प्रदान करते हैं, लेकिन यह भी संकेत देते हैं कि ओमिक्रॉन पिछले वेरिएंट की तुलना में हल्के लक्षणों का कारण बनता है।

वैक्सीन कितनी असरदार?
शोधकर्ताओं ने कहा कि फाइजर वैक्सीन की दो खुराक कुल मिलाकर संक्रमण के खिलाफ 33% सुरक्षात्मक थी, लेकिन अस्पताल में भर्ती होने सहित गंभीर जटिलताओं को रोकने में 70% प्रभावी थी। इस बीच, कोरोना वायरस के ऑरिजनल वेरिएंट की तुलना में ओमिक्रॉन वेरिएंट को लेकर अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या 29 प्रतिशत तक कम है। लेकिन दूसरे वैज्ञानिक चिंता जता रहे है। इंग्लैंड के मुख्य चिकित्सा अधिकारी क्रिस व्हिट्टी ने चेतावनी देते हुए कहा कि, यूके के दैनिक कोविड-19 मामले रिकॉर्ड बना रहे हैं और आने वाले हफ्तों में अस्पतालों पर भयानक प्रेशर पड़ेगा और स्थिति बेकाबू हो सकती है। उन्होंने कहा कि, "मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि, मुझे डर है कि यह समस्या का कारण बनेगी"।

क्या फिर से लॉकडाउन लगेगा?
ओमिक्रॉन वेरिएंट के काफी तेज प्रसार के बावजूद भी अब तक जिन देशों में काफी ज्यादा मरीज भी मिल रहे हैं, वहां भी अब तक नए लॉकडाउन की बहुत कम चर्चा हुई है। यूके के प्रधान मंत्री बोरिस जॉनसन ने कहा कि लॉकडाउन के बजाय, सरकार लोगों से "सतर्क रहने" के लिए कह रही है। हालांकि, कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है कि, देशों को "यथार्थवादी होना चाहिए कि उन्हें किसी बिंदु पर लॉकडाउन की आवश्यकता हो सकती है।" ओमिक्रॉन और डेल्टा वेरिएंट के प्रसार को रोकने के प्रयास के लिए देश अभी भी कई अन्य उपायों पर विचार कर रहे हैं। उदाहरण के लिए, फ्रांस ने शुक्रवार को घोषणा की कि नए साल की पूर्व संध्या पर देश में कार्यक्रम नहीं होंगे। आयरलैंड में, रेस्तरां और बार को रात 8 बजे बंद कर दिया जाएगा। वहीं, नॉर्वे ने रेस्टोरेंट में अल्कोहल पर प्रतिबंध लगा दिया है और टीकाकरण अभियान को तेज कर दिया गया है।

क्या भारत ने फिर से गलती की है?
डेल्टा वेरिएंट ने इस साल भारत में जो कहर बरपाया था, उसे भारत के लोग कभी भूल नहीं पाएंगे, लिहाजा आम भारतीयों के मन में सवाल उठ रहे हैं, कि क्या भारत सरकार ने ओमिक्रॉन वेरिएंट को लेकर भी गलती कर दी है? कई एक्सपर्ट्स का कहना है कि, सरकार चाहकर भी कुछ नहीं कर सकती है, क्योंकि किसी भी वायरस के वेरिएंट का पता जब तक लगता है, उससे करीब 15 दिन से एक महीने पहले ही वो फैल चुका होता है, लिहाजा एक्सपर्ट्स मानते हैं कि, सरकार वायरस को फैलने से रोक नहीं सकती है, लेकिन भारत में जल्द से जल्द कोविड प्रतिबंधों को सख्त करना चाहिए, नहीं तो पहले जैसे हालात हो सकते है। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि, इस वक्त भारत के हर बाजार, हर मॉल खचाखच भरे हैं और कोविड गाइडलाइंस को लोग भूल चुके हैं, लिहाजा अगर ओमिक्रॉन वेरिएंट अगर कमजोर नहीं हुआ, तो भारत एक बार फिर से विनाश देख सकता है।












Click it and Unblock the Notifications