SCO बैठक में अजीत डोभाल ने चीन-पाकिस्तान पर साधा निशाना, आतंकवाद और विस्तारवादी नीति को लेकर कही ये बात
अजीत डोभाल ने पाकिस्तान के सामने आतंकवाद का मुद्दा उठाया। वहीं चीन के सामने उन्होंने उसकी विस्तारवादी नीति की आलोचना की। चीन और पाकिस्तान के NSA इस मीटिंग में वर्चुअली जुड़े थे।

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राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने बुधवार को एससीओ देशों की बैठक में चीन और पाकिस्तान पर इशारों ही इशारों में खूब सुनाया। उन्होंने बिना नाम लिए चीन की 'विस्तारवादी नीति' और पाकिस्तान की 'आतंकी नीति' को लेकर निशाना साधा। एससीओ सदस्य देशों की सुरक्षा परिषद के सचिवों की 18वीं बैठक में अजीत डोभाल ने कहा कि आतंकवाद का कोई भी काम अनुचित है। SCO देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की यह बैठक बुधवार को शुरू हुई। पाकिस्तान के NSA इस बैठक में वर्चुअली जुड़े थे। इसके साथ चीन ने भी इस बैठक में वर्चुअल माध्यम से हिस्सा लिया।
अजीत डोभाल ने कहा कि किसी भी तरह का आतंकवाद अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक खतरा है। सभी देशों को आतंकवाद से निपटने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों सहित काउंटर टेररिज्म प्रोटोकॉल के प्रति अपने दायित्व को पूरा करना है। अजीत डोभाल ने कहा कि आतंकवाद का कोई भी कार्य, चाहे उसकी प्रेरणा कुछ भी हो, अनुचित है। इसका पोषण करना अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा है।
अजित डोभाल ने कहा कि एससीओ के सदस्य देशों को एक दूसरे देशों की संप्रभुता का सम्मान करना चाहिए और आस-पास के क्षेत्रों में एकतरफा सैन्य गतिविधियां नहीं करनी चाहिए। बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने क्षेत्रीय संपर्क की आवश्यक्ता पर जोर देते हुए कहा कि इस तरह की पहल परामर्शी और पारदर्शी होनी चाहिए। डोभाल के इस बयान के काफी मायने हैं क्योंकि चीन कुछ सालों में सीमा पर अधिक आक्रमक हुआ है।
अजित डोभाल ने बैठक से पहले अपनी टिप्पणी में बैठक के लिए निमंत्रण स्वीकार करने के लिए सदस्य देशों के लिए आभार भी व्यक्त किया। अजीत डोभाल ने कहा कि सभी देशों को आतंकवाद से निपटने के लिए यूएनएससी के प्रस्तावों सहित काउंटर टेररिज्म प्रोटोकॉल के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। बता दें कि एससीओ की अगली महत्वपूर्ण बैठक 27-29 अप्रैल को दिल्ली में आयोजित होने वाली रक्षा मंत्रियों की बैठक होगी।
एससीओ फिलहाल शंघाई सहयोग संगठन के 8 पूर्ण सदस्य हैं। इनमें रूस, भारत, चीन और पाकिस्तान के साथ ही 4 मध्य एशियाई देश कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान शामिल हैं।












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